मृत बागमती में बाढ़ से ध्वस्त हुआ पुल, 10 गांवों का मुख्यालय से टूटा संपर्क
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मृत बागमती में बाढ़ से ध्वस्त हुआ पुल, 10 गांवों का मुख्यालय से टूटा संपर्क
गांवों को जोड़ने वाला एकमात्र डायवर्जन पुल भी नदी के उफान में बह गया.

मुख्य पुल के पिछले साल ध्वस्त होने के बाद जब शासन-प्रशासन ने कोई सुध नहीं ली तो ग्रामीणों ने चंदा इकट्ठा करके जैसे-तैसे दो लाख से अधिक की लागत से एक डायवर्ज मार्ग का निर्माण किया था लेकिन वो भी इस बार मृत बागमती नदी के जलस्तर में हुई वृद्धि के बाद बह गया. जिसके बाद इन गांवों का संपर्क मुख्यालय से कट गया.

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समस्तीपुर. भारी बारिश (Heavy Rain) और बाढ़ (Flood) जैसे हालातों के बीच आज जनपद के खानपुर प्रखंड में मृत बागमती नदी (mrut Baghmati River) में आए उफान से तकरीबन दस गांवों को जोड़ने वाला एक मात्र डायवर्जन पुल भी गया जिसके चलते इन गांवों का मुख्यालय से संपर्क कट गया. मुख्य पुल पिछले साल ही ध्वस्त हो चुका था और ये डायवर्जन पुल ग्रामीणों ने खुद चंदा कर बनवाया था जो अपने-आप में विकास में पिछड़ेपन की कहानी बयां कर रहा है आज वो भी बह गया.

हर बार जान जोखिम में डाल कर होता है आवागमन
ग्रामीण बताते हैं कि विशनपुर आभी पंचायत के हरीपुर घाट में मृत बागमती नदी के जलस्तर में हुए वृद्धि के कारण पिछले साल ही इस पर बना पुल ध्वस्त हो गया था. ये पुल समस्तीपुर के पूर्व सांसद स्व. रामचंद्र पासवान ने संसदीय कोष से 25 लाख की लागत से सन 2002 में बनवाया था. इस पुल के ध्वस्त होने के बाद जब शासन-प्रशासन ने कोई सुध नहीं ली तो ग्रामीणों ने चंदा इकट्ठा करके जैसे-तैसे दो लाख से अधिक की लागत से एक डायवर्ज मार्ग का निर्माण किया गया था. लेकिन वो भी इस बार मृत बागमती नदी के जलस्तर में हुई वृद्धि के बाद ध्वस्त हो गया. जिसके बाद इन गांवों का संपर्क मुख्यालय से कट गया.

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ग्रामीणों के मुताबिक़ उन्होंने कई बार इसको लेकर आलाधिकारी से लेकर नेता तक सभी को चिट्ठी लिखी लेकिन किसी ने उनकी सुधि नहीं ली. स्थानीय जनप्रतिनिधि से लेकर सांसद, विधायक सभी से गुहार लगाई गई है. पुल ध्वस्त हुए साल भर बीत गया और अब डायवर्जन मार्ग भी बह गया. अब लोगों को आवाजाही के लिए एक मात्र साधन नाव पर निर्भर रहना पड़ रहा है जिसके लिए उन्हें हर बार जान जोखिम में डालने के साथ-साथ 10 रुपये कीमत भी चुकानी पड़ती है. और ये व्यवस्था भी निजी स्तर पर ही है.
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