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World Blood Donation Day: मरीजों को बचाने के लिए 58 बार ब्लड दे चुका है ये डॉक्टर

World Blood Donation Day: मरीजों को बचाने के लिए 58 बार ब्लड दे चुका है ये डॉक्टर

रक्तदान का रिकॉर्ड बनाने वाले सीतामढ़ी के डॉक्टर सुमन

रक्तदान का रिकॉर्ड बनाने वाले सीतामढ़ी के डॉक्टर सुमन

World Blood Donation Day: बिहार के सीतामढ़ी के रहने वाले डॉ. राजेश सुमन ने पहली बार 18 वर्ष की आयु में रक्तदान किया था. तब से वे प्रत्येक तीन महीने पर नियमित रूप से अपना रक्त दान करते हैं.

सीतामढ़ी. आज विश्व रक्तदाता दिवस (World Blood Donation Day) है, ऐसे में सीतामढ़ी के एक शख्स की बात करनी जरूरी है. पेशे से चिकित्सक डॉक्टर राजेश सुमन (Doctor Rajesh Suman) ने अब तक की अपनी जिंदगी में 58 दफे रक्तदान कर दर्जनों लोगों की जान बचाई है. सुमन फिजियोथेरेपी चिकित्सक हैं, जिनको अपने इस काम के बदले राष्ट्रपति से लेकर राज्य सरकार और जिला प्रशासन की ओर से कई बार सम्मानित भी किया जा चुका है.

दिव्यांग बच्चों को देते हैं मुफ्त सेवा

डॉ. सुमन की सिर्फ यही खूबी नहीं है, बल्कि वे दिव्यांग बच्चों को स्वस्थ करने के लिए भी मुहिम चला रहे हैं. वे ना सिर्फ उनको नई जिंदगी देते हैं, बल्कि अब तक सैकड़ों बच्चों को स्वस्थ कर उन्हें उनके पैरों पर खड़ा कर दिया है. दीव्यांगन नामक एक छोटा सा अस्पताल चलाकर राजेश सुमन दिव्यांग और मानसिक रूप से कमजोर बच्चों का मुफ्त में इलाज करते हैं.

हर तीन महीने पर करते हैं रक्तदान

राजेश सुमन 18 वर्ष की आयु से ही रक्तदान करते आ रहे हैं. प्रत्येक तीन महीने पर वो नियमित रूप से अपना रक्त दान करते हैं. सीतामढ़ी का ब्लड बैंक हो या फिर पटना का कोई अस्पताल, जहां भी बीमार लोगों को रक्त की जरूरत होती है, वे पहुंच जाते हैं. डॉक्टर राजेश सुमन के इस प्रयास के सभी कायल है. जिला प्रशासन के अधिकारी हों या फिर आम लोग सभी इनकी तारीफ करते नहीं थकते. राजेश सुमन को अपने इस नेक काम की वजह से राष्ट्रपति से लेकर बिहार सरकार और ज़िला प्रशासन की ओर से दर्जनों बार सम्मानित किया जा चुका है.

लोगों को भी करते हैं प्रेरित

डॉक्टर राजेश सुमन का कहना है कि रक्तदान करने में उनको असीम शांति का एहसास होता है. जब वो 18 वर्ष के थे तब से रक्तदान करते आ रहे हैं. इतना ही नहीं वो लोगों को भी प्रेरित करते हैं कि वो खुलकर रक्तदान करें. रक्तदान करने से कई तरह की गंभीर बीमारियों से भी बचा जा सकता है. सीतामढ़ी ज़िला विकास के मामले में दूसरे जिलों से भी काफी पिछड़ा है. यहां स्वास्थ्य सुविधा का भी हाल खराब है. दुर्घटना के दौरान खून की कमी और बेहतर इलाज के अभाव में यहां प्रत्येक साल कई लोगों की जान चली जाती है. ऐसे हालात में डॉक्टर सुमन जैसे लोगों ने रक्तदान कर लोगों का जान बचाने की मुहिम शुरू की है.

एक कॉल पर होते हैं उपलब्ध

सीतामढ़ी में पिछले लंबे अरसे से रक्तदाता समूह चलाकर आम लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित करने वाले नीरज गोयनका का कहना है कि राजेश सुमन ने उनकी मुहिम को भी एक नई दिशा देने की कोशिश की है. वो जिस तरीके से खून देकर लोगों की जान बचाने के लिए तत्पर रहते हैं, यह अपने आप में एक बड़ी बात है. शहर की प्रसिद्ध महिला चिकित्सक डॉ. प्रतिमा आनंद का कहना है कि जब-जब वो मरीजों को लेकर संकट की स्थिति में रही हैं, तब-तब डॉक्टर सुमन ने मदद करने का काम किया है. किसी भी मरीज को खून की जरूरत होती है, तो डॉ. सुमन उन्हें खून उपलब्ध कराते हैं.

जिला प्रशासन भी हुआ मुरीद

सीतामढ़ी जिला प्रशासन भी राजेश सुमन के इस नेक काम की तारीफ करता है. सीतामढ़ी के डीपीआरओ परिमल कुमार कहते हैं कि वो राजेश सुमन के कार्यों को अच्छी तरीके से जानते हैं. समाज के प्रति सेवा भाव एक बड़ी बात है. वो आम लोगों से भी अपील करते है कि राजेश सुमन की तरह युवा आगे आकर रक्तदान करें.

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Tags: Blood, Blood bank, Blood Donation, World Blood Donation day, World Blood Donor Day

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