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बिहार: पांचवें चरण में 82 प्रत्याशियों के बीच चुनावी जंग, पढ़ें सभी 5 सीटों के समीकरण

Vijay jha | News18 Bihar
Updated: May 6, 2019, 7:12 AM IST
बिहार: पांचवें चरण में 82 प्रत्याशियों के बीच चुनावी जंग, पढ़ें सभी 5 सीटों के समीकरण
फाइल फोटो

राज्य के तीन-तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों की राजनीतिक कर्मभूमि सारण में इस बार एनडीए-महागठबंधन के बीच गढ़ बचाने की चुनौती है.

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लोकसभा चुनाव के पांचवें चरण के लिए सोमवार को मत डाले जा रहे हैं. इस फेज में बिहार की पांच सीटों पर चु्नाव हैं. सीतामढ़ी, मधुबनी, मुजफ्फरपुर, सारण और हाजीपुर (सु) में 82 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला होगा. इस चरण में सारण से बीजेपी के राजीव प्रताप रूडी और आरजेडी के चंद्रिका राय, हाजीपुर से आरजेडी के शिवचंद्र राम, एलजेपी के पशुपति कुमार पारस, मधुबनी में वीआईपी के बद्री पूर्वे, निर्दलीय शकील अहमद, मुजफ्फरपुर में बीएसपी की स्वर्णलता देवी और बीजेपी के अजय निषाद, सीतामढ़ी में जेडीयू के सुनील कुमार पिन्टू, आरजेडी के अर्जुन राय सहित कई प्रमुख उम्मीदवार मैदान में हैं.

सारण के रण में कांटे की टक्कर
राज्य के तीन-तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों की राजनीतिक कर्मभूमि सारण में इस बार एनडीए-महागठबंधन के बीच गढ़ बचाने की चुनौती है. एनडीए की ओर से भाजपा के राजीव प्रताप रूडी और महागठबंधन से राजद के चंद्रिका प्रसाद राय आमने-सामने हैं. यहां राजपूत और यादवों का दबदबा रहा है. इस क्षेत्र में वैश्यों और मुस्लिमों के वोट डिसाइडिंग फैक्टर हैं. एम-वाई समीकरण बनाकर लालू यादव इस सीट से चार बार सांसद रहे हैं, जबकि राजपूत और वैश्यों को गोलबंद कर भाजपा के राजीव प्रताप रूडी इस सीट से 3 बार चुने गए.

सारण से अपने ससुर चंद्रिका राय को टिकट देने पर लालू यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप नाराज थे. उन्होंने लालू-राबड़ी मोर्चा के उम्मीदवार को लड़ाने का ऐलान भी कर दिया था, लेकिन परिवार के दबाव के चलते अब तेजप्रताप नरम पड़ गए हैं. बता दें कि 2014 के लोकसभा चुनाव में इस सीट से भारतीय जनता पार्टी के राजीव प्रताप रूडी ने 3 लाख 55 हजार 120 वोट हासिल किये थे और 40 हजार 948 वोटों के भारी अंतर से जीत दर्ज की थी.

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इस सीट पर दूसरे स्थान पर राष्ट्रीय जनता दल के राबड़ी देवी रही थीं जिन्होंने 3 लाख 14 हजार 172 वोट हासिल किये थे. जनता दल (यूनाइटेड) के सलीम परवेज 1 लाख 07 हजार 008 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे थे. NOTA को 19 हजार 163 वोट मिले थे.

मधुबनी के मैदान में बीजेपी को गढ़ बचाने की चुनौती
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बिहार के मधुबनी सीट पर महागठबंधन दरक गया है. वीआइपी के कोटे की इस सीट से कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे डॉ शकील अहमद ने निर्दलीय पर्चा दाखिल किया है. इस कारण पार्टी ने उनकी सदस्यता भी खत्म कर दी है. शकील अहमद बिहार में कांग्रेस के बड़ा अल्पसंख्यक चेहरा माने जाते थे. मधुबनी सीट पर कांग्रेस के साथ आरजेडी का भी दावा था, लेकिन वीआइपी के खाते में चली गई.

अब यहां बीजेपी से अशोक यादव (हुकुमदेव नारायण यादव के बेटे) वीआइपी के बद्री पूर्वे और निर्दलीय डॉ शकील अहमद चुनावी मैदान में हैं. शकील अहमद को राजद से निष्कासित अली अशरफ फातमी का भी समर्थन प्राप्त है. वहीं कांग्रेस के कार्यकर्ता भी शकील अहमद के सपोर्ट में खड़े हैं. ऐसे में मुख्य मुकाबला डॉ शकील अहमद और अशोक यादव के बीच ही माना जा रहा है.

