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छपरा: Quarantine Centre में मजदूरों को चादर की जगह मिला कफन का कपड़ा, हुआ हंगामा
Saran News in Hindi

SANTOSH GUPTA | News18 Bihar
Updated: May 19, 2020, 1:06 AM IST
छपरा: Quarantine Centre में मजदूरों को चादर की जगह मिला कफन का कपड़ा, हुआ हंगामा
मजदूरों को आभास हुआ कि ये जीते जी ओढ़ने वाली चादर नहीं है, तो सभी ने चादर फेंक दिया.

छपरा में अधिकारियों ने एक क्‍वारंटाइन सेंटर (Quarantine Centre) में मजदूरों को चादर की बजाय कफन का कपड़ा सौंप दिया. इसके बाद सेंटर में हंगामा होने लगा.

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छपरा. बिहार के बाहर से आने वाले प्रवासी मजदूरों (Migrant Workers) को क्‍वारंटाइन सेंटर में सुविधा देने का दावा लाख कर लिया जाए लेकिन अधिकारियों की लापरवाही के कारण सरकार के तमाम दावे हवाई साबित हो रहे हैं. ऐसी ही एक अजीबोगरीब लापरवाही बिहार के छपरा में सामने आई जहां अधिकारियों ने एक क्‍वारंटाइन सेंटर (Quarantine Centre) में मजदूरों को चादर की बजाय कफन का कपड़ा सौंप दिया. इसके बाद सेंटर में हंगामा होने लगा.

इसुआपुर प्रखंड के महुली चकहन हाई स्कूल स्थित क्‍वारंटाइन सेंटर की बदहाली
दरअसल, छपरा में अधिकारियों ने जीते जी मजदूरों को कफन का कपड़ा दे दिया. हंगामा बढ़ने पर जब  News18 ने छपरा के डीएम से बात की तो उन्होंने इस पूरे मामले की जांच का आदेश दे दिया. उन्होंने कहा कि मजदूरों को अच्छा चादर दिया जाएगा और अगर कफन का कपड़ा दिया गया है तो उसे वापस लिया जाएगा. इसुआपुर प्रखंड के महुली चकहन हाई स्कूल स्थित क्‍वारंटाइन सेंटर की व्यवस्था से मजदूर जहां पहले ही परेशान थे वहीं जब चादर दी गई तो मजदूर भड़क गए क्योंकि चादर नहीं वह कफन का कपड़ा था.

आभास होने पर मजदूरों ने कफन की बनी चादरों को फेंका



इसके बाद मजदूरों ने कफन की बनी चादरों को बिस्तर से उतारकर स्कूल के गेट पर फेंक दिया और घर के बिछवान मंगा लिया जिससे सिस्टम पर सवाल उठाने लगे. एक मजदूर की माने तो वह बीते शुक्रवार को सुबह तकरीबन ढाई या तीन बजे क्‍वारंटाइन सेंटर पहुंचा और जैसे ही सबों को कफन वाली चादरें ओढे सोए अवस्था मे देखा कि उसके होश उड़ गए. उसे समझ नहीं आ रहा था कि आखिर कफन ओढ़े ये क्‍वारंटाइन सेंटर के लिए आए हैं या मामला कुछ और है. जैसे तैसे खुद को संभाला तो उसे मालूम हुआ कि यहां सभी प्रवासियों को ओढ़ने के लिये यही दिया गया है. सभी को आभास हुआ कि ये जीते जी ओढ़ने वाली चादर नहीं है, तो सभी ने चादर फेंक दिया.



मजदूरों ने जो बताया वो क्‍वारंटाइन सेंटर को यातना सेंटर बताने के लिए काफी है. मजदूरो को खाने में मिर्ची ज्यादा, तो शौचालय की गंदगी और पेयजल की अनुपलब्धता के साथ मास्क तक नहीं मिल पाया ह. सेंटर में रहने वाले मजदूर बसावन भगत ने बताया कि वे पंजाब से हफ्ते दिन का सफर तय कर गांव पहुंचे, लेकिन क्‍वारंटाइन सेंटर की व्यवस्था देख हैरानी हो रही है.

जिलाधिकारी ने दिए जांच के आदेश
मधवेश्वर कुमार ने बताया कि क्‍वारंटाइन सेंटर सिर्फ नाम का है. यहां पर मिल रही सुविधाओं का वरीय अधिकारी जायजा नहीं लेते. वहीं, पूछने पर डीएम सुब्रत कुमार सेन ने कहा कि वे मामले की जांच कराएंगे और अगर ऐसा है तो मजदूरों को अच्छी चादर मिलेगी और उनको दी गई कफन का कपड़ा वापस किया जाएगा.

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First published: May 19, 2020, 1:01 AM IST
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