छपरा: सांकृत्यायन की कर्मभूमि और विश्व प्रसिद्ध सोनपुर मेला से होती है इस जगह की पहचान
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छपरा: सांकृत्यायन की कर्मभूमि और विश्व प्रसिद्ध सोनपुर मेला से होती है इस जगह की पहचान
बिहार के सोनपुर मेले की झलक

बिहार के सारण जिला का मुख्यालय छपरा शहर है जिसका बिहार की राजनीति में भी अपना महत्व है. लालू प्रसाद यादव और राजीव प्रताप रूड़ी जैसे नेता इस सीट का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं.

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  • Last Updated: August 28, 2020, 11:31 AM IST
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छपरा. आपने सोनपुर के विश्व प्रसिद्ध मेले का नाम तो जरूर सुना होगा, तो क्या आप जानते हैं कि यह मेला बिहार के किस जिले में लगता है. हम आपको बता रहे हैं सारण जिला के बारे में जहां विश्व प्रसिद्ध सोनपुर मेला लगता है. सारण की पहचान सिर्फ सोनपुर तक ही सीमित नहीं है बल्कि यहां ऐसे दर्जनों स्थल हैं जो इस जिले को एक अलग पहचान देते हैं. तो सबसे पहले हम इस जिले के इतिहास को समझते है।


इतिहास


आईना-ए-अकबारी में उपलब्ध जिले की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में सारण को छह राज्यों (राजस्व विभाग) में से एक के रूप में रिकॉर्ड किया गया है जो बिहार प्रांत का गठन कर रहा है. 1765 में ईस्ट इंडिया कंपनी के दिवानी के अनुदान के समय, आठ सारण और चंपारण सहित सरकारें इन दोनों को बाद में सारण नामक एक इकाई बनाने के लिए जोड़ा गया था. सारण को पटना डिवीजन में शामिल किया गया था. जब 1829 में आयुक्त के प्रभाग की स्थापना हुई थी. यह 1866 में चंपारण से अलग हो गया था जब इसे (चंपारण) एक अलग जिले में बना दिया गया था. सारण को तिरहुत प्रभाग का एक हिस्सा बनाया गया था उस समय से इस जिले में तीन उप-विभाजन थे, अर्थात सारण, सिवान और गोपालगंज. 1972 में पुराने सारण जिले के प्रत्येक उपखंड एक स्वतंत्र जिला बन गया. सिवान और गोपालगंज के अलग होने के बाद नया सारण जिला अभी भी छपरा में मुख्यालय है.


 विश्व प्रसिद्ध मेला, भारत का सबसे बड़ा प्लेटफार्म




कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित होने वाले बड़े मेले के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध सोनपुर अंचल का मुख्यालय भी है. सोनपुर एक नगर पंचायत है और अपने रेलवे प्लेटफार्म के लिए प्रसिद्ध है जो भारत में सबसे बड़ा है. जहां तक सोनपुर मेले का धार्मिक पहलू है, इसका अर्थ है हरिहरनाथ के मंदिर और गज-ग्रह की लड़ाई के स्थल और गंगा में कृष्ण पूर्णिमा गंगा स्नान या औपचारिक स्नान के दौरान हरि ने पूर्व में बचाव के लिए विशेष महत्व है. हिंदुओं द्वारा असामान्य रूप से प्रभावी होने के लिए आयोजित पूर्णिमा के दिन (कार्तिक पूर्णिमा) विशाल भीड़ इकट्ठा और स्नान करते हैं. उस दिन मेला शुरू होता है और एक पखवाड़े से अधिक के लिए रहता है. शिव मंदिर, काली मंदिर और अन्य मंदिरों और ऐतिहासिक धार्मिक स्मारक यहां पर स्थित हैं और मेला काल के दौरान सामाजिक और आर्थिक गतिविधियां सर्वोच्च शिखर पर हैं. लोग भगवान के यहाँ यज्ञ करने के लिए आते है और इस प्रकार इसका महत्व बिहार के सोनपुर के भीतर नहीं है बल्कि यह भारत और विश्व की प्रसिद्धि का है. अन्य स्थलों में ढोढ आश्रम, चिरांद भी हैं.



छपरा
सारण का जिला कार्यालय



राहुल सांकृत्यायन की कर्म भूमि


150 से अधिक सहित्यों के रचयिता राहुल सांकृत्यायन ने सारण के एकमा प्रखंड के परसागढ़ को ही अपनी कर्मभूमि बनाया था. परसागढ़ से अपनी जीवन यात्रा शुरू कर उन्होंने छपरा, सीवान एवं गोपालगंज के विभिन्न क्षेत्रों में किसानों एवं मजदूरों को ब्रिटिश सरकार के खिलाफ संगठित किया था.











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