दिनकर जयंती: मुनिया माई अड़ गईं तो रामधारी सिंह की दूसरी लड़की से शादी करवाई गई! पढ़ें दिलचस्प कहानी

रामधारी सिंह दिनकर की 23 सितंबर को जयंती मनाई जाती है.
रामधारी सिंह दिनकर की 23 सितंबर को जयंती मनाई जाती है.

मुनिया माई ने अपनी बेटी मुन्नी की शादी रामधारी सिंह दिनकर (Ramdhari Singh Dinkar) से करने से इनकार कर दिया. तब सब हक्के-बक्के रह गए.

  • News18 Bihar
  • Last Updated: September 23, 2020, 3:57 PM IST
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समस्तीपुर. हिंदी साहित्य के इतिहास की जहां कहीं भी चर्चा होगी तो वह राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर (Rashtrakavi Ramdhari Singh Dinkar) की चर्चा के बिना हमेशा अधूरी रहेगी. रामधारी सिंह दिनकर के जीवन से जुड़ी कई कहानियां लोगों ने अब तक पढ़ी हैं, लेकिन उनसे जुड़ी कुछ रोचक वाकये हैं जिनसे अब तक आम लोगों के साथ ही  साहित्य जगत भी अनजान है. राष्ट्रकवि ये कहानी उनकी शादी से जुड़ी हुई है. ये दिलचस्प इसलिए है कि जिस लड़की से उनकी शादी होनी थी, वहां बारत पहुंचने के बाद भी उनकी शादी नहीं हो पाई थी. तब जाकर उनकी शादी दूसरी लड़की करवाई गई.

राष्ट्रकवि दिनकर बेगूसराय जिले के सिमरिया के रहने वाले थे. उनकी शादी 24 वर्ष की आयु में वर्ष 1932 में समस्तीपुर जिले के विभूतिपुर प्रखंड अंतर्गत राघोपुर टभका गांव में हुई. विभूतिपुर के राघोपुर गांव का गांव के रहने वाले सामाजिक कार्यकर्ता विनय कुमार बताते हैं, जिस दिन राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की शादी होने वाली थी उस दिन गांव में दो लड़की की शादी थी.

दोनों बारात बेगूसराय जिले से ही आने वाली थी. सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा था. गांव में लगभग दोनों बारात पहुंच चुकी थी. उसी में जिस लड़की से रामधारी सिंह दिनकर का विवाह होने वाला था उसकी मां, जिसे गांव के लोग मुनिया माई कह कर पुकारते थे, उन्होंने अपनी बेटी मुन्नी की शादी रामधारी सिंह दिनकर से करने से इंकार कर दिया.



सब हक्के-बक्के रह गए. कारण का पता लगाया तो सामने आया कि वह गरीबी और दियारा इलाके के होने को दंश मानती थीं. इसके साथ ही मुनिया माई को यह भी भान था कि रामधारी सिंह दिनकर के पिता का निधन उनके बचपन में ही हो गया था. ऐसी परिस्थिति में वह अपने बेटी का हाथ रामधारी सिंह दिनकर के हाथ में नहीं देना चाहती थी.
बारात पहुंच चुकी थी और मुनिया माई की हठ के सामने किसी की कुछ नहीं चली. जिसके बाद ग्रामीणों और बेगूसराय जिले से आए दोनों बारात पक्ष के लोगों के बीच सहमति बनी. इसके बाद बेगूसराय जिले से आए दूसरे दूल्हे के साथ मुनिया माई की बेटी की शादी हुई.  जिस जगह पर उस लड़के की शादी होने वाली थी वहां रामरक्षा ठाकुर की बेटी श्यामवती देवी के साथ रामधारी सिंह दिनकर का विवाह संपन्न हुआ.

रामधारी सिंह दिनकर जब रजिस्ट्रार के पद पर कार्यरत थे तो उनका कर्म क्षेत्र समस्तीपुर का दलसिंहसराय हुआ करता था. मुनिया माई की बेटी के साथ उनकी शादी नहीं होने की बात आज भी इलाके में एक कहानी शक्ल में मौजूद है.

लोग कहते हैं कि शायद मुनिया माई की बेटी का नाम रामधारी सिंह दिनकर के साथ नहीं जोड़ना था इसीलिए इसे ईश्वर की लीला ही कही जा सकती है कि उसी तारीख को, उसी दिन रामरक्षा ठाकुर की बेटी के साथ में की शादी होती है. इसके बाद रामधारी सिंह दिनकर जिस क्षेत्र में गए, नाम करते गए और साहित्य जगत के आसमान के चमकते सितारों में शामिल हुए. जिनकी चमक कभी धूमिल नहीं हो सकती.
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