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ललित नारायण मिश्र हत्याकांडः मिथिलांचल के सबसे बड़े जननेता का कातिल कौन?

ललित नारायण मिश्र हत्याकांडः मिथिलांचल के सबसे बड़े जननेता का कातिल कौन?

समस्तीपुर रेलवे स्टेशन पर बम धमाके में पूर्व रेलमंत्री ललित नारायण मिश्र की हुई थी मौत.

समस्तीपुर रेलवे स्टेशन पर बम धमाके में पूर्व रेलमंत्री ललित नारायण मिश्र की हुई थी मौत.

बिहार के समस्तीपुर में देश के पूर्व रेलमंत्री ललित नारायण मिश्रा की बम धमाके में हुई थी मौत. उनके पोते वैभव मिश्र की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने सीबीआई को नए सिरे से मामले की जांच करने का आदेश दिया है.

पूर्व केंद्रीय मंत्री, कांग्रेस के दिग्गज नेता और मिथिलांचल के लाल ललित नारायण मिश्र हत्याकांड की एक बार फिर से नए सिरे से जांच होगी. ललित बाबू के पोते वैभव मिश्रा की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने CBI को नए सिरे से जांच के आदेश दिए हैं. दरअसल ललित बाबू के परिवार वालों ने ललित नारायण मिश्र हत्याकांड की दोबारा जांच के लिए CBI को रिप्रेजेंटेशन दिया था. परिवार वालों का आरोप था कि ललित नारायण मिश्र हत्याकांड मामले में मुख्य आरोपी और उससे जुड़े हुए कुछ लोगों को बचाया जा रहा है. उम्मीद है कि, इस जांच में मौत के रहस्यों पर से पर्दा उठ सके.

ललित नारायण मिश्र का जन्म 2 फरवरी 1923 को सहरसा जिले के बसनपट्टी गांव में हुआ था. वो मिथिला समेत देश के कद्दावर कांग्रेस नेता थे. ललित नारायण मिश्र की हत्या 3 जनवरी 1975 को समस्तीपुर में बम विस्फोट में मौत हो गई. समस्तीपुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर दो पर ये घटना घटी.

कैसे हुई बम विस्फोट की घटना?
इंदिरा गांधी सरकार के रेल मंत्री ललित नारायण मिश्र समस्तीपुर रेलवे स्टेशन पहुंचे थे. समस्तीपुर से मुजफ्फरपुर के बीच बड़ी लाइन का उद्घाटन करना था. ललित बाबू पहुंचे…, भाषण पूरा किया और मंच से नीचे जब उतरने लगे तो वहां मौजूद दर्शकों की भीड़ में से किसी शख्स ने मंच की ओर बम फेंक दिया. ललित नारायण मिश्र जख्मी हो गए.

बच सकती थी जान!
समस्तीपुर रेलवे स्टेशन से दरभंगा मेडिकल कॉलेज की दूरी 40 से 42 किलोमीटर है. उस दिन DMCH में डॉक्टरों की हड़ताल थी. ब्लास्ट में घायल हुए कई लोगों को इलाज के लिए दरभंगा के मशहूर डॉक्टर नवाब के पास भेज दिया गया. मगर ललित बाबू को पटना भेजने का फैसला हुआ, जो समझ से परे था. क्योंकि ललिल बाबू ऐसे शख्सियत थे जिन्हें अगर दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया जाता तो शायद हड़ताली डॉक्टर इलाज करने से मना नहीं करते. पटना भेजने के फैसले पर आज तक सवाल उठ रहे हैं.

समस्तीपुर से पटना जाने में लगे थे 14 घंटे
ललित बाबू को इलाज के लिए पटना ले जाने के लिए रेल को चुना गया. समस्तीपुर से पटना की दूरी करीब 132 किलोमीटर है, लेकिन ट्रेन को पटना पहुंचने में करीब 14 घंटे का वक्त लग गया. 1975 में बहुत ज्यादा तो पटना पहुंचने में सात घंटे का वक्त लगता, लेकिन लग गया 14 घंटे, ये भी एक अहम सवाल है, जिसका जवाब आज तक नहीं मिला है.

ललित बाबू के बढ़ते ग्राफ से किसको डर था?
सियासी गलियारों में कहा ये जाता है कि, मिथिला के सबसे बड़े जननेता ललित नारायण मिश्र की लोकप्रियता और बढ़ते कद से इंदिरा गांधी को सियासी खतरा का आभास था. इसीलिए कहा ये जाता है कि, जान बूझकर ट्रेन को लेट किया गया. हालांकि, इस बात का कोई प्रमाण नहीं है. इतना तो तय है कि, अगर आज ललित बाबू होते तो बिहार और मिथिलांचल की तस्वीर कुछ और होती.

Tags: CBI Probe, DELHI HIGH COURT

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