Bihar Assembly Election 2020: सभी समीकरणों को ध्वस्त कर बाहुबली विधायक के इर्दगिर्द ही घूमती है एकमा की राजनीति

विधायक धूमल सिंह 2014 में लोकसभा चुनाव में भी अपने हाथ आजमा चुके है, लेकिन वहां उनको मात खानी पड़ी थी.
विधायक धूमल सिंह 2014 में लोकसभा चुनाव में भी अपने हाथ आजमा चुके है, लेकिन वहां उनको मात खानी पड़ी थी.

Bihar Assembly Election 2020: सारण जिले की एकमा विधानसभा क्षेत्र (Ekma Assembly Seat) की राजनीति सीएम नितीश कुमार के चहेते जदयू विधायक धूमल सिंह (MLA Dhumal Singh) के ईदगिर्द ही घूमती है. वे यहां से चौथी बार विधायक हैं.

  • News18 Bihar
  • Last Updated: September 24, 2020, 9:22 PM IST
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सारण. किसी समय पीतल उद्योग क्षेत्र (Brass industry sector) के नाम से चर्चित रहने वाले एकमा विधानसभा सीट (Ekma Assembly Seat) की राजनीति सभी समीकरणों को ध्वस्त कर यहां के बाहुबली विधायक के इर्दगिर्द ही घूमती है. धनबल, बाहुबल और विकास के तानेबाने में फंसा एकमा पिछले चार बार से कई आपराधिक मामलों में आरोपी रहे धूमल सिंह (Dhumal Singh) को अपना विधायक चुनता आ रहा है. 2015 के चुनाव में भी धूमल सिंह ने जदयू के टिकट पर चुनाव लड़कर बीजेपी के कामेश्वर सिंह मुन्ना को लगभग 8 हजार वोट से हराया था.

अब एक बार फिर चुनावी बिसात बिछ चुकी है और धूमल सिंह को घेरने की तैयारी चल रही है. राजद समेत तमाम विपक्षी दल अपनी रणनीति तैयार कर रहे हैं. लेकिन इससे इतर विधायक धूमल सिंह का कहना है कि जनता उनको चाहती है इसलिए वे विधायक बनते हैं. इस बार राजद से श्रीकांत यादव और पूर्व में शिकस्त पा चुके बीजेपी के कामेश्वर सिंह मुन्ना उनसे फिर दो-दो हाथ करने को तैयार हैं.

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कौन है धूमल सिंह
सारण जिले के एकमा विधानसभा क्षेत्र से विधायक मनोरंजन सिंह उर्फ धूमल सिंह का लंबा चौड़ा अपराधिक इतिहास सुनने वालों के भीतर भले ही खौफ पैदा करता है, लेकिन इलाके के लोगों में वे काफी लोकप्रिय हैं. इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि धूमल सिंह चार बार यहां से विधायक रहे हैं. राजनीतिक महत्वकांक्षा के चलते धूमल सिंह 2014 में लोकसभा चुनाव में भी अपने हाथ आजमा चुके है, लेकिन वहां उनको मात खानी पड़ी थी. धूमल सिंह के बारे में बताया जाता है कि 1978 से लेकर उससे अगले कई बरसों तक वे पुलिस की मोस्ट वांटेड लिस्ट में शामिल रहे हैं.

नीतीश के करीबी विधायकों में शामिल हैं धूमल सिंह
उनके खिलाफ बिहार, यूपी, झारखंड, दिल्ली और मुंबई में लूट, हत्या व अपहरण के दर्जनों केस दर्ज हैं, लेकिन पिछले विधानसभा चुनाव में दायर अपने एफिडेविट में इन्होंने सिर्फ 6 गंभीर और 18 हल्के क्रिमिनल केस की ही जानकारी दी थी. गंभीर अपराधों में धूमल सिंह के खिलाफ 4 केस हत्या के हैं. इसके अलावा इनके खिलाफ हत्या के प्रयास का भी एक मामला दर्ज है. नीतीश के करीबी मनोरंजन उर्फ धूमल सिंह ने 2000 में राजनीति ज्वॉइन की थी. बाहुबली होने के बावजूद क्षेत्र की जनता के बीच लोकप्रियता ने इनको मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी विधायकों में शामिल करा दिया.

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2,97,269 वोटर हैं एकमा विधानसभा क्षेत्र में
एकमा विधानसभा में इस बार 2,97,269 वोटर हैं. इनमें से 1,57,766 पुरुष और 1,39,496 महिला मतदाता हैं. यहां 7 थर्ड जेंडर के मतदाता भी हैं. एकमा के वोटरों में सबसे अधिक यादव और दूसरे स्थान पर राजपूत और तीसरे स्थान पर भूमीहार हैं. धूमल सिंह भूमिहार वर्ग से आते हैं जो कहीं न कहीं इनको जातीय आधार पर बहुमत से दूर करता है, लेकिन नीतीश कुमार के चेहरे पर चुनाव लड़कर इनकी नैय्या तमाम समीकरणों को धवस्त करते हुए विजय दिलाती है.

विधानसभा क्षेत्र में ये मुद्दे प्रमुख हैं
एकमा को अनुमंडल का दर्जा देने की मांग पिछले कुछ चुनावों से यहां जोर पकड़ती जा रही है. इस बार भी यह मुद्दा उठेगा. इसके अतिरिक्त नगर पंचायत बनने के बाद इसका शहरीकरण नहीं हुआ. ग्रिड निर्माण के बाद भी बिजली की व्यवस्था यहां चरमराई हुई है. धूरदे चंवर में पिछले 15 बरसों से जलजमाव है और किसानों की हजारों एकड़ भूमि बेकार पड़ी हुई है. 25 प्रतिशत गांवों में अब तक बिजली नहीं पहुंची है. यहां का चर्चित पीतल उद्योग बंद होने के बाद किसी उद्योग-धंधे की स्थापना नहीं हुई. चीनी मिल का प्रस्ताव भी आया. भूमि का चयन भी किया गया, लेकिन उसका अधिग्रहण तक नहीं हो सका. नहर का किसानों को फायदा नहीं है और सरकारी ट्य़ूबवेल भी लगभग बंद पड़े हैं.
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