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Saharsa: माउंट एवरेस्ट के बेस कैंप और काला पत्थर तक जा पहुंची बिहार की ये बेटी, लहराया तिरंगा

Mount Everest: लक्ष्मी का सपना था कि वो एवरेस्ट पर चढ़ें और फिलहाल वो बेस कैंप तक पहुंच पाई हैं. उनकी इस सफलता के पीछे ...अधिक पढ़ें

    रिपोर्ट: मो.सरफराज आलम

    सहरसा. कोसी का इलाका समृद्धि और ज्ञान से भरा हुआ है. एक से एक विभूतियों ने सहरसा और कोसी का नाम देश दुनिया तक पहुंचाया है. इसी कड़ी में जिले के बनगांव की बेटी लक्ष्मी झा ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है. उन्होंने मात्र 9 दिन के अंतराल में ही नेपाल स्थित काला पत्थर पिक और माउंट एवरेस्ट बेस कैंप तक पहुंचकर तिरंगा झंडा को फ़हराया है. वे एवरेस्ट तक पहुंचने वाली बिहार की पहली बेटी बनी हैं. उन्हें यह सफलता काफी संघर्ष के बाद मिली है. उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाने में उनकी मां सरिता देवी का काफी सहयोग रहा है. जिनकी प्रेरणा एवरेस्ट पर फतह करने में उनकी सहायक बनीं.

    चूल्हा-चौका संभाल खींची घर की गाड़ी

    लक्ष्मी की सफ़लता और अपने संघर्ष की कहानी उनकी मां सरिता देवी ने बताई. उन्होंने बताया कि मेरे चार बच्चों में लक्ष्मी झा छोटी है. जब वो हुई तो उसी समय उनके पिता का निधन हो गया. रोजी रोटी का कोई सहारा नहीं होने के कारण गांव के ही कई घरों में चूल्हा-चौका संभाल कर परिवार की गाड़ी खिंचती रही. साथ ही चारों बच्चों का लालन-पालन भी करती रही. अपने बड़े दो भाई और एक बहन के साथ लक्ष्मी बड़ी होती रही. बड़े भाई श्याम झा ने जहां गांव में ही किताब की दुकान खोल ली. छोटे भाई गणेश झा ने पढ़ाई को जारी रखा और बड़े भाई दुकान में भी मदद दे रहे हैं. लक्ष्मी ने मैट्रिक और इंटर के बाद बीए की परीक्षा पास की. फिर ग्रुप डी की परीक्षा को पास कर पटना स्थित सचिवालय में सहायक कर्मचारी बनीं. वर्ष 2019 में उन्होंने सचिवालय में नौकरी में सफ़लता हासिल की.

    नौकरी के बाद एवरेस्ट पर चढ़ने की ओर बढ़ाया कदम

    मां ने बताया कि नौकरी के बाद लक्ष्मी ने अपना सपना पूरा करने के लिए एवरेस्ट पर चढ़ने की ओर कदम बढ़ाया. जिसके बाद उसकी जिंदगी में बदलाव आया. उनका नामांकन उत्तराखंड स्थित पर्वतारोहण के नेहरू इंस्टिट्यूट में हुआ. जहां वर्तमान में हरियाणा में पदस्थापित डीएसपी अनीता कुंडुन से उनकी मुलाकात हुई. जिसके सहयोग और मार्गदर्शन से वे आगे बढ़ती रही. जिसके बाद बीते दिनों नेपाल स्थित काला पत्थर पिक और माउंट एवरेस्ट बेस कैंप की चढ़ाई को पूरा किया. हालांकि वे एवरेस्ट के शिखर तक नहीं पहुंची हैं. चूंकि एवरेस्ट शिखर तक जाने में 40 से 45 लाख रुपए के खर्च के साथ कड़े अभ्यास की आवश्यकता है. वे फिलहाल दोनों ही स्थिति में अपने आपको सुरक्षित नहीं महसूस कर पा रही हैं. हालांकि उनकी इच्छा एवरेस्ट के शिखर पर भारत के झंडे को फहराना है.

    अगर आर्थिक मदद मिले तो पूरा होगा सपना

    मां ने बताया कि अगर आर्थिक मदद मिले तो लक्ष्मी एक दिन एवरेस्ट के शिखर तक पहुंचकर तिरंगा जरूर फराएगी. आज वे अपने सपने को साकार करने में लगी हुई है. इसके साथ परिवार को भी सहारा दे रही है.

    Tags: Bihar News in hindi, Mount Everest

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