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Shardiya Navratri 2022: समस्तीपुर के 'माता सती' मंदिर का चमत्कारी रहस्य, जानिए डकैतों से जुड़ी कहानी

Samastipur News: स्थानीय लोग बताते हैं कि माता सती ने यहां के लोगों को सती होते समय अपने वंश को इसी परिसर में दाह संस्क ...अधिक पढ़ें

रिपोर्ट- रितेश कुमार

समस्तीपुर: सनातन धर्म में देवी-देवताओं को पूजने कि परंपरा सदियों से चली आ रही है. लोग अलग-अलग तरीके से अपने आराध्य को पूजते हैं. बिहार के समस्तीपुर जिला अंतर्गत ध्रुवगामा गांव में भी पूजा करने की अलग परंपरा 800 वर्षों से सजीव है. इस गांव के लोग माता सती की मूर्तियों के बजाय उनकी समाधी की पूजा-अर्चना करते हैं. माता सती की प्रसिद्धि समस्तीपुर सहित देश-विदेश में फैली हुई है. यहां श्रद्धालु दर्शन और पूजन के लिए पहुंचते हैं. यह पवित्र स्थल जिला मुख्यालय से महज 20 किलोमीटर की दूरी पर ध्रुवगामा गांव में स्थित है.

क्या है सती माता का इतिहास
सन 1430 में अगहन शुक्ल सप्तमी मंगलवार को ध्रुवगामा गांव में गति राम सिंह की मृत्यु हो गई थी. उनकी पत्नी चंद्रवती देवी लोगों के द्वारा मना करने के बाद भी श्रृंगार कर सभी को आशीर्वाद देते हुए अपने पति के साथ चिता पर बैठ गई और सती हो गई. बताया जाता है कि इनका एक पुत्र बौद्ध राम सिंह भी था जो गूंगा था. माता के सती होने के बाद ग्रामीणों को परेशानी होने लगी. तबमाता सती ने अपने पुत्र बौद्ध राम सिंह को वाक शक्ति प्रदान की. जिसके बाद वह बोलने लगा. लोगों का कहना है की चंद्रवती देवी के सती होने के बाद से इस गांव में कोई आपदा या विपत्ति नहीं आई है.

परिसर में ही होता है दाह संस्कार
स्थानीय लोग बताते हैं कि माता सती ने यहां के लोगों को सती होते समय अपने वंश को इसी परिसर में दाह संस्कार करने की बात कही थी. जिसके बाद उनके वंश के किसी भी व्यक्ति की मृत्यु होने पर उसी परिसर में दाह संस्कार भी किया जाता है. आगे चलकर श्रद्धालुओं ने उसी परिसर में हनुमान, माता दुर्गा, काली, पार्वती के साथ-साथ शिव का मंदिर निर्माण कराया. लोगों की माने तो माता सती की महिमा अपरंपार है. जिसको लेकर लोग दूर-दराज से यहां पूजा-अर्चना करने आते हैं. माता सती की प्रसिद्धि सिर्फ समस्तीपुर तक हीं नहीं फैली हुई है बल्कि दरभंगा, मुजफ्फरपुर, पटना, मुंबई, दिल्ली, नेपाल सहित देश-विदेश से श्रद्धालु दर्शन और पूजन के लिए पहुंचते हैं

इस गांव को मिला ‘माता सती’ का वरदान
यहां के लोग बताते हैं कि इस गांव को माता सती का वरदान भी प्राप्त है. गांव में जितनी लड़कियां व्याह कर आएगी उसको परिवार में हमेशा खुशी मिलेगी. वर्षों पहले गांव में डकैत डकैती करने आया था. डकैत गांव में माता सती मंदिर के समीप से होते हुए वापस लौट रहा था. तभी सभी डकैत अंधे हो गए. सुबह होते ही गांव वालों को इसकी जानकारी मिली. इसके बाद से आज तक इस गांव में डकैती जैसी घटनाएं नहीं है. माता सती के सती होने के बाद से इस गांव में किसी भी तरह की विपदा नहीं आई है. नवरात्र और सावन की सोमवारी सहित अन्य अवसर पर यहांं भव्य मेले का भी आयोजन किया जाता है.

इस मंदिर में जो भी श्रद्धालु अपने मुराद लेकर आते हैं, माता सती उनकी मनोकामना सदैव पूर्ण करती है.

Tags: Bihar News, Durga Puja festival, Hindu Temple, Navratri festival, Samastipur news

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