चिड़ियों के लिए आशियाना बनाते हैं छपरा के ये 'यूथ बिल्डर्स', एक छत के नीचे मिलती है दाना-पानी की सुविधा
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चिड़ियों के लिए आशियाना बनाते हैं छपरा के ये 'यूथ बिल्डर्स', एक छत के नीचे मिलती है दाना-पानी की सुविधा
चिड़िया के लिए पेड़ पर घोंसला टांगते छपरा के युवा

दरअसल छपरा के इन युवाओं ने भूख-प्यास के कारण चिड़िया को मरते देखा जिसके बाद उनको बचाने का तरीका इंटरनेट पर तलाश किया और एक ऐसा उपाय मिला जिसके जरिए चिड़ियों को बचाया जा सकता था.

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छपरा. अब तक आपने लोगों के लिए घर बनाने वाले बिल्डरों को देखा होगा लेकिन बिहार के छपरा में कुछ ऐसे बिल्डर है जो चिड़ियों के लिए घर बनाते हैं. दरअसल छपरा के युवाओं की टोली बेजुबान चिड़ियों के लिए आशियाना बनाती है और उनके लिए खाने की व्यवस्था भी करती है. कोरोना बंदी में युवाओं के इस प्रयास की काफी सराहना हो रही है.

टीन से बना आशियाना लगाते हैं युवा

छपरा के मौना मोहल्ला के रहने वाले ये युवा सुबह होने के साथ ही घरों से निकल पड़ते हैं और उन जगहों की तलाश करते हैं जहां चिड़ियों का आना जाना होता है. इन जगहों पर अगर चिड़ियों के लिए भोजन-पानी की व्यवस्था में दिक्कत होती है तो फिर यह युवा वहां टीन का बना घोसला लगा देते हैं जिसमें दाना-पानी रखा जाता. इस घोंसले में चिड़ियों के लिए न सिर्फ रहने की व्यवस्था रहती है बल्कि इसमें भोजन और पानी की भी व्यवस्था की जाती है. जब चिड़िया यहां आती है तो उसे काफी अच्छा महसूस होता है क्योंकि ठंडे में रहने के साथ-साथ घोसले में भोजन और पानी भी मिलता है.



चिड़िया की मौत के कारण लिया फैसला



इन युवाओं के इस प्रयास में समाज के लोग भी मदद कर रहे हैं. इस अभियान के तहत काम कर रहे श्याम कुमार ने बताया कि हाल के दिनों में चिड़ियों की मरने की कई घटनाएं सामने आई तब उन लोगों का ध्यान इस तरफ गया. उन्होंने देखा कि लॉकडाउन के दौरान चिड़ियों के लिए खाने पीने की दिक्कतें हो रही है जिसके कारण कई जगह चिड़ियों के मुर्दा शरीर दिख रहे थे, हालांकि लोग इसे कोरोना से जोड़कर देख रहे थे लेकिन वास्तविकता कुछ और थी.

इंटरनेट की मदद से ढूंढा उपाय

दरअसल और भूख प्यास के कारण चिड़िया मर रही थी जिसे देखते हुए उन्होंने इंटरनेट पर तलाश किया और एक ऐसा उपाय मिला जिसके जरिए चिड़ियों को बचाया जा सकता था. इसके बाद उन लोगों ने एक कारीगर से संपर्क किया जो टीन का घोंसला बनाने को तैयार हो गया.अभियान में शामिल सूरज कुमार ने बताया कि अब तक डेढ़ सौ जगहों पर यह घोसला लगाया जा चुका है जहां चिड़िया आकर बेफिक्र भोजन पानी करती है.

सोशल मीडिया में हो रही सराहना

इन घोसलों में भोजन-पानी की व्यवस्था का भी जिम्मा इन युवाओं की है हालांकि इनके प्रयास को देखते हुए अब स्थानीय लोग भी इनकी मदद में आगे आ रहे हैं. खास बात यह है कि युवा न तो किसी एनजीओ से जुड़े हैं ना किसी राजनीतिक पार्टी से बल्कि ये सिर्फ इंसानियत के नाते यह प्रयास कर रहे हैं. टीम के सदस्य अमित जायसवाल का कहना है कि वे लोगों को भी प्रेरित कर रहे हैं कि वह अपने आसपास इस तरह के घोसले बना देता की पक्षियों को दिक्कत ना हो. युवाओं के इस प्रयास से छपरा में पक्षियों के लिए कई आशियाने बन गए हैं. लोग अब इन युवाओं के प्रयास की सोशल मीडिया में भी सराहना कर रहे हैं.

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First published: June 7, 2020, 10:44 AM IST
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