Lockdown: अच्छी खबर! कैमूर वन अभयारण्य में खुलेआम विचरते देखा गया बाघ, पशुप्रेमियों में खुशी की लहर
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Lockdown: अच्छी खबर! कैमूर वन अभयारण्य में खुलेआम विचरते देखा गया बाघ, पशुप्रेमियों में खुशी की लहर
कैमूर वन अभयारण्य में विचरते बाघ की ट्रैपिंग कैमरे से ली गई ओरिजिनल तस्वीर.

पिछले साल के नवंबर महीने से ही कैमूर पहाड़ी के जंगलों में बाघ के होने के निशान मिलने लगे थे. वहीं, वन विभाग की टीम ने दुर्गावती जलाशय (Durgavati reservoir) के पास भी बाघ होने की पुष्टि की थी. जब 2 पालतू मवेशियों पर उसने हमला किया था.

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सासाराम. कोरोना वायरस के संक्रमण (Corona virus infection) के खतरे के मद्देनजर  लॉकडाउन (Lockdown)होने के बाद कैमूर वन अभयारण्य से एक अच्छी खबर आई है. दरअसल वन विभाग (Forest department) द्वारा जंगल में लगाए गए ऑटोमेटिक ट्रैपिंग कैमरे (Automatic trapping cameras) में जंगल में विचरण कर रहे एक नर बाघ (tiger) की तस्वीर कैप्चर हुई है. जिसके बाद वन विभाग तथा पशु प्रेमियों में खुशी की लहर दौड़ गई है. इस तस्वीर के सामने आने के बाद इस अभ्यारण्य (The sanctuary) को और सुरक्षित करने के उपाय तेज कर दिए गए हैं.

मिली जानकारी के अनुसार ट्रैपिंग कैमरे में संभवत 26 तारीख को यह तस्वीर मिली है जो शाम के 7 बजे की बताई जा रही है. बता दें कि पिछले साल के नवंबर महीने से ही कैमूर पहाड़ी के जंगलों में बाघ के होने के निशान मिलने लगे थे. वहीं, वन विभाग की टीम ने दुर्गावती जलाशय (Durgavati reservoir) के पास भी बाघ होने की पुष्टि की थी. जब 2 पालतू मवेशियों पर उसने हमला किया था.

पहले भी मिल चुके हैं बाघ के 'मल' तथा पद चिन्ह
सासाराम के डीएफओ प्रदुमन गौरव ने बताया कि नवंबर तथा दिसंबर के महीने में बाघ के 'मल' शौच भी बरामद हुए थे. इसे जांच के लिए देहरादून स्थित वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट आफ इंडिया भेजा गया था जिसमें पुष्टि हुई थी कि यह 'मल' बाघ के ही हैं. बहरहाल ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि मध्य प्रदेश या छत्तीसगढ़ से भी बाघ इस जंगल में आ गए होंगे.



पहले भी मिल चुके थे बाघ के पदचिन्ह




लॉकडाउन के बाद जंगल में लोगों के प्रवेश पर है रोक
बता दें कि लॉक डाउन के बाद ही जंगलों में लोगों की आवाजाही पर पूर्णता रोक लगा दी गई हैं. जिसके बाद जंगली पशु आराम से विचरण कर रहे हैं. वन विभाग के लोगों का कहना है कि पिछले कई महीनों से इस पर काम चल रहा है. अब जाकर लॉकडाउन होने के बाद बाघ की तस्वीर मिलने से पूरे रोहतास बंद प्रमंडल में खुशी की लहर दौड़ गई है.

जिस वन क्षेत्र में यह पदचिन्ह मिले हैं उसके फॉरेस्टर वाल्मीकि सिंह कहते हैं कि पिछले कई महीनों से बाघ के आवाजाही की सूचना मिल रही थी, लेकिन लॉकडाउन के बाद जब पूरे इलाके में शांति छा गई गाड़ियों की आवाजाही पर पूर्णता रोक लगा दिया गया. जंगल में रहने वाले जनजाति भी अब एक जगह सिमटकर रहने लगे ऐसे में मानवीय गतिविधि कम होने पर जंगली पशु ज्यादा सुरक्षित महसूस करते हुए विचरण कर रहे हैं. इसी का परिणाम है कि बाघ की तस्वीर मिली है.

जंगल में लगाए गए हैं ऑटोमेटिक ट्रैपिंग कैमरे
चूंकी कैमूर वन्य अभयारण्य को जंगली पशुओं के लिए सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से कई चिन्हित स्थानों पर ऑटोमेटिक रैपिंग कैमरे लगाए गए हैं जिसके माध्यम से वन्यजीवों के विचरण की तस्वीरें खींची जाती हैं. डीएफओ प्रदुमन गौरव ने यह भी बताया कि इसी कैमरे की मदद से यह सुखद तस्वीर सामने आई है. जिस तरह से जंगल में एक नर बाघ खुलेआम विचरण कर रहा है इससे संभव है कि उसके साथ एक बाघिन भी हो सकती है. इस पर भी विभाग की नजर है तथा जिस तरह से पूरे क्षेत्र को वन्यजीवों के लिये विकसित तथा जंगली जानवरों के लिए सुरक्षित किया जा रहा है. इससे आगे भी कई तस्वीरें मिल सकते हैं.

पर्यावरण प्रेमियों में खुशी की लहर
कैमूर पहाड़ी पर वन्य जीव अभ्यारण्य को और सुदृढ़ करने के लिए काम कर रहे पर्यावरण प्रेमी जमुहार निवासी गोविंद नारायण सिंह ने बताया कि यह एक सुखद समाचार है कि इस वाइल्ड लाइफ सेंचुरी में बाघ के पद चिन्ह तथा तस्वीर मिले हैं. पुराने जमाने में अपने पूर्वजों द्वारा कैमूर पहाड़ी के आसपास बाघ के होने की कहानियां उन्होंने सुनी थी, लेकिन जिस तरह से अब तस्वीरें सामने आई है. इससे पर्यावरण तथा वन प्रेमियों में खुशी की लहर दौड़ गई.

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