वर्तमान समय में 'लोहिया के गांधी' हैं देश के लिए उदाहरण, सीख लेने की जरूरत
Rohtas News in Hindi

वर्तमान समय में 'लोहिया के गांधी' हैं देश के लिए उदाहरण, सीख लेने की जरूरत
बिहार के रोहतास जिले के डालमियानगर में पूर्व विधायक राम इकबाल वारसी ने अपने जीवन का अधिकांश समय बिताया. (फाइल फोटो)

समाजवादी चिंतक राम इकबाल वरसी आज के राजनेताओं के लिए एक सबक है. उनकी त्याग, सादगी तथा चिंतन से सभी को प्रेरणा लेने की जरूरत है.

  • Share this:
  • fb
  • twitter
  • linkedin
सासाराम. 'राजनीति से दूर रहना चाहिए', 'राजनीति नहीं करो' और 'राजनीति बेकार की चीज है'. इस तरह की बातें आपको कई बार सुनने को मिल जाती होगी. आम लोगों के अलावा बौद्धिक वर्ग लगातार इस बार चर्चा करता है कि आखिर राजनीति (Politics) जा कहां रही है? इस तरह की चर्चा देश के इलिट कहे जाने वाले बौद्धिक वर्ग के लोग दिल्ली के कॉन्सटीट्यूशन क्लब और इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (India International Centre) जैसी जगहों पर करते हैं. वहीं कई छोटे बड़े शहरों के चौक चौराहों पर भी आम लोग भी इसपर बात करते हैं. इन चर्चाओं में विमर्श के दौरान राजनेताओं की सुचिता, धैर्य और ईमानदारी के किस्से सुनाए जाते हैं, जिससे युवा पीढ़ी सीख ले सके और जीवन में उन मूल्यों और आदर्शों को उतार सके. लेकिन आज के दौर में राजनेताओं के मूल्यों में गिरावट के साथ उनकी नैतिकता पर प्रश्न खड़ा होता है. साथ ही धैर्य की कमी और शब्दों और मर्यादाओं को तार-तार करने की बात की जाती है. इस समय हम 'लोहिया के एक गांधी' की चर्चा कर लेते हैं.

'जानिए कौन बन गए लोहिया के गांधी'?
लोहिया के इस गांधी का जन्म बिहार (Bihar) के भोजपुर (Bhojpur) जिले के तरारी प्रखंड के 'वरसी' नामक गांव में हुआ था. राम इकबाल वरसी नाम के इस शख्स को राममनोहर लोहिया ने 'पीरो का गांधी' कहा था. समाजवादी पृष्टभूमि के इस नेता ने एकाएक राजनीति में कदम रखा. लेकिन इस नेता के धैर्य के कारण राममनोहर लोहिया ने नया नाम 'पीरो का गांधी' दे दिया. रामइकबाल वारसी नामक यह व्यक्ति बिहार के पीरो के विधायक थे.

'क्यों बने वरसी पीरो के गांधी'?



स्थानीय पत्रकार कुमार बिन्दु बताते हैं कि उनके निर्वाचन क्षेत्र के किसी गांव में एक बार मकान निर्माण के दौरान जमीन के मामले में विवाद हो गया था. जानकारी मिलने के बाद वो उस गांव में पहुंच गए. इस दौरान उनपर भी कई बार लाठियां बरसाई गई. लेकिन विधायक वरसी ने गांधीवादी तरीका अपनाया. लाठियां खाने के बाद भी उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया. बाद में किसी कार्यक्रम के दौरान समाजवादी नेता राममनोहर लोहिया इसकी जानकारी मिली. उन्होंने मंच से राम इकबाल वारसी को 'पीरो का गांधी' बताया.



राम इकबाल वरसी, बिहार पॉलिटिक्स, राजनीति, रोहतास न्यूज, Bihar Politics, Cm Nitish Kumar, Rohtas News
राम इकबाल वरसी की प्रतिमा पर माल्यार्पण करते बिहार के सीएम नीतीश कुमार.


