भारत-चीन विवाद: बेटे की शहादत पर परिवार को फक्र, मगर कौन कराएगा बीमार पिता का इलाज
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भारत-चीन विवाद: बेटे की शहादत पर परिवार को फक्र, मगर कौन कराएगा बीमार पिता का इलाज
शहीद अमन कुमार सिंह

India-China Clash: घर के सदस्यों का रो-रो कर बुरा हाल है. लेकिन पिता अमन की शहादत पर फक्र महसूस कर रहे हैं और कहते हैं कि यह अवसर सभी को नहीं मिलता है.

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समस्तीपुर. भारत और चीन की सेना के बीच झड़प (India-China Clash) में समस्तीपुर के सपूत अमन सिंह भी शहीद (Martyr) हो गये. परिवार को उनकी शहादत पर गम नहीं फक्र है. लेकिन एक सवाल सबकी जुबां पर है कि अब बीमार पिता का इलाज कौन कराएगा. पांच दिन पहले ही शहीद जवान की पिता से बातचीत हुई थी, जिसमें उन्होंने पिता का हालचाल पूछने के बाद उन्हें अपने बारे में सबकुछ ठीक बताया था. लेकिन शायद नियति को कुछ और ही मंजूर था. घर के लोग अमन के कॉल का इंतजार कर रहे थे कि एक कॉल उनके कर्मक्षेत्र से सेना के अधिकारी का आया, जिसमें अमन के सबकुछ ठीक होने की नहीं बल्कि शहादत की सूचना थी. यह सुनकर परिवार में कोहराम मच गया.

मोहिउद्दीन नगर के सुल्तानपुर इलाके के रहने वाले अमन कुमार सिंह के पिता सुधीर कुमार सिंह बताते हैं कि अभी तो फरवरी माह में ही वह अपनी ड्यूटी ज्वाइन करने के लिए गया था. जाते-जाते कहा था कि पापा अगली बार आएंगे तो आपको डॉक्टर के पास ले जाएंगे, लेकिन अब पिता को कौन डॉक्टर के पास ले जाएगा.

पत्नी पूछ रहीं- अब कब आएंगे अमन 



घर के सदस्यों का रो-रो कर बुरा हाल है. लेकिन पिता अमन की शहादत पर फक्र महसूस कर रहे हैं और कहते हैं यह अवसर सभी को नहीं मिलता है. 27 फरवरी 2019 को वीर शहीद अमन कुमार सिंह की शादी पटना जिले के बाढ़ के राणा विघा गांव के अक्षय सिंह की पुत्री मीनु देवी से हुई थी. शहादत की खबर सुनकर पत्नी का रो-रो कर बुरा हाल है. जब से खबर सुनी है, वह रह-रह कर बेहोश हो जा रही है. होश में आने पर हर किसी से वह यही पूछती है कि अब अमन कब वापस आएंगे.
शहीद अमन की बहन कहती हैं कि भैया बोलकर गये थे कि दो महीने बाद वापस आऊंगा, लेकिन अब वह कैसे आएंगे. यह कहते-कहते वह भी रोने लगती है. सहादत की सूचना मिलने के बाद क्षेत्र के जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक पदाधिकारी गांव पर पहुंचकर शोक में डूबे परिजनों को सांत्वना दे रहे हैं.

बेटे को अंतिम सलामी देने को बेकरार हैं गांववाले 

जानकारी के मुताबिक शहीद सपूत का पार्थिव शरीर गुरुवार शाम या शुक्रवार को पटना पहुंचेगा. वहां से पैतृक गांव लाया जाएगा. अब अमन तो नहीं लौटेंगे, लेकिन उनके पार्थिक शरीर के आने का इंतजार गांववाले कर रहे हैं. इसलिए कि अंतिमबार ये लोग अपने वीर सपूत को सलामी देना चाहते हैं.

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