बरबीघा विधानसभा सीट: धुरंधरों के पाला बदलने से दिलचस्प हुआ समीकरण

बरबीघा सीट पर कांग्रेस का झंडा लहराता रहा है.
बरबीघा सीट पर कांग्रेस का झंडा लहराता रहा है.

बरबीघा विधानसभा सीट (Barbigha Assembly Seat) को कांग्रेस का अभेद किला माना जाता है. यहां से कांग्रेस ने 10 बार जीत हासिल की है. पिछले चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार सुदर्शन कुमार यहां से जीते, लेकिन इस बार उन्होंने पाला बदलकर जेडीयू का दामन थाम लिया है.

  • News18 Bihar
  • Last Updated: September 22, 2020, 7:57 PM IST
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शेखपुरा. बिहार के शेखपुरा जिले में पड़ने वाले बरबीघा विधानसभा क्षेत्र (Barbigha Assembly Seat) राजनीतिक दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. इसी क्षेत्र में बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री डॉ. श्रीकृष्ण सिंह का पैतृक गांव माउर पड़ता है. शेखपुरा सीट की तरह यहां भी कांग्रेस का दबदबा रहा है. अबतक हुए 15 विधानसभा चुनावों में से 10 में कांग्रेस को जीत हासिल हुई है.

2015 में जेडीयू से वापस छीनने में कामयाब हुई कांग्रेस 

बात 2015 विधानसभा चुनाव की करें तो महागठबंधन की ओर से कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे स्वर्गीय राजो सिंह के पौत्र सुदर्शन कुमार को कांग्रेस के टिकट पर उम्मीदवार बनाया गया था. चुनाव में उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी  एनडीए उम्मीदवार शिव कुमार को 14 हजार वोटों से पराजित कर कांग्रेस के किले को वापस पाया. इससे पहले 2010 और 2005 के चुनाव में जेडीयू ने कांग्रेस के इस किले पर कब्जा जमा लिया था.



धुरंधरों ने बदल लिया पाला 
इस बार बरबीघा में विधानसभा चुनाव की तस्वीर अलग होने वाली है. क्योंकि विधायक सुदर्शन कुमार ने कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा देकर जदयू की सदस्यता ग्रहण कर ली है. ऐसे में संभावना है कि उन्हें यहां से  जदयू उम्मीदवार बनाया जा सकता है. दूसरी ओर जदयू के पूर्व विधायक विधायक गजानंद शाही ने कांग्रेस का दामन थाम लिया है. उन्हें कांग्रेस के टिकट पर महागठबंधन उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतारा जा सकता है. यानी प्रतिद्वद्वी पुराने होंगे, लेकिन सिंबल बदले हुए होंगे.

नवादा लोकसभा क्षेत्र में पड़ने वाली बरबीघा सीट पर पुरुष और महिला मतदाताओं की संख्या क्रमश: 1,26,311 और 1,11,938 हैं. 2008 में परिसीमन के बाद बरबीघा विधानसभा क्षेत्र में शेखपुरा प्रखंड और बरबीघा प्रखंड के इलाके शामिल हैं.

पिछले 5 चुनाव में किसे मिली जीत 

2015- सुदर्शन कुमार (कांग्रेस)

2010- गजानंद शाही (जेडीयू)

अक्टूबर 2005- रामसुंदर राम कनौजिया (जेडीयू)

फरवरी 2005- अशोक चौधरी (कांग्रेस)

2000- अशोक चौधरी (कांग्रेस)
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