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Loksabha Election 2019: समस्तीपुर के सियासी संग्राम में NDA-महागठबंधन के बीच सीधा संघर्ष!

Loksabha Election 2019: समस्तीपुर के सियासी संग्राम में NDA-महागठबंधन के बीच सीधा संघर्ष!

समस्तीपुर का विद्यापति धाम और थानेश्वर मंदिर

समस्तीपुर का विद्यापति धाम और थानेश्वर मंदिर

समस्तीपुर के सीने पर पर एक गहरा घाव भी है जो आज तक नहीं भरा है. 3 जनवरी 1975 को समस्तीपुर में तत्कालीन रेल मंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता ललित नारायण मिश्रा की हत्या कर दी गई थी.

    जननायक कर्पूरी ठाकुर की जन्मभूमि और कर्मभूमि समस्तीपुर लोकसभा क्षेत्र अपनी समृद्ध सियासी विरासत के लिए जाना जाता है. आजादी से अब तक कई बड़ी हस्तियों ने इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया. 1977 में कांग्रेस विरोधी लहर में लोकदल से कर्पूरी ठाकुर सांसद बने थे. इससे पहले 1952 में 'प्रिंस ऑफ पार्लियामेंट' के उपनाम से मशहूर शख्सियत सत्यनारायण सिन्हा ने भी समस्तीपुर का प्रतिनिधित्व किया था. वे जवाहर लाल नेहरू मंत्रिमंडल में संसदीय कार्यमंत्री थे.

    इनके अलावा यमुना प्रसाद मंडल, अजीत कुमार मेहता, रामदेव राय, मंजय लाल, महेश्वर हजारी और आलोक मेहता ने इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया है. समस्तीपुर के कर्पूरी ठाकुर एक बार डिप्टी सीएम, दो बार बिहार के CM और दशकों तक विधायक और विरोधी दल के नेता रहे.

    हालांकि समस्तीपुर के सीने पर पर एक गहरा घाव भी है जो आज तक नहीं भरा है. 3 जनवरी 1975 को समस्तीपुर में तत्कालीन रेल मंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता ललित नारायण मिश्रा की हत्या कर दी गई थी.

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    समृद्ध ऐतिहासिक विरासत
    प्राचीनकाल में समस्तीपुर का नाम सोमवती था. जो बाद में सोम वस्तीपुर. समवस्तीपुर और फिर समस्तीपुर हो गया. समस्तीपुर का इतिहास काफी गौरवशाली रहा है. समस्तीपुर राजा जनक के मिथिला प्रदेश का अंग था. विदेह राज्य के अंत के बाद समस्तीपुर वैशाली गणराज्य का हिस्सा बना.

    इसके बाद मौर्य, शुंग, कण्व और गुप्त शासकों ने यहां राज किया. 13वीं शताब्दी में यहां हाजी शम्सुद्दीन ने राज किया. मना जाता है कि हाजी शम्सुद्दीन के नाम पर समस्तीपुर का नाम रखा गया.

    समस्तीपुर का मणिपुर मंदिर


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    1972 में समस्तीपुर जिला बना
    अंग्रेजों ने 1865 में तिरहुत प्रमंडल के अधीन समस्तीपुर को अनुमंडल बनाया. अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ लड़ाई में यहां क्रांतिकारियों ने अपनी बड़ी भूमिका निभाई. 14 नवंबर 1972 को समस्तीपुर को अलग जिला का दर्जा मिला.

    2014 के लोकसभा चुनाव में समस्तीपुर से LJP के रामचन्द्र पासवान जीते थे. उन्हें 2,70,391 वोट मिले थे. उनके मुकाबले दूसरे स्थान पर रहे कांग्रेस के डॉ. अशोक कुमार को 2,63,529 और तीसरे स्थान पर रहे. JDU के महेश्वर हजारी को 2,00,120 वोट मिले थे.

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    सांसद का रिपोर्ट कार्ड
    कड़े मुकाबले में जीते रामचन्द्र पासवान से क्षेत्र की जनता को काफी उम्मीदें थीं, लेकिन क्षेत्र का हाल देखकर ये कहा जा सकता है कि सांसद जनता की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरे. लोकसभा में रामचन्द्र पासवान की उपस्थिति 80 फीसदी रही.

    सांसद ने मात्र 2 डिबेट में भाग लिया. पूरे 5 साल में मात्र 3 सवाल पूछे. वो भी साल 2015 में. इसके अलावा किसी साल कोई सवाल नहीं पूछा. कोई प्राइवेट बिल नहीं लाया. सांसद का ये रिपोर्ट कार्ड बताने के लिए काफी है कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान समस्तीपुर को लेकर कितनी गंभीरता दिखाई है.

