उम्र के साथ बढ़ रही बीमारी, अब अपने ही घर में जंजीर से बंधे हैं ये चार बच्चे

गरीब मजदूर पिता कहते हैं कि एक बच्चों को बीमारी हो तो इसी तरह इलाज करवा दें ले लेकिन अगर एक साथ चार-चार बच्चे मानसिक रोग से ग्रसित हो गए तो इनका इलाज कराना अब संभव नहीं है.

News18 Bihar
Updated: August 14, 2019, 4:52 PM IST
उम्र के साथ बढ़ रही बीमारी, अब अपने ही घर में जंजीर से बंधे हैं ये चार बच्चे
अपने ही घर में जंजीर से कैद बच्चे
News18 Bihar
Updated: August 14, 2019, 4:52 PM IST
पूरा देश आजादी की 72 वीं सालगिरह मना रहा है. लेकिन हम जो कहानी आपको बता रहे हैं उसे पढ़कर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे. ये कहानी है जंजीरों में बंधे बचपन की जो रोहतास जिला के डेहरी के बारह-पत्थर से आई है. यहां एक माता-पिता अपने चार बच्चों को जंजीर से बांधकर रखने को मजबूर है. जिस लोहे की जंजीर से किसी जंगली जानवर या फिर कुख्यात अपराधियों को बांधकर रखा जाता है उसी जंजीर में इन चार मासूमों का बचपन बंधा है.

जंजीर में बंधे हैं बच्चे

लोहे की जंजीरों में बंधे चार भाई डेहरी के बारह- पत्थर मोहल्ला के रहने वाले शरफुउद्दीन अंसारी और प्रवीण बीवी के हैं. इन दोनों की आठ संताने हैं जिसमें चार लड़कों की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है जिसकी वजह से आए दिन बच्चे उपद्रव करते रहते है. मौका मिलते ही ये बच्चे घर से बाहर भाग जाते हैं. ऐसे में एक साथ चार-चार मानसिक दिव्यांगों को नियंत्रण करना अब इस मजदूर परिवार के बस की बात नहीं रही तो इन लोगों ने इन चारों मानसिक रोगी भाईयों की पैरों में लोहे की बेड़ियां पहना दी.

उम्र के साथ बढ़ी बीमारी

पिता सरफुद्दीन कहते हैं कि जन्म के समय उनके बच्चे स्वस्थ थे लेकिन जब दो साल से चार साल की उम्र हुई तो धीरे-धीरे चार बच्चों की मानसिक स्थिति बिगड़ गई, वहीं पांचवा संतान भी अब उसी राह पर है. इन बच्चों की मां परवीन बीबी कहती हैं कि जन्म से तो सब ठीक-ठाक था लेकिन जैसे-जैसे उम्र बढ़ी, उनके बच्चे मानसिक विकलांग होते चले गए. चार बच्चे तो मानसिक रूप से दिव्यांग हैं, अब पांचवां भी उसी राह पर है.

गरीबी के कारण नहीं हुआ इलाज

आठ बच्चों में छह लड़का तथा दो लड़की हैं. गरीबी के कारण इन बच्चों का इलाज नहीं हो सका. गरीब मजदूर पिता कहते हैं कि एक बच्चों को बीमारी हो तो इसी तरह इलाज करवा दें ले लेकिन अगर एक साथ चार-चार बच्चे मानसिक रोग से ग्रसित हो गए तो इनका इलाज कराना अब संभव नहीं है. आज घर में इन बच्चों को नियंत्रण में रखना काफी मुश्किल हो गया है, ऐसे में चारों मानसिक दिव्यांग भाइयों को घर में ही जंजीरों से बांधकर रखा जाता है.
Loading...

बेड पर ही होता है सारा काम

नित्य क्रिया से लेकर सोने तक 24 घंटा उनके पांव में कुछ इसी तरह जंजीरें बंधी ही रहती हैं. 10 साल से 16 साल तक के ही चारों भाई की उम्र हैं. इन लोगों को किसी प्रकार की कोई सरकारी सुविधा नहीं मिल सकी है, यहां तक कि दिव्यांगों को दिए जाने वाले पेंशन तक भी मयस्सर नहीं हो सका है. इस मामले में जब डिहरी के एसडीएम लाल ज्योतिनाथ शाहदेव से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वो जल्द ही बच्चों के इलाज की व्यवस्था करवाएंगे और दिव्यांगों को दी जाने वाली पेंशन की शुरुआत भी कर देंगे.

रिपोर्ट- अजीत कुमार

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए रोहतास से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: August 14, 2019, 4:44 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...