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Bihar: शेर के पेट में विराजमान हुईं मां दुर्गा, छपरा में बना अनोखा पंडाल

शेर के पेट में मां दुर्गा को स्थापित किया (news18)

शेर के पेट में मां दुर्गा को स्थापित किया (news18)

Shardiya Navratri 2022 : छपरा (Chapra) जिले में जलालपुर प्रखंड के फुटानी बाजार में सजा एक पंडाल इस समय खास चर्चा में है ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

नवयुवक समिति द्वारा विशाल शेर के स्वरूप का पंडाल स्थापित किया गया है
जलालपुर प्रखंड स्थित फुटानी मोड़ के पास भक्तों ने शेर के पेट में मां को स्थापित किया
हर वर्ष अलग-अलग आकृतियों में माता मंदिर का निर्माण पूजा समिति कराती है

छपरा: शारदीय नवरात्र (Shardiya Navratri 2022) में जगह-जगह दुर्गा पूजा के भव्य पंडाल सजे हैं. लेकिन छपरा जिले में जलालपुर प्रखंड के फुटानी बाजार में सजा एक पंडाल इस समय खास चर्चा में है. इसकी वजह है कि नवयुवक समिति द्वारा विशाल शेर के स्वरूप का पंडाल स्थापित किया गया है. वैसे तो दुर्गा मां शेर की सवारी करती है लेकिन छपरा के जलालपुर प्रखंड स्थित फुटानी मोड़ के पास भक्तों ने शेर के पेट में मां को स्थापित किया है. पुआल से बने शेर के पेट में मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की गई है. देखने में यह शेर असली प्रतीत होता है. इस अनोखे  पंडाल को देखने दूर-दूर से लोग यहां पहुंच रहे हैं.

जलालपुर प्रखंड के गम्हरिया कला गांव के फुटानी बाजार पर लाखों रुपए की लागत से शेर की आकृति का भव्य पंडाल बनाया गया है. जिसमें मां दुर्गा की नवदुर्गा रूप की भव्य प्रतिमा स्थापित की गई है. इसके लिए कोलकाता से कलाकारों को बुलाया गया है. इसको बनाने मे छह कलाकार व मजदूर दिन-रात मेहनत किए हैं.

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नवयुवक दुर्गा पूजा समिति गम्हरिया कला फुटानी बाजार के अध्यक्ष छोटेलाल कुमार सुमन ने बताया कि हर बार कुछ नया करने की सोच नवयुवक दुर्गा पूजा समिति की होती है. इस वर्ष भी इसी सोच को ध्यान में रखते हुए लाखों की लागत से शेर की आकृति नुमा भव्य और विशाल पंडाल का निमार्ण कराया गया है. उन्होंने बताया कि पंडाल की लंबाई 140 फीट, चैड़ाई 60 फीट तथा ऊंचाई 60 फीट रखी गई है.

पंडाल बनाने में ओम प्रकाश जी, पंकज जी, संत कुमार जी तथा भोला मांझी लगातार लगे हुए हैं. पूजा समिति के सहयोगियों में निप्पू कुमार, नीरज कुमार, गोविंदा कुमार, कृष्णा कुमार, अजीत कुमार, मिथुन कुमार, विकास कुमार, सनी कुमार, मिथुन कुमार, प्रदुम्न कुमार तथा सुधीर कुमार की महत्वपूर्ण भूमिका है.

सबसे पहले वर्ष डायनासोर की आकृति का निर्माण किया गया था. उसके बाद महिषासुर के मुख से माता का प्राकट्य हुआ था फिर कोरोना के टीके की आकृति में माता को स्थान दिया गया था. हर वर्ष अलग-अलग आकृतियों में माता मंदिर का निर्माण पूजा समिति कराती है. जिसे देखने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ती है.

Tags: Bihar News, Chapra news, Navratri festival

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