लोकसभा चुनाव 2019: क्या उजियारपुर से दोबारा जीत पाएंगे नित्यानंद राय?

2014 के चुनाव में बीजेपी के नित्यानंद राय ने आरजेडी के प्रत्याशी आलोक कुमार मेहता को लगभग 60 हजार मतों से हराया था. राय को 3,17,352 वोट और मेहता को 2,56,883 वोट मिले थे. तीसरे स्थान पर जेडीयू की अश्वमेध देवी रही थीं.

News18 Bihar
Updated: March 16, 2019, 9:57 AM IST
लोकसभा चुनाव 2019: क्या उजियारपुर से दोबारा जीत पाएंगे नित्यानंद राय?
नित्यानंद राय (फाइल फोटो)
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Updated: March 16, 2019, 9:57 AM IST
उजियारपुर लोकसभा सीट पर NDA और महागठबंधन दोनों की नजर है. 2014 में नित्यानंद राय पहली बार लोकसभा के लिए चुने गए थे. BJP में उनके कद का अंदाज इसी से लगाया जा सकता है कि पहली बार लोकसभा पहुंचने के बाद ही पार्टी ने उन्हें बिहार की कमान सौंप दी. 2014 के चुनाव में बीजेपी के नित्यानंद राय ने आरजेडी के प्रत्याशी आलोक कुमार मेहता को लगभग 60 हजार मतों से हराया था. राय को 3,17,352 वोट और मेहता को 2,56,883 वोट मिले थे. तीसरे स्थान पर जेडीयू की अश्वमेध देवी रही थीं जिन्हें 13.93 प्रतिशत मत शेयर के साथ लगभग सवा लाख वोट मिले थे. दिलचस्प यह कि छठे स्थान पर नोटा रहा जिसमें 6171 वोट गिरे थे. नोटा का मत प्रतिशत 0.72 था. सांसद का रिपोर्ट कार्ड

नित्यानंद का लोकसभा में प्रदर्शन दिसंबर 2018 की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 5 सालों में उपस्थिति 70 प्रतिशत रही है तो वहीं इस दौरान उन्होंने सदन की 7 डिबेट में हिस्सा लिया और 141 प्रश्न पूछे हैं. नित्यानंद संसद में कृषि मामलों की स्टैंडिंग कमिटी के सदस्य भी हैं.

उजियारपुर में 6 विधानसभा क्षेत्र उजियारपुर संसदीय क्षेत्र में 6 विधानसभा सीटें हैं. इनके नाम हैं-पातेपुर, उजियारपुर, मोरवा, सरायरंजन, मोहिउद्दीन नगर और विभूतिपुर. इनमें पातेपुर सीट एसी आरक्षित है. पातेपुर वैशाली जिले में पड़ता है. उजियारपुर, मोरवा, सरायरंजन, मोहिउद्दीन नगर और विभूतिपुर विधानसभा क्षेत्र समस्तीपुर जिले में पड़ते हैं.
राजकीयकृत मध्य विद्यालय उजियारपुर

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ये है सियासी समीकरण साल 2009 के चुनाव में यहां पर पहली बार JDU से अश्वमेघ देवी सांसद बनीं. लेकिन साल 2014 के चुनाव में यहां BJP ने बाजी मार ली और नित्यानंद राय यहां के सरताज बने. नित्यानंद इससे पहले हाजीपुर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते रहे हैं. साल 2000 से 2010 के बीच वो लगातार चार बार विधायक चुने गए. 2014 में उन्हें लोकसभा का टिकट मिला और उसमें 60,469 मतों से विजयी रहे. सांसद पर सवाल उजियारपुर सांसद सह BJP प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय की ओर से अपने संसदीय क्षेत्र में विकास का दावा किया जा रहा है. लेकिन कई ऐसे काम हैं जो वो पूरे नहीं कर पाए हैं.  दलसिंहसराय में फुट ओवरब्रिज का काम शुरू नहीं हुआ. ज्यादातर जगहों पर वाटर ATM नज़र नहीं आता. दलसिंहसराय में फ्लाईओवर का निर्माण शुरू नहीं हुआ. महनार-बछवाड़ा सड़क का निर्माण शुरू नहीं हुआ. दलसिंहसराय-विशुनपुर सड़क चौड़ीकरण का काम शुरू नहीं हो पाया. गोद लिए पगड़ा गांव का विकास नहीं हुआ.
उजियारपुर रेलवे स्टेशन
हालांकि सरायरंजन विधानसभा क्षेत्र के नरघोघी के लोग सांसद के काम की सराहना कर रहे हैं. इस गांव को मेडिकल कॉलेज के साथ-साथ ITI की सौगात मिली है. राज्य सरकार इस गांव में 591 करोड़ की लागत से मेडिकल कॉलेज बनाएगी. इस गांव के लोगों का कहना है कि राज्य में डबल इंजन की सरकार में विकास के रिकॉर्ड बन रहे हैं. सांसद का दावा सांसद का दावा है कि उन्होंने अपने पहले कार्यकाल में क्षेत्र के विकास के लिए कई काम किए. इनमें सालों से लंबित वरुणा पुल का निर्माण. हाजीपुर-बछवाड़ा रेललाइन दोहरीकरण. सरायरंजन के नारघोघि में मेडिकल कॉलेज की स्वीकृति. संसदीय क्षेत्र में ITI. नरहन स्टेशन पर जानकी एक्सप्रेस का ठहराव. सांसद निधि से सड़क और स्ट्रीट लाइट. 30 लाख की लागत से विवाह भवन का निर्माण के अलावा सांसद शनिवार और रविवार को स्थानीय लोगों से मिलते हैं और उनकी समस्याएं सुनते हैं. उजियारपुर का जातिगत समीकरण राजनीति में सफलता के कई फैक्टर होते हैं. इन्हीं में से एक है जातीय समीकरण. उजियारपुर लोकसभा क्षेत्र में यादव और कुशवाहा जाति के 4.60 लाख वोटर हैं. 3 लाख से ज्यादा यादव जाति के वोटर हैं. कुशवाहा और यादव वोटर हार-जीत तय करते हैं. 2014 में नित्यानंद राय ने स्वजातीय यादव जाति के वोट को अपने पक्ष में मोड़ा और ब्राह्मणों के वोट को समेटकर जीत हासिल की. उजियारपुर में ब्राह्मण और मुस्लिम का वोट लगभग बराबर है. बहरहाल दावों-प्रतिदावों के बीच 2019 के लोकसभा चुनाव में उजियारपुर में NDA और महागठबंधन के बीच मुकाबले के आसार हैं. यहां सियासी दलों के नेता अपने प्रचार अभियान में जुट गए हैं.वहीं जनता नेताओं की बातों को ध्यान से सुन रही है. रिपोर्ट- रजनीश कुमार/मुकेश कुमार
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