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'हमारी बीमार धरती का इलाज बेहद जरूरी है', 'जल पुरुष' ने की CM नीतीश की योजना की तारीफ

News18 Bihar
Updated: November 22, 2019, 8:26 AM IST
'हमारी बीमार धरती का इलाज बेहद जरूरी है', 'जल पुरुष' ने की CM नीतीश की योजना की तारीफ
सासाराम में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ राजेंद्र सिंह.

डॉ राजेंद्र सिंह ने कहा कि आज से 40 साल पहले देश के जितने भागों में बाढ़ आती थी आज उससे 8 गुना अधिक क्षेत्रों में बढ़ आ रही है वहीं, 10 गुना अधिक क्षेत्रों में सुखाड़ की स्थिति रहती है.

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रोहतास. मैग्सेसे पुरस्कार विजेता और 'जल पुरुष' के नाम से मशहूर डॉ राजेंद्र सिंह (Dr Rajendra singh) ने बिहार सरकार के जल जीवन हरियाली योजना (Jal Jeevan Hariyali Yojna) की तारीफ करते हुए कहा है कि यह एक बहुत अच्छी योजना है और इसे बढ़ावा देने की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि यह जरूरी है कि इस योजना को जनता की योजना बनाकर धरातल पर उतारा जाए तभी सार्थक हो पाएगा. राजेंद्र सिंह गुरुवार को सासाराम के नारायण मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (Narayan Medical College and Hospital of Sasaram) में छात्रों के बीच आख्यान देने आए हुए थे.

सासाराम के गोपाल नारायण सिंह विश्वविद्यालय के अंतर्गत नारायण मेडिकल कॉलेज के सभागार में आयोजित  कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि जब जल और हरियाली होगी तभी जीवन होगा इसलिए जीवन को सुचारू रूप से चलाने के लिए जल और हरियाली को बनाए रखना बहुत जरूरी है, लेकिन यह सिर्फ सरकार का काम नहीं है जब तक इसमें जन जन का सहयोग नहीं होगा तब तक इसके परिणाम नहीं निकलेंगे.

ग्लोबल वार्मिंग से बदल रहा मौसम का मिजाज
डॉ. राजेंद्र सिंह ने कहा कि आज हमारी धरती बीमार हो गई है, इसे इलाज की आवश्यकता है. आज से 40 साल पहले देश के जितने भागों में बाढ़ आती थी आज उससे 8 गुना अधिक क्षेत्रों में आज बढ़ आ रही है. आज से 40 साल पहले देश के जितने जगह पर सुखार की समस्या थी, आज उससे 10 गुना अधिक जगह पर सुखाड़ देखने को मिल रही है. यह सब ग्लोबल वार्मिंग और क्लाइमेट चेंज के कारण हो रहा है. हम सबको मिलकर बीमार धरती को स्वस्थ करना है.

सासाराम के नारायण मेडिकल कॉलेज एंड हस्पीटल में अपना संबोधन देते हुए डॉ राजेंद्र सिंह.


बिहार की आधी धरती बुखार से है ग्रसित
'जल पुरुष' ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों के दोहन के कारण बिहार की आधी धरती बुखार से ग्रसित है. हमें इसे पानी की पट्टी देनी है ताकि इसका बुखार उतरे. हम जितना ज्यादा से ज्यादा धरती को हरी-भरी रखेंगे, आकाश का पानी उतना ही हमारी ओर आकर्षित होगा. खासकर दक्षिण बिहार का इलाका पानी की समस्या से ग्रसित है. धरती का पानी धीरे-धीरे नीचे की ओर खिसक रही है. हम जितनी तेजी से धरती के पानी को पाताल से खींच रहे हैं उतनी तेजी से हम इसे पानी दे नहीं पा रहे हैं.यही कारण है कि हमारी धरती बुखार से ग्रसित है.नदियों को जोड़कर पानी को किया जा सकता है संचित
उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का सपना थ कि वे देश के नदियों को जोड़ें ताकि जो नदियों का जल जाकर समुद्र में गिर जाती हैं उसे एक दूसरे से जोड़कर संचित किया जा सके. इससे जल स्रोत भी बढ़ेगी और इसका फायदा धरती को होगा. यह एक बहुआयामी योजना है और इसमें कई सरकारों को मिलकर एक साथ काम करना होगा तभी यह संभव हो सकता है. इस प्रकार हम नदियों के जल को ज्यादा से ज्यादा बेहतर उपयोग कर सकते हैं.

पोखर-तालाब के पूजा की परंपरा को करना होगा पुनर्जीवित
डॉ राजेंद्र सिंह ने कहा कि हमारी संस्कृति में तालाब तथा पोखर की पूजा की परंपरा है. जीवन के हर संस्कार इससे जुड़े हैं. जन्म से लेकर विवाह तथा मृत्यु तक हर संस्कार में तालाब पोखर की पूजा अर्चना की परंपरा रही है, लेकिन हम इसे भूलते जा रहे हैं. आज जरूरत है इसे पुनर्जीवित करने की क्योंकि हम प्रकृति से इतनी दूर होते गए, हम ज्ञान-संस्कृति से दूर होते चले गए. जब हम प्रकृति की पूजा किया करते थे तो हम विश्वगुरु थे. क्योंकि पृथ्वी, अग्नि, जल, आकाश तथा वायु की पूजा का हमारे संस्कृति में उल्लेख है. आज जरूरत है हम पुनः इन पंचतत्व की पूजा करें तभी हम फिर से विश्व गुरु बन सकते हैं.

डॉ राजेंद्र सिंह ने नदियों को जोड़ने की योजना का समर्थन करते हुए प्रकृति पूजा की परंपरा को पुनर्जीवित करने की भी बात कही.


युवाओं को प्रकृति से प्यार करने की दी नसीहत
इस कार्यक्रम में डॉ राजेंद्र सिंह के अलावा पानी के क्षेत्र में काम करने वाले रामबिहारी सिंह कॉलेज के सेक्रेटरी गोविंद नारायण सिंह तथा अन्य लोग उपस्थित हुए. इस दौरान छात्र छात्राओं ने जल पुरुष का स्वागत किया. डॉ राजेंद्र सिंह ने छात्र-छात्राओं को प्रकृति से प्रेम करने की नसीहत दी तथा कहा कि प्रकृति के साथ जीने से ही जीवन सफल हो सकता है.

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First published: November 22, 2019, 8:14 AM IST
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