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छठ महापर्व के लिए पिछले 100 साल से मुस्लिम परिवार बना रहे हैं महत्वपूर्ण सामग्री

News18 Bihar
Updated: October 28, 2019, 11:00 AM IST
छठ महापर्व के लिए पिछले 100 साल से मुस्लिम परिवार बना रहे हैं महत्वपूर्ण सामग्री
छपरा के इस गांव में बनने वाले अरका पात की सप्लाई देश के साथ-साथ विदेश में भी होती है.

लोक आस्था का महापर्व छठ (Chhath) बिहार (Bihar) का सबसे बड़ा त्योहार है. इसमें तमाम सामग्रियों का इस्तेमाल होता है और इन्हें समाज के हर वर्ग के लोग बनाते हैं. छठ पूजा (Chhath Puja) में अरता का पात एक जरूरी सामग्री है. आपको जानकर हैरानी होगी कि इसका निर्माण ज्यादातर मुस्लिम (Muslim) परिवार करते हैं.

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छपरा. लोक आस्था का महापर्व छठ (Chhath) बिहार (Bihar) का सबसे बड़ा त्योहार है. इसमें तमाम सामग्रियों का इस्तेमाल होता है और इन्हें समाज के हर वर्ग के लोग बनाते हैं. छठ पूजा (Chhath Puja) में अरता का पात एक जरूरी सामग्री है. आपको जानकर हैरानी होगी कि इसका निर्माण ज्यादातर मुस्लिम (Muslim) परिवार करते हैं. ऐसे ही एक परिवार के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं.

छपरा के एक गांव के कई मुस्लिम परिवार पिछले 100 साल से छठ पूजन के लिए आरता पात बनाने में लगे हुए हैं. छठ पूजा में प्रयोग होने वाला अरता पात छठ के लिए महत्वपूर्ण पूजन सामग्रियों में से एक है, लेकिन कम ही लोग जानते होंगे कि इसे बनाने वाले अधिकांश लोग मुस्लिम परिवारों के होते हैं. छपरा के झौंवा गांव में अरता पात का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है और यहां से बिहार के साथ-साथ देश के कई अन्य जिलों में भी जाता है.

मुस्लिमों की बनाई सामग्री से दिया जाता है अर्घ्य
इस गांव के रहने वाले शमीम अहमद बताते हैं कि उनका परिवार पिछले कई पीढ़ियों से इस काम में लगा रहा है और उनकी घर के बच्चे महिलाएं सभी मिलकर आरता का पात बनाते हैं. छठ एक ऐसा पर्व है, जिसमें सभी धर्म के लोगों का सहयोग दिखता है. अब झौवां गांव के शमीम भाई को ही लीजिए. इनका परिवार पिछले 100 साल से अरता पात बनाने में लगा हुआ है. हिंदुओं के सबसे महत्वपूर्ण पर्व में इन परिवारों की भूमिका काफी अहम होती है.

विदेश भी जाता है अरता का पात
छोटे से गांव झौंवा की एक बड़ी आबादी इस काम में सालों भर लगी रहती है. वैसे तो कई अन्य पूजन कार्यों में भी सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन छठ के दौरान अरता पात की खपत काफी बढ़ जाती है, जिसके कारण इस वक्त यहां इसे बड़े पैमाने उत्पादन किया जाता है और यहां से बनने वाला अरता पात देश के साथ-साथ विदेशों में भेजा जाता है.

Muslim Family Chhath Puja 1
इस गांव में लोग 100 साल से इस काम को कर रहे हैं. अरता पात के साथ मजबून खातून

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अरता पात निर्माण में कौमी एकता की मिसाल देखने को मिलती है, क्योंकि शमीम अहमद और मजबून खातून तो सिर्फ एक उदाहरण हैं. यहां के सैकड़ों मुस्लिम परिवार इस काम में सालों भर लगे रहते हैं.

इसे बनाने वालों का जीवन काफी कठिन
छपरा जिला मुख्यालय से लगभग 30 किलोमीटर दूर स्थित है झौंवा गांव, जहां छठ आते ही व्यापारियों की चहल-पहल बढ़ जाती है. व्यापारी अनिल बताते हैं कि यहां बनने वाले आरता पात को खरीदने के लिए दूसरे जिलों के लोग भी झौंवा गांव में पहुंचते हैं और यहां के लोगों को आर्थिक फायदा भी होता है. लेकिन, इस उद्योग के साथ एक काला सच भी जुड़ा हुआ है जो यहां के लोगों की जिंदगी को काफी कठिन बना देता है. अकवन के रुई से बनने वाला अरता पात यहां के लोगों में सांस संबंधित बीमारियां बढ़ा रहा है. इस गांव में टीवी के मरीज सबसे अधिक पाए जाते हैं.

बहरहाल, छठ को लेकर झौंवा गांव फिर सुर्खियों में है. यहां का बना आरता पात एक बार फिर बिहार के बाजारों में पहुंचने लगा है. आज परंपरा के साथ जुड़ा यह उद्योग कठिनाइयों के दौर से गुजरते हुए भी इस गांव का पहचान बन गया है और सांप्रदायिक सौहार्द्र का अनोखा मिसाल भी पेश कर रहा है.

(संतोष गुप्ता की रिपोर्ट)

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First published: October 28, 2019, 10:34 AM IST
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