बिहार: भारत माता की जय... उद्घोष के बीच शहीद खुर्शीद खान को दी गई अंतिम सलामी
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बिहार: भारत माता की जय... उद्घोष के बीच शहीद खुर्शीद खान को दी गई अंतिम सलामी
शहीद खुर्शीद खान को अंतिम सलामी दी गई.

बारामूला आतंकी हमले (Baramulla terrorist attack) में शहीद हुए बिहार के दाे सीआरपीएफ (CRPF) जवान, 27 साल के लवकुश शर्मा और 41 साल के खुर्शीद खान को अंतिम विदाई दी गई.

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रोहतास. कश्मीर के बारामूला में आतंकी हमले (Terrorist attack in Baramulla) में अपनी शहादत देने के बाद बिक्रमगंज के घुसिया कला के रहने वाले 41 वर्षीय खुर्शीद खान सुपुर्द ए खाक हो गए. इस दौरान लोग हिंदुस्तान जिंदाबाद, भारत माता की जय तथा शहीद खुर्शीद खान (Shaheed Khurshid Khan) अमर रहे के नारे लगाने लगे. पूरा वातावरण देशभक्तिमय हो गया. गांव के सभी लोग इस दौरान पाकिस्तान (Pakistan) को सबक सिखाने की बात कहते रहे. ग्रामीणों ने पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे भी लगाए. बता दें कि बता दें कि जम्मू-कश्मीर के बारामूला में आतंकी हमले में शहीद होने के बाद मंगलवार की देर रात उनका पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव पहुंचा. गांव पहुंचते ही पूरे गांव में कोहराम मच गया.

शहीद का शव गांव पहुंचते ही अपने-अपने घरों से लोग निकल कर सड़क किनारे खड़े हो गए. सड़क के दोनों ओर खड़े होकर लोगों ने भारत माता की जय और खुर्शीद खान अमर रहे के नारे लगाए. युवाओं की टोली हाथों में तिरंगा लेकर शहीद को सम्मान देती हुई दिखी. पूरा बिक्रमगंज बाजार से लेकर शहीद के गांव घुसिया-कला तक सड़क गाड़ियों से पट गई. हजारों की संख्या में लोग गांव की ओर जाते दिखे.

जिला प्रशासन ने दी श्रद्धांजलि



रोहतास के डीएम पंकज दीक्षित एसपी सत्यवीर सिंह इस दौरान दल बल के साथ मौजूद रहे. शहीद के पार्थिव शरीर पर उन लोगों ने पुष्पांजलि अर्पित की. श्रद्धांजलि देने वालों में स्थानीय विधायक संजय यादव के अलावे सीआरपीएफ के कई वरीय अधिकारी मौजूद रहे. देर रात घोसिया कला गांव में ही स्थित कब्रिस्तान में खुर्शीद खान के पार्थिव शरीर को सुपुर्द-ए-खाक किया गया.
36 लाख रुपए और सरकारी नौकरी

डीएम पंकज दीक्षित ने फिलहाल पीड़ित शहीद के परिवार को 11 लाख का चेक उपलब्ध कराया. बाद में सरकार ने शहीद के परिजनों को 36 लाख रुपए देने की घोषणा की है. जिसमें से 25 लाख मुख्यमंत्री राहत कोष से दिया जा रहा है. साथ ही एक आश्रित को सरकारी नौकरी भी दी जाएगी. सरकार के इस घोषणा से शहीदों शहीद के परिजनों को सम्मान देने की एक कोशिश की गई है.

गांव वालों को है शहादत पर गर्व

शहीद के गांव के लोग अपने जवान बेटे के शहादत पर गर्व की अनुभूति कर रहे हैं. शहीद के चाचा मतीन खान ने बताया कि उनके परिवार के और बच्चे की जरूरत हुई तो वह देश के लिए शहादत को सीमा पर जाने को तैयार हैं. पड़ोसी मो. सिराजुद्दीन खान कहते हैं कि खुर्शीद खान उनके भाई जैसा था. बचपन से उनके साथ रहना-खेलना हुआ है. उनके जाने से पूरा गांव मर्माहत है.

पूरा परिवार है मर्माहत

शहीद खुर्शीद खान की पत्नी नगमा रो-रोकर बेहाल है. उनकी तीन बेटियां 13 वर्षीय जहीदा खुर्शीद, 8 वर्षीय समरीन तथा 5 वर्षीय अप्सा खुर्शीद अपने पिता की तस्वीर से लिपटकर बिलख बिलख कर रो रही है. परिजन बताते हैं कि 28 जून की रात को वे जम्मू-कश्मीर गए थे. प्रतिदिन सुबह-शाम फोन पर बात भी करते थे. खुर्शीद खान अपने परिवार में सबसे बड़े थे. उनके 4 छोटे भाई भी हैं. खुर्शीद खान की नौकरी सन 2001 में सीआरपीएफ में लगी थी. पूरे परिवार का भरण पोषण वे खुद करते थे.

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