    समस्तीपुर के सांसद रामचंद्र पासवान


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    JDU की दमदार उपस्थिति
    समस्तीपुर लोकसभा क्षेत्र अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवार के लिए आरक्षित है. इस संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत कुशेश्वर स्थान, हायाघाट, कल्याणपुर, वारिसनगर, समस्तीपुर और रोसड़ा विधानसभा क्षेत्र आते हैं. 2015 में 6 में 4 विधानसभा क्षेत्र में JDU को जीत मिली थी. 1-1 सीट कांग्रेस-RJD के हिस्से गई थी.

    समृद्ध औद्योगिक विरासत
    अंग्रेजों के जमाने में समस्तीपुर उद्योग और व्यापार का केन्द्र हुआ करता था. 1917 में ही यहां गन्ना मिल की स्थापना हो गई थी.1921 में उत्पादन शुरू हुआ. कहा जाता है कि इस मिल में सुविधाएं और तकनीक उस समय वर्ल्ड क्लास की थीं.

    समस्तीपुर का बंद पड़ा चीनी मिल


    एक जमाने में समस्तीपुर में जूट, कागज, सिगरेट और चीनी की मिलें थीं. कुल 7 बड़े उद्योग यहां स्थापित थे.लोगों के पास रोजगार के साधन थे. किसी को रोजगार के लिए पलायन करने की जरूरत नहीं थी. जिले में सिर्फ एक प्राइवेट चीनी मिल चल रही है.

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    आजादी के बाद इस क्षेत्र का उतना विकास नहीं हुआ जितना होना चाहिए था. समस्तीपुर में डीइंडस्ट्रियलाइजेशन इसलिए हुआ क्योंकि कर्पूरी ठाकुर के बाद यहां कोई ऐसा जनप्रतिनिधि नहीं हुआ जो मजबूती से संसद में क्षेत्र की आवाज उठा सके.

    ये हैं समस्तीपुर के मुख्य मुद्दे
    इस बार समस्तीपुर में मुख्य सियासी मुद्दा क्षेत्र में तकनीकी की स्थापना है. क्योंकि यहां पूसा स्थित राजेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय को छोड़ कोई तकनीकी कॉलेज नहीं है. बंद चीनी मिल और दूसरे उद्योग को खोलने की मांग जनता कर रही है.

    कमिश्नरी मुख्यालय दरभंगा को जोडनेवाली रेल लाइन का दोहरीकरण का काम अब तक पूरा नहीं हो सका है.गंगा के कटाव से प्रभावित गांवों की किसी ने सुध नहीं ली.

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    आधा जिला बाढ़ से प्रभावित है. कल्याणपुर, पूसा, वारिसनगर, हसनपुर, बिथान, सिंघिया, पटोरी, मोहद्दीनगर, विद्यापति नगर और मोहनपुर में बाढ़ का असर रहता है.कटाव के कारण दर्जनों गांव अपना अस्तित्व खो चुके हैं. कटाव और बाढ़ प्रभाविक इलाकों का विकास इस बार मुख्य चुनावी मुद्दा रहने वाला है.

    जातीय समीकरण पर दारोमदार
    समस्तीपुर सुरक्षित संसदीय सीट पर जीत के लिए जातीय ध्रुवीकरण से अधिक जरूरी जातीय समीकरण में सेंधमारी है़. दो विधानसभा क्षेत्र कल्याणपुर और रोसड़ा सुरक्षित है़.

    समस्तीपुर क्षेत्र में सबसे अधिक तीन लाख 90 हजार से अधिक कुशवाहा वोटर हैं. दूसरे नंबर पर ढाई लाख से ज्यादा पासवान वोटर हैं, उसके बाद तीसरे नंबर यादव वोटर हैं. इनकी संख्या भी सवा दो लाख के आसपास है़. इसके अलावा सवर्ण, मुस्लिम और पचपनिया वोटर भी हैं.

    बदल गए सियासी समीकरण
    998 में आरजेडी, 1999 में जेडीयू, 2004 में आरजेडी, 2009 में जेडीयू को इस सीट पर सफलता मिली थी. 2014 में मोदी लहर में LJP के रामचन्द्र पासवान चुनाव जीते. मौजूदा सांसद को लेकर शिकायतों के बावजूद केन्द्र और राज्य सरकार के काम को लेकर पॉजिटिव रिस्पॉन्स भी है. हालांकि अब जब नेताजी वोट मांगने क्षेत्र में जाएंगे तो उन्हें कई मुद्दों पर जनता के सवालों को सुनना होगा और जवाब भी देना होगा.

    रिपोर्ट- मुकेश कुमार के साथ बृजम पांडे

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    Tags: Bihar Lok Sabha Constituencies Profile, Bihar News, Lok Sabha 2019 Election, Lok Sabha Election 2019, Politics, Samastipur news

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