सीतामढ़ी में जातिगत गोलबंदी पर सारा दारोमदार
एनडीए ने 2014 में इस सीट को 1.48 लाख वोट के बड़े अंतर से जीता था. तब यहां से आरएलएसपी के टिकट पर राम कुमार शर्मा जीते थे. इस बार यह सीट जेडीयू के खाते में है और आरएलएसपी महागठबंधन से बाहर है. हालांकि रामकुमार शर्मा ने अपनी नई पार्टी राष्ट्रवादी लोक समता पार्टी बना ली है. जेडीयू के घोषित उम्मीदवार डॉ वरुण कुमार से टिकट लेने और फिर सुनील कुमार पिंटू को बीजेपी से जेडीयू में लाकर टिकट दिए जाने से सारे समीकरण बदल गए हैं.

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यहां महागठबंधन की ओर से आरजेडी ने अर्जुन राय को उतारा है, जबकि रामकुमार शर्मा ने सुनील कुमार पिंटू को समर्थन देने का ऐलान कर दिया है. जाहिर है 15 प्रतिशत वैश्य समाज वाले इस इलाके में 17 प्रतिशत सवर्ण फैक्टर भी बड़ा है. वहीं 19 प्रतिशत यादव और 17 प्रतिशत मुस्लिम की गोलबंदी बराबरी की टक्कर की जमीन तैयार कर रही है. जबकि 32 प्रतिशत अन्य जातियां ही असली किंगमेकर बनने का माद्दा रखती हैं.

मुजफ्फरपुर में 'नेक टू नेक' संघर्ष के आसार
मुजफ्फरपुर में एनडीए की ओर से बीजेपी के अजय निषाद मैदान में हैं. वे इलाके के पुराने कद्दावर नेता स्वर्गीय कैप्टन जयनारायण निषाद के बेटे हैं. वहीं महागठबंधन की ओर से वीआईपी ने राज भूषण चौधरी निषाद को यहां से उम्मीदवार बनाया है. मुजफ्फरपुर में निषाद वोटों  की संख्या अधिक है, ऐसे में मुजफ्फरपुर में वीआईपी मुखिया मुकेश साहनी को इस सीट पर अपनी 'सन ऑफ मल्लाह' वाली इमेज को साबित करने के लिए कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है.

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बता दें कि 014 में हुए लोकसभा चुनाव में बीजेपी के अजय निषाद जीते थे. अजय निषाद को 4,69,295 वोट मिले थे. दूसरे नंबर पर रहे कांग्रेस के अखिलेश प्रसाद सिंह जिन्हें 2,46,873  वोट मिले थे. जेडीयू के बीजेंद्र चौधरी 85,140 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे. इससे पहले 2009 के चुनाव में कैप्टन जयनारायण प्रसाद निषाद ने जेडीयू के टिकट पर यहां से चुनाव जीता था.

हाजीपुर में आरजेडी - एलजेपी के बीच मुकाबला
हाजीपुर लोकसभा सीट सुरक्षित खाते में आती है और यह एनडीए की ओर से एलजेपी को दिया गया है. इस बार लोक जनशक्ति पार्टी के सांसद राम विलास पासवान इस बार चुनाव नहीं लड़ रहे हैं. अपनी जगह पर उन्होंने अपने भाई पशुपति कुमार पारस को मैदान में उतारा है. वहीं आरजेडी की ओर से शिवचंद्र राम मैदान में हैं.

जातीय आधार पर यहां सियासी समीकरण पर नजर डालें तो इस क्षेत्र में यादव, राजपूत, भूमिहार, कुशवाहा, पासवान और रविदास की संख्या सबसे अधिक है.  अति पिछड़ों की भी अच्छी संख्या है जो कई बार निर्णायक भूमिका निभाते रहे हैं. खास यह है कि इस बार दोनों प्रत्याशी नए हैं. देखना दिलचस्प रहेगा कि रामविलास पासवान की विरासत को उनके भाई आगे बढ़ा पाते हैं या सामाजिक समीकरण के बूते शिवचंद्र राम बाजी मार ले जाते हैं.

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First published: April 30, 2019, 1:21 PM IST
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