खेतों में पराली न जलाएं किसान, रोहतास कृषि विभाग ने शुरू किया विशेष जागरूकता अभियान

किसान खेतों में पराली न जलाएं इसको लेकर 20 से 30 नवंबर के बीच रोहतास में विशेष जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है.

किसान खेतों में पराली न जलाएं इसको लेकर 20 से 30 नवंबर के बीच रोहतास में विशेष जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है.

सरकार के निर्देशानुसार रोहतास जिला में किसानों को जागरूक किया जा रहा है. इसके लिए विभिन्न चरणों में कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं तथा इसमें सब की सहभागिता ली जा रही है.

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रोहतास. दिल्ली  और हरियाणा ( Delhi and Haryana) के आस-पास धान के पराली जलाए जाने से उठे धुंध से सीख लेते हुए रोहतास जिला प्रशासन (Rohtas District Administration) ने अभी से ही 'फसल अवशेष प्रबंधन' का काम शुरू कर दिया है. इस बार जिला प्रशासन ने किसानों को अभी से ही जागरूक करना शुरू कर दिया है. दरअसल धान की कटनी अब शुरू हो गई है, ऐसे में जिला प्रशासन चाह रहा है कि समय रहते किसानों को अपने फसलों के अवशिष्ट निस्तारण (Disposal) के गुर समझाए जाए और उन्हें खेतों में धान के डंठल जलाने से रोका जाए.

गांवों में लगाए जाएंगे चौपाल

इसके लिए कृषि विभाग के अधिकारी लगातार सक्रिय हैं. पिछले दिनों इसको लेकर जिला प्रशासन ने बैठक की. जिसमें स्थानीय जनप्रतिनिधियों की सहभागिता लेने पर सहमति बनी. 20 नवंबर से लेकर 30 नवंबर तक रोहतास जिला के 19 प्रखंडों के विभिन्न पंचायतों में किसान चौपाल लगाया जा रहा है. जिसमें किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के गुर सिखाए जा रहे हैं.

ताकि नष्ट न हो उर्वरा शक्ति 

किसानों को बताया जा रहा है कि वे अपने खेतों में फसलों के अवशेष को न जलाएं क्योंकि फसलों को आग लगा देने के कारण मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी कम जाती है. साथ ही मिट्टी में रहने वाले लाभदायक जीवाणु भी नष्ट हो जाते हैं, जिससे अगली फसलों को नुकसान पहुंचता है.

बढ़ जाता है प्रदूषण का स्तर



दरअसल इस इलाके को 'धान का कटोरा' भी कहा जाता है. रोहतास जिला में लगभग दो लाख हेक्टेयर भूमि में धान की फसल होती है, लेकिन हार्वेस्टर मशीन द्वारा धान की कटनी के कारण खेतों में डंठल छूट जाते हैं, जिसे ज्यादातर किसान जला देते हैं. इस कारण खेतों की उर्वरा शक्ति तो नष्ट होती ही है, साथ ही गांव में प्रदूषण का स्तर भी बढ़ जाता है.

रोहतास को 'धान का कटोरा' भी कहा जाता है.

फसल अवशेष प्रबंधन के गुर

जिला कृषि पदाधिकारी राधा रमन ने बताया कि कृषि सलाहकार से लेकर कृषि विभाग के विभिन्न निकायों के अधिकारियों और कर्मचारियों को इस जागरूकता अभियान में लगाया गया है. वह पंचायत स्तर पर जाकर किसानों के साथ बैठक कर रहे हैं तथा उन्हें फसल अवशेष प्रबंधन के बारे में बताया जा रहा है.

पारंपरिक तरीके से नष्ट करें अवशेष

उन्होंने कहा कि इस जागरूकता अभियान का फायदा भी देखने को मिल रहा है किसानों को बताया जा रहा है कि वे अपने फसलों को कटनी के बाद बचे हुए डंठल को जलाने के बजाय उसे खेत में ही पारंपरिक तरीके से नष्ट करें. ताकि उनके खेत की उर्वरा शक्ति भी बनी रहे और प्रदूषण भी न हो.

किसानों से की गई अपील 

जिलाधिकारी पंकज दीक्षित ने बताया कि सरकार के निर्देशानुसार रोहतास जिला में किसानों को जागरूक किया जा रहा है. इसके लिए विभिन्न चरणों में कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं तथा इसमें सब की सहभागिता ली जा रही है. जिस तरह से बिहार में भी प्रदूषण का स्तर बढ़ा है, ऐसे में किसानों से भी अपील की गई है कि वे फसलों को आग ना लगाएं.

इस संबंध में किसान श्रीभगवान पांडे का कहना है कि खेत को जल्दी खाली करने के लिए वे लोग जल्दबाजी में खेत में ही अवशेषों को नष्ट करने के लिए आग लगा देते हैं, लेकिन जिस प्रकार से प्रशासन द्वारा जानकारी दी जा रही है उसका फायदा वे लोग उठाएंगे.

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