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6 साल में नहीं बन सका बागमती नदी पर पुल, जान जोखिम में डाल कर नाव की सवारी रहे हैं लोग

Rakesh Ranjan | News18 Bihar
Updated: December 3, 2019, 11:57 PM IST
6 साल में नहीं बन सका बागमती नदी पर पुल, जान जोखिम में डाल कर नाव की सवारी रहे हैं लोग
जान जोखिम में डालकर नाव की सवारी को है मजबूर हजारों की आबादी.

बिहार सरकार (Bihar Government) के विकास के दावे खोखले साबित हो रहे हैं. जी हां, सीतामढ़ी (Sitamarhi) के नक्सल प्रभावित इलाका बेलसंड में पिछले छह साल से एक पुल (Bridge) का निर्माण चल रहा है, लेकिन वह अभी तक तैयार नहीं हुआ है. इस वजह से लोग नाव में सवारी करने के लिए मजबूर हैं और अब तक काफी संख्‍या में लोग हादसे का शिकार हो चुके हैं.

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सीतामढ़ी. न्याय के साथ चहुंमुखी विकास का दावा करने वाली बिहार सरकार ( Bihar Government) के दावे की कई मामलों में पोल खुल रही है. जबकि ये मामला सीतामढ़ी (Sitamarhi) के नक्सल प्रभावित इलाका बेलसंड से जुड़ा है, यहां पिछले छह साल से एक पुल (Bridge) का निर्माण चल रहा है, लेकिन वह अभी तक तैयार नहीं हुआ है. जबकि पुल नहीं होने के कारण नाव से नदी पार करने के कारण अभी तक कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं. यही नहीं, इस पुल के लिए आंनदोलन करते हुए कई लोग इस दुनिया से भी चल बसे हैं.

बागमती नदी पर पिछले छह साल से बन रहा पुल, लेकिन...
सीतामढ़ी के बेलसंड अनुमंडल का यह गांव है चंदौली. बागमती नदी पर पिछले 6 साल से एक पुल का निर्माण कार्य चल रहा है, लेकिन यह पूरा होता नहीं दिख रहा है. फिलहाल पिछले एक साल से इसका निर्माण कार्य भी पूरी तरह ठप पड़ा है. यही नहीं, मशीने जंग खा रही हैं, तो काम करने वाली एजेन्सी गायब है. पुल ना होने के कारण आस पास की एक बड़ी आबादी अपने आवागमन के लिए नाव पर निर्भर है. हैरानी की बात है कि नाव पर भी क्षमता ज्यादा लोगों को बैठाकर सवारी कराई जाती है. वहीं बाढ़ के दिनों में हालात भयावह हो जाते हैं. कई दफा नदी में नाव पलटने से कई लोगों की जान भी जा चुकी है, बाबजूद पुल निर्माण की दिशा में प्रशासनिक अधिकारी तत्परता नहीं दिखला रहे हैं. बिहार राज्य पुल निर्माण निगम के द्वारा इसका निर्माण कार्य कराया जा रहा है, लेकिन लगता है कि विभाग को भी अब याद नहीं है. जबकि स्‍थानीय लोग महसूस करते हैं कि अगर इस पुल बन जाता है, तो इलाके में विकास की बयार बहने लगेगी. इतना ही नहीं, सीतामढ़ी की पड़ोसी जिला शिवहर और मुजफ्फपुर से दूरी भी कम हो जाएगी.

स्थानीय ग्रामीणों ने कही ये बात

स्थानीय नागरिक मोम्‍मद नदीम का कहना है कि हम लोग नदी के उस पार रहते हैं और बाजार हाट से लेकर सरकारी कार्यालय नदी के इस पार हैं. ऐसी हालत में उन्हें अपने सब कार्य के लिए नदी के इस पार नाव के सहारे आना पड़ता है, जिसके कारण उनको बेहद परेशानी उठानी पड़ती है. जबकि सुहैब कहते है कि उनका सपना है कि वे पुल बना हुआ देख लें. साठ बसंत पार कर चुके हैं, लेकिन पुल का निर्माण अब तक पूरा नहीं हो सका है. जबकि अब उनके उनके शरीर में इतनी ताकत भी नहीं है कि वे नाव के सहारे नदी पार करके बेलसंड आ सके और फिर घंटों समय बीताकर वापस घर जा सकें.

बेलसंड अंचलाधिकारी ये बोले
सीतामढ़ी प्रशासन पुल का निर्माण कब होगा, यह बताने में असमर्थ है, लेकिन पुल के बदले मजबूरी में नाव की सवारी करने वाले लोगों की जीवन की रक्षा हेतू नाविकों पर नकेल लगाने का दावा कर रहा है. जबकि बेलसंड के अंचलाधिकारी अरविन्द प्रताव शाही का कहना है कि पुल निर्माण कार्य का जिम्मा बिहार राज्य पुल निर्माण निगम का है, इसलिए वह कब बनकर तैयार होगा इसका माकूल जबाब वही लोग दे सकते हैं, लेकिन जहां तक क्षमता से अधिक लोगों को नाव पर बैठाकर नाव परिचालन की बात हो रही है तो वे इस मामले में पहले से ही नाविकों को निर्देश दे चुके हैं लापरवाही पर पूरी कार्रवाई की जाएगी.ये भी पढ़ें-

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First published: December 3, 2019, 11:47 PM IST
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