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छपरा: 'Examinee is better than examiner' होने के बाद भी डॉ. राजेंद्र प्रसाद की धरोहरों का सही रखरखाव नहीं

डॉ राजेंद्र प्रसाद की 136वीं जयंती.
डॉ राजेंद्र प्रसाद की 136वीं जयंती.

कलकत्ता विश्वविद्यालय (Calcutta University) में वर्ष 1906 में पढ़ाई के दौरान एक परीक्षक ने डॉ राजेन्द्र प्रसाद को परीक्षक से बेहतर बताया था और कॉपी मूल्यांकन के दौरान Examinee is better than examiner लिख दिया था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 3, 2020, 12:37 PM IST
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छपरा. देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेन्द्र प्रसाद (Dr. Rajendra Prasad) की 136 वीं जयंती के अवसर पर सीएम नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) ने उन्हें श्रद्धांजलि दी. जिस कांग्रेस पार्टी से राजनीतिक रूप से वे ताल्लुक रखते थे और जिस दफ्तर में उन्होंने कई साल बिताए पटना के उस सदाकत आश्रम में भी उनकी जयंती मनाई गई. इस मौके पर नई पीढ़ी को राजेन्द्र बाबू से सीखने की नसीहत भी दी गई, लेकिन डॉ राजेंद्र प्रसाद जिस छपरा के जिला स्कूल में पढ़ते थे वहां ही उनकी यादों को समेटने का कोई पुख्ता इंतजाम नहीं है.

खास बात यह कि कलकत्ता विश्वविद्यालय (Calcutta University) वर्ष 1906 में उनकी पढ़ाई के दौरान एक परीक्षक ने राजेन्द्र बाबू को परीक्षक से बेहतर बताया था और कॉपी मूल्यांकन के दौरान एग्जामिनी इज बेटर देन एग्जामिनर (Examinee is better than examiner) लिख दिया था. वहां केवल उनकी एक प्रतिमा भर लगी है और उनके नाम की एक वाटिका है जो जीर्ण-शीर्ण हालत में है.

डॉ राजेंद्र बाबू से जुड़ी धरोहरों का रखरखाव नहीं
बता दें कि Examinee is better than examiner के तौर पर विश्व में यह अपने आप में एक अलग तरह का सम्मान था जो किसी छात्र को शिक्षक से मिला था. हालांकि पूर्व में स्कूल प्रशासन ने इस बाबत उनके समय की कॉपियों और अन्य अभिलेखों को मंगाने के लिए कोलकाता लाइब्रेरी प्रशासन को कई बार पत्राचार किया है, लेकिन वर्तमान समय में उस पत्राचार के भी कोई रिकार्ड संधारित नहीं है.
छपरा जिला स्कूल से जुड़ी हैं राजेंद्र बाबू की यादें


बता दें कि राजेंद्र बाबू के प्रारंभिक पारंपरिक शिक्षण के बाद 12 वर्ष की उम्र में आगे की पढ़ाई के लिए छपरा के जिला स्कूल भेजा गया था. इसी दौरान राजेंद्र प्रसाद का विवाह राजवंशी देवी से हुआ था. विवाह के बाद वे अपने बड़े भाई महेंद्र प्रसाद के साथ पढ़ाई के लिए पटना चले गए थे. यहां पर उन्होंने टी.के. घोष अकादमी में दाखिला लिया था. इस संस्थान में उन्होंने दो साल अध्ययन किया.

अंग्रेजों के खिलाफ डॉ राजेंद्र प्रसाद ने लड़ी लड़ाई
इसके बाद कलकत्ता विश्वविद्यालय की प्रवेश परीक्षा में डॉ राजेंद्र प्रसाद ने पहला स्थान प्राप्त किया था. इस उपलब्धि पर उन्हें 30 रुपये प्रतिमाह की छात्रवृत्ति से पुरस्कृत भी किया गया था. राजेंद्र बाबू ने कानून में मास्टर की डिग्री विशिष्टता के साथ हासिल की और इसके लिए उन्हें स्वर्ण पदक प्रदान किया गया था. कानून में ही उन्होंने डॉक्टरेट भी किया था. कुछ दिनों तक वकालत करने के बाद राजेंद्र बाबू ने वकालत छोड़कर अंग्रेजों के खिलाफ देश में चल रहे आंदोलन में शामिल हो गए.

एक करोड़ की लागत से बनकर तैयार पार्क का नाम होगा राजेन्द्र पार्क
राजेंद्र बाबू के समृति को संजोने के लिए सारण जिला प्रशासन का प्रयास नगण्य है. हालांकि जिला स्कूल के कैंपस में नगर निगम प्रशासन द्वारा करीब एक करोड़ की लागत से एक पार्क बनाया गया है जो राजेंद्र बाबू को समर्पित है. इसके बनें हुए करीब दो साल हो गये, लेकिन आज तक चालू नहीं हुआ. काम पूरा हो चुका है, लेकिन निगम और प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही के कारण शुभांरभ नहीं हो सका है. स्कूल प्रशासन को इसके बारे मे अवगत भी नहीं कराया गया है कि कब तक हैंडओवर किया जायेगा.
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