मिलिए बिहार के 'हैरी पॉटर' से जो अपनी 'जादुई झाड़ू' से करते हैं कमाल, लोग मानते हैं रोल मॉडल

सीतामढ़ी में स्वच्छता अभियान के नायक बनकर उभरे हैं दुखा साह
सीतामढ़ी में स्वच्छता अभियान के नायक बनकर उभरे हैं दुखा साह

दुखा साह का कहना है कि उनको इस काम मे बेहद आनंद आता है. उन्हें किसी से कुछ नहीं चाहिए. बस वे अपने इस अभियान की बदौलत स्वच्छता का संदेश लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं.

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सीतामढ़ी. फिल्म और कार्टून की दुनिया का एक पात्र है हैरी पोटर जिसके पास एक जादुई झाड़ू होती है, जिसपर वह बैठकर जादुई कारामात करता है. सीतामढ़ी में भी एक हैरी पोटर है जिसका नाम है दुखा साह. जो अपनी जादुई झाड़ू के जरिये पिछले 15 सालों से स्वच्छता के लिए काम कर रहा है.  स्वच्छता के इस सिपाही को आस पास के लोग अपना रोल मॉडल मानते हैं और उसकी तारीफ किए बिना नहीं थकते.

दुखा साह बीमार और लावारिश पशुओं के लिए भी किसी फरिश्ते से कम नहीं सीतामढ़ी के सोनबरसा प्रखंड के भूतही गांव के लोगो के लिए दुखा साह एक ऐसे शख्स का नाम है जो अब किसी परिचय का मोहताज नहीं. दुखा साह अपने काम की बदौलत इलाके के लोगों के लिए रोल मांडल  बन चुका है पिछले 15 सालों से दुखा साह इलाके के लोगों के लिए स्वचछता का सिपाही बनकर उनकी सेवा कर रहा है.

सुबह सेबेरे कड़ी मेहनत करके दुखा साह अपने गांव कस्बे और चौक चौराहों की पूरे मन से सफाई करता है. इस काम मे उसे तनिक भी घृणा नहीं होती. बिना किसी स्वार्थ के दुखा साह यह काम करता है और इस काम के बदले वह किसी से कुछ लेता नहीं. दुखा साह आर्थिक रुप से बेहद कमजोर परिवार से आता है.



स्वच्छता अभियान के तहत सिर पर बोझ ढोते सीतामढ़ी के दुखा साह.

दुखा साह का तीन बेटा और एक बेटी है. दो बेटा काठमांडू और मुम्बई में फल की दुकान चलाता है. जबकि एक बेटा इंजिनियरिंग की पढ़ाई कर रहा है. सफाई काम को करने के बाद दुखा पलदारी करके अपने परिवार का भरण पोषण करता है.

उसमें से भी जो पैसा बचता है वह उस बचे हुए पैसों को  छोटे-छोटे बच्चों के बीच टॉफी और चॉकलेट खरीद कर बांट देता है. दुखा साह बीमार पशुओं के लिए भी किसी फरिश्ते से कम नहीं. वह अपने इलाके के बीमार पशुओं का न सिर्फ इलाज करता है बल्कि उसका देखभाल भी बड़े ही अच्छे तरीके से करता है.

क्या कहते हैं दुखा साह 
दुखा साह का कहना है कि उनको इस काम मे बेहद आनंद आता है. उन्हें किसी से कुछ नहीं चाहिए. बस वे अपने इस अभियान की बदौलत स्वच्छता का संदेश लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं. वे चाहते हैं उनका घर परिवार समाज पूरे तरीके से स्वस्थ्य रहे. इसके लिए वे बिना किसी स्वार्थ के बगैर यह काम करते हैं.
दुखा साह पिछले 15 सालों से इस अभियान को चला रहा है. लेकिन, इस मामले मे उसको अब तक किसी भी तरिके का कोई प्रोत्साहित नहीं किया गया.

क्या कहते हैं स्थानीय नागरिक
स्थानीय नागरिक कमर अख्तर कहते हैं वे पिछले 15 सालों से ज्यादा समय से दुखा को इस अवस्था मे देख रहे हैं. वह रोज सवेरे उठकर चौक-चौराहों की सफाई करता है. जिसके बदले वह किसी से कुछ लेता नहीं. पलदारी करता है और उससे अपना घर चलाता है. वह अपने इलाके के बच्चों में भी फेमस है.

क्या कहते हैं अधिकारी
सीतामढ़ी के प्रशासनिक पदाधिकारी परिमल कुमार कहते हैं उनको न्यूज 18 के माध्यम से दुखा साह के विषय मे जानकारी मिली है. वे पूरा प्रयास करेंगे कि आनेवाले दिनों मे दुखा को पूरा सम्मान मिले. प्रशासन के स्तर पर भी अगर दुखा साह को किसी भी तरह का कोई सहयोग की जरुरत होगी तो वे उपलब्ध कराने का प्रयास करेंगे.

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