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बिहार के इस इलाके में किसानों के लिए तबाही का सबब बनी बारिश, 3 करोड़ की सब्जियां बर्बाद

News18 Bihar
Updated: September 30, 2019, 3:31 PM IST
बिहार के इस इलाके में किसानों के लिए तबाही का सबब बनी बारिश, 3 करोड़ की सब्जियां बर्बाद
बिहार के अधिकांश जिलों में पिछले तीन दिनों से लगातार बारिश हो रही है (सांकेतिक चित्र)

बिहार के रोहतास में किसानों ने बैगन, फूलगोभी कद्दू आदि की खेती की थी वो सब बर्बाद हो गए हैं. इससे किसानों को बड़ा नुकसान हुआ है. दूसरी तरफ कई जगह धान की फसल को भी नुकसान पहुंचने की आशंका है.

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  • Last Updated: September 30, 2019, 3:31 PM IST
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रोहतास. बिहार में लगातार हो रही बारिश (Heavy Rain Fall) किसी के लिए आफत बन कर आई है तो किसी के लिए खुशियों का सबब. इस बारिश से जहां धान की खेती करने वाले किसानों के चेहरे खिल गए हैं वहीं सब्जी जैसी नगदी फसल की खेती करने वाले किसानों की कमर टूट सी गई है. अकेले रोहतास (Rohtas) जिला जिसे धान का कटोरा कहा जाता है के सब्जी उपजाने वाले किसानों को इस बारिश से तीन करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है.

धान की खेती करने वालों के लिए खुशी

धान उपजाने वाले किसानों को इस बार भी यहां बंपर फसल की उम्मीदें हैं. जिला में एक लाख 94 हजार हेक्टेयर भूमि में इस बार धान की खेती की जा रही है. जहां उम्मीद है कि 13 लाख क्विंटल से अधिक धान की पैदावार होगी, लेकिन आसमान से बरस रही आफत यानी मूसलाधार बारिश से किसानों के सामने संकट उत्पन्न हो गयी है.

सब्जी की फसल बर्बाद

इलाके में खेती की सब्जी की खेती लगभग बर्बाद हो गई है. किसानों ने बैगन, फूलगोभी कद्दू आदि की खेती की थी वो सब बर्बाद हो गए हैं. अगर सब्जी की बात करें तो सिर्फ सासाराम क्षेत्र में 3 करोड़ से अधिक के सब्जी की खेती से किसानों को नुकसान पहुंचा है. शिवसागर प्रखंड के कुम्हऊ गांव के किसान श्री भगवान पांडेय कहते हैं कि सब्जी की फसल बर्बाद हो गई है, लेकिन हथिया नक्षत्र कि पानी धान के फसलों को लाभ पहुंचाया है.

सिंचाई की है व्यवस्था

कई जगहों पर ज्यादा पानी यानी अतिवर्षा होने के कारण जो फसल डूब गए हैं उसमें धान का बाली कम लगने की संभावना है. रोहतास जिला में 19 प्रखंड है, जिसमें 14 प्रखंडों में सिंचाई की समुचित व्यवस्था है. जहां धान की उपज बेहतर होती है लेकिन सासाराम के दक्षिणी इलाके में तिलौथू, रोहतास तथा चेनारी के कुछ क्षेत्रों में जहां नहर की व्यवस्था नहीं है.
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अधिकारी बोले

इस संबंध में जिला कृषि पदाधिकारी राधारमण ने बताया कि कृषि विभाग पूरे स्थिति पर नजर रखे हुए है. किसानों का कहना है कि हथिया नक्षत्र का पानी चुकी 'सोना' होता है लेकिन इसकी अपनी एक सीमा है. धान के फसल पूरी तरह पानी में डूबना नहीं चाहिए, निचले इलाके में जहां जहां धान की फसलें पूरी तरह डूब गई हैं वहां नुकसान की संभावना है, लेकिन जिन खेतों में पानी लग गया है वहां कोई खास दिक्कत नहीं है.

रिपोर्ट- अजीत कुमार

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First published: September 30, 2019, 3:11 PM IST
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