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मोरवा का खुदनेश्वर धाम: इस मंदिर में की जाती है शिवलिंग और मजार की एक साथ पूजा

मोरवा का खुदनेश्वर धाम: इस मंदिर में की जाती है शिवलिंग और मजार की एक साथ पूजा

खुदनेश्वर धाम (न्यूज18 फोटो)

खुदनेश्वर धाम (न्यूज18 फोटो)

मोरवा स्थित खुदनेश्वर धाम समस्तीपुर जिला मुख्यालय से करीब 17 किमी दक्षिण-पश्चिम में स्थित है.

    सावन के महीने में हर तरफ बोलबम के जयकारे हैं. बाबा भोलेनाथ की भक्ति भक्तों के सर चढ़कर बोल रही है. तो आइए आज हम आपको भोले नाथ के एक ऐसे मंदिर के बारे बताते हैं जो केवल आस्था का प्रतीक ही नहीं बल्कि सांप्रदायिक सौहार्द की एक मिसाल है. जी हां, गंगा जमुनी तहजीब वाली ये जगह है बिहार में समस्तीपुर के मोरवा का खुदनेश्वर धाम. जहां आने वाले भक्तों की श्रद्धा देखने लायक है. इस मंदिर में एक ही छत के नीचे मुस्लिम महिला खुदनी बीबी की मजार और शिवलिंग स्थापित है.

    मोरवा स्थित खुदनेश्वर धाम समस्तीपुर जिला मुख्यालय से करीब 17 किमी दक्षिण-पश्चिम में स्थित है. बताया जाता है कि हिन्दू-मुस्लिम एकता का बेमिसाल उदाहरण खुदनेश्वर धाम की स्थापना 13वीं शताब्दी में हुआ. जाता है कि कालांतर में यहां निर्जन वन थे और इस जगह अन्य लोगों के साथ खुदनी बीबी नाम की एक मुस्लिम महिला भी गाय चराने के लिए आया करती थी. एक खास जगह उसकी गाय अपने आप दूध देने लगती. यह बात खुदनी ने देख लिया था तो बाबा भोले प्रकट होकर उसे इस रहस्य को नहीं बताने की शर्त रखते हुए कहा था कि जिस दिन यह बात वह जाहिर कर देगी उसकी मृत्यु हो जाएगी. शाम को जब वह गाय लेकर घर जाती तो उसे घरवालों की डांट सुननी पड़ती.

    खुदनी बीबी पर आरोप लगता था कि इसी ने दूध निकाल कर किसी को दे दिया होगा. बार-बार अपने ऊपर आरोप लगते देख एक दिन खुदनी ने इस रहस्य को घर के लोगों को बता दिया जिसके बाद उसकी मृत्यु हो गई. खुदनी बीबी की मौत के बाद घर के लोगों ने उसी जगह पर खुदनी को दफना दिया और मजार बना दिया. कुछ दिनों बाद मजार के ठीक बगल में शिवलिंग प्रकट हुआ तो दोनों संप्रदाय के लोगों ने साथ मिलकर यहां पर मंदिर की स्थापना की और इसका नाम खुद्नेश्वर स्थान मंदिर पड़ा. तब से यहां पूजा-अर्चना चलती आ रही है.

    कहा जाता है कि जो भी कोई अपनी मनोकामना लेकर यहां जलाभिषेक करते हैं, उनकी कामना बाबा भोले अवश्य पूरा करते हैं. सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल खुदनेश्वर स्थान आकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के द्वारा इसे पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने की घोषणा भी की गई लेकिन उस घोषणा को अब तक इसे मूर्त रूप नहीं दिया गया. जरूरत है अपने आप में अनोखी इस मंदिर में हर तरह से विकास के लिए सरकार के द्वारा सार्थक कदम उठाने की, जिससे देश-विदेश के लोग यहां आकर इस आलौकिक छटा का दर्शन कर सकें. (समस्तीपुर से मुकेश कुमार की रिपोर्ट)

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    Tags: Samastipur news

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