लाइव टीवी

जल-नल योजना ने बदल दी कैमूर पहाड़ी पर बसे रेहल गांव की तस्वीर, पहले 5 KM से लाते थे पानी
Rohtas News in Hindi

News18 Bihar
Updated: May 21, 2018, 10:34 AM IST
जल-नल योजना ने बदल दी कैमूर पहाड़ी पर बसे रेहल गांव की तस्वीर, पहले 5 KM से लाते थे पानी
रेहल वह गांव है जहां कभी डीएफओ संजय सिंह की हत्या कर दी गई थी. नक्सलियों के डर से कभी अधिकारी यहां जाने से कांपते थे लेकिन अब परिस्थिति बदल गई है और लोग धीरे-धीरे मुख्यधारा से जुड़ने लगे हैं.

रेहल वह गांव है जहां कभी डीएफओ संजय सिंह की हत्या कर दी गई थी. नक्सलियों के डर से कभी अधिकारी यहां जाने से कांपते थे लेकिन अब परिस्थिति बदल गई है और लोग धीरे-धीरे मुख्यधारा से जुड़ने लगे हैं.

  • Share this:
गर्मी शुरू होते ही पानी की किल्लत और इससे जुड़ी समस्याएं सुर्खियां बनने लगी हैं. न्यूज 18 की खास सीरीज़ 'पानी की कहानी' के तहत हम देशभर के अलग अलग हिस्सों के पानी की कहानी बताने की कोशिश कर रहे हैं. इस कड़ी में आज हम रोहतास जिले के रेहल गांव की बात करेंगे.

रोहतास जिले के रेहल गांव के लोगों को गर्मी के दिनों में पेयजल के भारी संकट से जुझना पड़ता था. अब इस गांव की तकदीर और तस्वीर दोनों बदल गई है. यहां मुख्यमंत्री नल-जल योजना का लाभ लोगों को मिलने लगा है, जहां कभी पानी के लिए लोगों को 4 से 5 किलोमीटर की सफर तय करना पड़ता था, लेकिन अब यहां लोगों को अपने गली-मोहल्ले में ही पीने का पानी मिल रहा है. यह सब सरकार और अधिकारियों की इच्छाशक्ति के कारण संभव हो सका.

जिला मुख्यालय से 90 किलोमीटर दूर कैमूर पहाड़ी पर स्थित पिपराडीह पंचायत का यह गांव आज विकास का मिसाल बन गया है. लोग इस गांव का उदाहरण देने लगे हैं. यह वही गांव है जहां के लोग पीने के पानी के लिए दूर तक पैदल जाते थे. बरसात में तो स्थिति ठीक रहती थी, लेकिन अप्रैल महीने से लेकर जुलाई तक लोगों को गड्ढे का पानी पीना पड़ता था, लेकिन अब सरकार ने वहां पर डीप बोरिंग कर सोलर सिस्टम से पानी की व्यवस्था करा दी है.

रेहल गांव रोहतास जिला के नौहट्टा ब्लॉक में स्थित है. पगडंडी के रास्ते इस गांव से प्रखंड की दूरी 14 किलोमीटर, जबकि गाड़ी से जाने पर 52 किमी की दूरी तय करनी पड़ती हैं. गांव के मुखिया श्याम नारायण उरांव के मुताबिक रेहल गांव में करीब 160 घर हैं और करीब 1 हजार की आबादी हैं. इस गांव में उरांव जनजाति के लोगों की संख्या सबसे ज्यादा है.



श्याम नारायण के अनुसार, जल-नल योजना से इस गांव की तकदीर बदल गई है. गर्मी शुरू होते ही इस गांव के लोगों को चार-चार किलोमीटर दूर स्थित कुएं से पानी के लिए जाना पड़ता था. गांव से पांच किलोमीटर दूरी पर स्थित तीन कुएं थे, जहां से घर की महिलाएं और पुरुष पानी लाकर काम चलाते थे. मवेशियों को पानी भी यही से लाना पड़ता था.

पुराने दिनों को याद करते हुए श्याम नारायण कहते हैं जिंदगी तब काफी मुश्किल थी. लोगों को चार पांच किलोमीटर पैदल पानी के लिए जाना पड़ता था और परिवार के एक-दो सदस्यों का काम ही कुएं से पानी लाना था.

rehal-village of rohtas, रोहतास का रेहल गाांव
रेहल गांव की तस्वीर


मुखिया के अनुसार 2013 में गांव से पांच किमी की दूरी पर मनरेगा योजना के तरह एक कुंए का निर्माण हुआ, जो पानी का एक बढ़िया स्रोत बन गया. आज गांव के लोगों के प्रयास से लोगों को घर में पानी मिलना संभव हो सकता है. इस गांव में पानी की कमी के कारण सिर्फ धान की खेती होती है. गांव की जनीखा बेगम भी गांव में पानी आने से काफी खुश हैं और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को बहुत धन्यवाद देती हैं.

बताते चलें कि रेहल वह गांव है, जहां कभी डीएफओ संजय सिंह की हत्या कर दी गई थी. नक्सलियों के डर से कभी अधिकारी यहां जाने से कांपते थे, लेकिन अब परिस्थिति बदल गई है और लोग धीरे-धीरे मुख्यधारा से जुड़ने लगे हैं.

(सासाराम से अजित कुमार के साथ पटना से प्रेम रंजन की रिपोर्ट)

 

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए रोहतास से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: May 21, 2018, 8:48 AM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर