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आखिर क्यों ठहर जाती हैं बिहार के इस पार्क पर हर किसी की नजरें

Himanshu Jha | News18Hindi
Updated: June 11, 2017, 1:10 PM IST
आखिर क्यों ठहर जाती हैं बिहार के इस पार्क पर हर किसी की नजरें
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किसी पार्क का शौचालय से क्या कोई संबंध हो सकता है? चौंक गए ना! लेकिन हम आपको घर बैठे एक ऐसे पार्क की सैर कराने जा रहे हैं जिसके हर कोने में शौचालय ही शौचालय बने दिखेंगे.

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किसी पार्क का शौचालय से क्या कोई संबंध हो सकता है? चौंक गए ना! लेकिन हम आपको घर बैठे एक ऐसे पार्क की सैर कराने जा रहे हैं जिसके हर कोने में शौचालय ही शौचालय बने दिखेंगे.

आमतौर पर जब हम पार्क की बात करते हैं तो हमारी कल्पनाओं में झुले, फूल, पौधें आते हैं, लेकिन बिहार के सीतामढी में एक ऐसा पार्क है जहां फूल पौधे तो हैं हीं साथ ही विभिन्नि प्रकार के शौचालय भी बने हैं.

सीतामढी में बने इस पार्क का नाम रखा गया है सैनीटेशन पार्क, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत के संकल्प और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लोहिया स्वच्छता अभियान के निश्चय को गति दे रहा है.

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17,000 स्क्वॉयर फीट में बने इस पार्क में भिन्न-भिन्न भौगोलिक क्षेत्रों की आवश्यछकताओं के हिसाब से 11 प्रकार के शौचालयों के मॉडलों को उनके तकनीक के साथ प्रर्दशनी के तौर पर लगाए गए हैं. यह उत्तर भारत में अपनी तरह का पहला पार्क हैं, जहां शौचालयों के सभी उपलब्ध तकनीकों को प्रर्दशित किया गया है.

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सीतामढ़ी के जिलाधिकारी राजीव रौशन के पहल पर अलग-अलग स्थितियों के लिए उपयुक्त सस्ते शौचालय के विकल्पों को पेश करने के लिए, यूनिसेफ बिहार के सहयोग से सीतामढ़ी जिला प्रशासन ने स्वच्छता प्रौद्योगिकी पार्क (Sanitation Technology Park) की स्थापना की गई.
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सीतामढी के सैनिटेशन पार्क में निम्न विकल्पों का प्रदर्शन किया गया है:
1. ट्विन पिट (अलग-अलग) फ्लश शौचालय
2. ट्विन पिट (विभाजन) फ्लश शौचालय
3. लैट्रिन-सह-बाथरूम
4. विशेष आवश्यहकता वाले लोगों के लिए शौचालय
5. एनारोबिक बैफल्ड रिएक्टर (एबीआर) से जुड़े फ्लश शौचालय
6. बायो डाइजेस्टर टैंक से जुड़ा रेडीमेड शौचालय कयूबिकल
7. बायो गैस से जुड़े रेडीमेड लैट्रेन क्यूबिकल
8. कंपोस्टेरा (जहां मल को कीड़े द्वारा उर्वरक में परिवर्तित कर दिया जाता है)
9. ईकोसैन
10. बिना पानी वाला मूत्रालय
11. समूह में हाथ धोने की सुविधा (स्कूलों के लिए)

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सीतामढी के जिला पदाधिकारी राजीव रौशन कहते हैं कि शौचालय बनवाने और उसके प्रयोग करने के लिए सामुदायिक व्यवहार परिवर्तन बहुत ही आवश्यशक है. अब लोग धीरे-धीरे शौचालय के निर्माण और उसके प्रयोग के प्रति जागरूक हो रहे हैं. पहले की तुलना में लोगों की सोच में बदलाव आया है. हम हर घर में शौचालय का निर्माण ओर उसके प्रयोग के प्रति संकल्पित हैं.

इस पहल के बारे में हमारी बात यूनिसेफ के वाश विशेषज्ञ प्रवीण मोरे से हुई है. उन्होंने कहा कि स्वच्छता प्रौद्योगिकी विकल्प बिहार के लिए एक बड़ी चुनौती का विषय बना हुआ है. उत्तर बिहार में जलोढ़ मैदान हैं वहीं दक्षिण में पहाड़ी इलाके हैं.

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First published: June 11, 2017, 1:10 PM IST
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