Bihar Assembly Election 2020: नक्सल प्रभावित तरैया में बहती रही है बदलाव की बयार, इस बार भी...

मतदाताओं के अनुसार यहां किसान समस्याओं से जकड़े हुए हैं और मजदूर पलायन करने को विवश हैं.
मतदाताओं के अनुसार यहां किसान समस्याओं से जकड़े हुए हैं और मजदूर पलायन करने को विवश हैं.

Bihar Assembly Election 2020: सारण जिले का नक्सल प्रभावित तरैया विधानसभा क्षेत्र (Taraiya Assembly Constituency) के मतदाताओं ने यहां लगभग सभी पार्टियों को मौका दिया है, लेकिन कोई भी उन्हें विकास की सीढ़ियां नहीं चढ़ा पाया.

  • News18 Bihar
  • Last Updated: September 25, 2020, 10:26 AM IST
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सारण. जिले के नक्सल प्रभावित तरैया विधानसभा क्षेत्र (Taraiya Assembly Constituency) में गत 30 साल में कभी भी एक ही पार्टी का बहुत लंबे समय तक प्रभुत्व नहीं रहा है. यहां राजद, लोजपा, जनता दल और बीजेपी (RJD, LJP, Janata Dal and BJP) सभी पार्टियों को वोटर्स ने जांचा परखा है. लेकिन कोई भी इसे विकास की सीढ़ियां नहीं चढ़ा पाया. पिछले चुनाव में यहां राजद के मुंद्रिका राय (Mundrika Rai) ने बीजेपी के जनक राय को लगभग 20 हजार वोट से हराकर विधायक की कुर्सी पर कब्जा जमाया था. लेकिन इस बार उनकी राह भी आसान नहीं दिख रही है.

अगड़ी जातियों के वोटों की गोलबंदी में लगा विपक्ष इनका रास्ता रोकने की इस बार पुरजोर कोशिश करेगा. स्थानीय मतदाताओं के अनुसार विधायक क्षेत्र के विकास में फिसड्डी रहे हैं. उन पर जातिवाद के आरोप भी लगते रहे हैं. ऐसे में राजद से मुंद्रिका राय को विधानसभा पहुंचने से रोकने के लिए जदयू के प्रदेश महासचिव शैलेंद्र प्रताप सिंह और अति पिछड़ा के प्रदेश अध्यक्ष संतोष महतो पार्टी से टिकट पाने की कोशिश में जुटे हैं. वहीं पिछले चुनाव में मुंद्रिका राय से हारने वाले जनक सिंह भी क्षेत्र में सक्रिय दिख रहे हैं. इन सबके बीच लोकप्रियता बटोरने में जुटे विधायक मुंद्रिका राय इन बातों को दरकिनार कर क्षेत्र में लगातार योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास में जुटे हैं. उनका कहना है कि उनके सामने कोई दल नहीं चलने वाला है और इस बार भी वे ही विधानसभा में तरैया का प्रतिनिधित्व करेंगे.

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किसानों की समस्यायें और दियारा का विकास चुनावी मुद्दा
तरैया, पानापुर और इसुआपुर प्रखंडों का सम्मिश्रण वाला तरैया विधानसभा क्षेत्र नक्सल प्रभावित है. गंडक नदी के तटीय इलाके में बसे इस विधानसभा क्षेत्र में किसानों की समस्यायें और दियारा का विकास चुनावी मुद्दा बनता रहा है. इस चुनाव में भी मुद्दे इनसे इतर नहीं रहेंगे. नहर में समय से पानी नहीं आता और लगभग सभी सरकारी ट्य़ूबवेल बंद हैं. डबरा नदी पर गोविंदापुर गांव के पास पुल का निर्माण अधूरा है. मंझोपुर नहर पुल कभी भी ध्वस्त हो सकता है. इससे अमनौर-तरैया रोड पर आवागमन बाधित होने की आशंका रहेगी. कई सड़कें खस्ता हाल हैं. क्षेत्र में कोई डिग्री कॉलेज नहीं है और प्लस टू हाई स्कूलों में शिक्षकों का अभाव है. नल जल योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रही है.

उद्योग-धंधों की स्थापना के लिए कोई पहल नहीं हुई
पिछले पांच बरसों में यहां विकास का कोई बड़ा काम हुआ है तो वह है वंचित गांवों तक बिजली पहुंचाना. कई पुल-पुलिये और ग्रामीण सड़कें बनीं. स्कूलों के भवन बने और पेयजल के लिए गांव-गांव में चापाकल लगाये गये. अमनौर-तरैया रोड का जीर्णोंद्धार हुआ और कई गांव मुख्य सड़कों से जुड़े. लेकिन मतदाताओं का कहना है कि क्षेत्र के तीनों प्रखंडों का समुचित विकास नहीं हुआ. तरैया के डॉ. त्रिलोकीनाथ सिंह, बगही के रामनाथ राय, गोविंदापुर के आलोक कुमार सिंह और अन्य ने बताया कि तरैया विधानसभा क्षेत्र में उद्योग-धंधों की स्थापना के लिए पहल नहीं हुई. किसान समस्याओं से जकड़े हुए हैं और मजदूर पलायन करने को विवश हैं.

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अति पिछड़ा वोटर्स ही हार-जीत में निर्णायक
तरैया विधानसभा में कुल 2,94,336 वोटर हैं. इनमें से 1,57,499 पुरुष, 1,36,832 महिला और 6 वोटर थर्ड जेंडर के हैं. इन वोटरों के बीच जातीय समीकरण की बात करें तो यह इलाका राजपूत और यादव बहुल माना जाता है. हालांकि यहां का अति पिछड़ा वोटर्स ही हार-जीत में निर्णायक साबित होता है. लिहाजा इस वर्ग पर सबकी नजर रहती है.

1990 से 2015 तक यहां इन विधायकों ने किया प्रतिनिधित्व
2015 - मुंद्रिका राय - राजद
2010 - जनक सिंह - बीजेपी
2005 - (अक्टूबर) रामदास राय - राजद
2005 - (फरवरी) जनक सिंह - लोजपा
2000 - रामदास राय - राजद
1995 - रामदास राय - जनता दल
1990 - राजीव प्रताप सिंह - जनता दल
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