 

विरोधी उम्मीदवार की मां से लिया जीत का आशीर्वाद
पीरो से सोशलिस्ट पार्टी से विधायक रहे वरसी के जीवन की एक कहानी बड़ी अलग है. आज जहां एक नेता दूसरे नेता को देखना नहीं चाहते. राजनीतिक और व्यक्तिगत बयानबाजी करते हैं, उस दौर में वरसी की राजनीति का अंदाज कुछ अलग था. चुनाव मैदान में उतरने के बाद वरसी अपने खिलाफ लड़ने वाले विरोधी उम्मीदवार के घर जा पहुंचे. इस दौरान अपने विरोधी उम्मीदवार की मां से जीत का आशीर्वाद लिया. चुनाव जीतने के बाद वो दोबारा भी वहां गए.

इसे विडंबना कहे या सच्चाई लेकिन समाज में अलग राह चुनने वाले और सिद्धांतवादी लोगों के परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत बेहतर नहीं रहती. बिहार के रोहतास जिले के डालमियानगर में पूर्व विधायक राम इकबाल वारसी ने अपने जीवन का अधिकांश समय बिताया. उनकी साल 2016 में मृत्यू हो गई. लेकिन पूर्व विधायक वारसी साधारण तरीके से डालमियानगर के मथुरापुर कॉलोनी में कई साल रहे. उनके एक बेटे शिवजी सिंह स्थानीय कॉलेज में प्राध्यापक हैं. परिवार का रहन सहन और जीवन सादगी भरा रहा. जबकि आज के दौर के नेता चकाचौंध वाली जिंदगी जीते हैं. इसे देखकर भी आज का युवा वर्ग प्रेरणा ले सकता है.

राम इकबाल वरसी कहा करते थे कि देश के हर व्यक्ति को किसान होना चाहिए. क्योंकि किसान उत्पादन करता है और उत्पादन से ही संसाधन में बढ़ोतरी होती हैं. और जब संसाधन बढ़ता है तो देश विकास करता है. उनका मानना था कि किसी भी संकाय में छात्र पढ़ाई क्यों न करें? उसे कृषि की जानकारी देना बेहद जरूरी है. देश का हर व्यक्ति कृषि तथा उसके उत्पादन से किसी न किसी माध्यम से जुड़ेगा. तभी देश विकास करेगा.

विधायकी का पेंशन भी ठुकराया
आज जहां सत्ता धन संग्रह का साधन बनता जा रहा है, ऐसे में राम इकबाल वरसी उन राजनेताओं के लिए एक सबक है. जो सत्ता का दुरुपयोग धनोपार्जन के लिए करते हैं. वे इतने सिद्धांत वादी थे कि ताउम्र पूर्व विधायक के रूप में मिलने वाली पेंशन तक नही ली. उनका मानना था कि राजनीति जनसेवा है. ऐसे में राजकोष पर पहला अधिकार जनता का है और जनता के पैसे से नेता अपना जीविका चलाये. यह अनुचित है. वे राजनेताओं को मिलने वाले पेंशन को हराम बताते थे.

निधन पर पहुंचे थे राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद सहित कई राजनेता
राम इकबाल बरसी के निधन पर उनकी अंत्येष्टि उनके पैतृक गांव पीरों के वरसी में किया गया था. जहां खुद राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद पहुंचे थे. इसके अलावा सीएम नीतीश कुमार ने भी श्रद्धांजलि व्यक्त की थी. रामेश्वर बंसी अपना पूरा जीवन अभावों में व्यक्त किए लेकिन कभी भी जग जाहिर नहीं होने दिया.

सीएम नीतीश कुमार ने पीरो में लगवाई वरसी की आदमकद प्रतिमा
सीएम नीतीश कुमार खुद समाजवादी चिंतक राम इकबाल वरसी से प्रभावित थे. 10 अक्टूबर 2019 को भोजपुर के पीरो मैं उन्होंने वरसी की आत्मकथा प्रतिमा का अनावरण किया. इस दौरान उन्होंने परिवार के लोगों से भी मुलाकात की थी.

 

ये भी पढ़ें:  बिहार के इस क्वारंटाइन सेंटर में 5 साल के बच्चे का मना बर्थडे, दिखा अलग नजारा
First published: May 27, 2020, 3:23 PM IST
अगली ख़बर

फोटो

corona virus btn
corona virus btn
Loading