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पिता से ऐसा प्रेम कि निधन के बाद बेटे ने घर में ही बनवाया मंदिर, 11 सालों से रोज करते हैं पूजा

बिहार के छपरा जिला मे एक शख्स ने पिता की मौत के बाद उनको श्रद्धांजलि देने के लिये घर में ही मंदिर बनवाया है

बिहार के छपरा जिला मे एक शख्स ने पिता की मौत के बाद उनको श्रद्धांजलि देने के लिये घर में ही मंदिर बनवाया है

Father Son Love Story: कलयुग के इस दौर में पिता की मूर्ति स्थापित कर घर में ही मंदिर बनवाने वाले राजू की तुलना श्रवण कु ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

राजू भक्त के पिता सरकारी सेवा में प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक थे
साल 2011 में उनकी मृत्यु हो गई थी
पिता की मौत के बाद ही राजू ने घर में मंदिर का निर्माण करवाया

सारण. बदलते वक्त में आज जहां जीवित माता-पिता का ख्याल रखने में भी कई लोग पीछे हट रहे हैं तो वहीं बिहार के एक युवक ने मिसाल कायम करते हुए अपने मृत पिता की प्रतिमा को मंदिर के रूप में अपने घर में ही स्थापित किया है, जिसकी वो प्रतिदिन सपरिवार पूजा करते आ रहे हैं. यह मामला छपरा का है, जहां के दिघवारा प्रखंड के हराजी पंचायत निवासी राजू भक्त नामक युवक ने पिता के प्रति अपना अनोखा प्रेम दिखाया है.

राजू ने अपने पिता स्व चंदेश्वर दास की प्रतिमा आवासीय परिसर में स्थापित की है और प्रतिदिन विधिवत इनकी पूजा अर्चना कर अपने दैनिक जीवन की शुरुआत करते हैं. एक ओर जहां हमारे सनातन धार्मिक  मान्यताओं के हिसाब से वर्ष के मात्र 15 दिनों का समय निर्धारित है जिसे हम सभी पितृपक्ष के नाम से जानते हैं, वहीं ठीक उसके विपरीत राजू वर्ष के प्रत्येक दिन अपने पिता की प्रतिमा के आगे पूजा अर्चना कर और नियमित भोजन अर्पित कर पितृ देवो भवः के कथन को सत्य करने में जुटे हुए हैं.

राजू भक्त के पिता सरकारी सेवा में  प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक थे. साल 2011 में उनकी मृत्यु हो गई थी. अपने पिता की मृत्यु और ब्रह्मभोज के उपरांत राजू ने उनकी प्रतिमा की स्थापना सन 2011 में ही की थी. उस समय से आज तक वो नियमित पूजा अर्चन करते आ रहे हैं. राजू के पिता की प्रतिमा की पूजा अर्चना में उनके पूरे परिवार का सक्रिय भूमिका रहती है और यह कार्य अब उनकी नियमित दिनचर्या का एक हिस्सा है, जिसमें सबसे पहले प्रतिमा का स्नान कराना, चंदन आदि करना और भोजन की थाली मूर्ति के आगे रखना शामिल है.

राजू के इस कार्य को लेकर समाज में काफी चर्चा होती है. उनके और उनके परिवार द्वारा इस कार्य को लेकर सामाजिक रूप से काफी सराहना मिल रही है. राजू के इस कार्य की प्रशंसा करने वालों में संस्कृत शिक्षक प्रधानाध्यापक गोपाल जी त्रिपाठी, हराजी पंचायत के मुखिया भोला मांझी, शिक्षक नीरज कुमार शिक्षक नेता संतोष कुमार सिंह आदि शामिल हैं. सभी का कहना है कि अपने पूर्वजों का सम्मान करना सबसे बड़ा धर्म है और ये धर्म कैसे निभाया जाता है, कोई राजू से सीखे.

Tags: Bihar News, Chapra news, Saran News

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