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बिहार की 'फ्लाइंग-गर्ल' के लिए कुछ करिये सरकार! फूल कुमारी को मदद मिले तो लाएगी गोल्ड मेडल

बिहार की 'फ्लाइंग-गर्ल' के लिए कुछ करिये सरकार! फूल कुमारी को मदद मिले तो लाएगी गोल्ड मेडल

,सीतामढ़ी की प्रतिभाशाली एथलीट फूल कुमारी की आर्थिक हालत बेहद दयनीय है.

,सीतामढ़ी की प्रतिभाशाली एथलीट फूल कुमारी की आर्थिक हालत बेहद दयनीय है.

Talent Dies In Bihar: उसका नाम है फूल कुमारी, वो पीटी ऊषा तो नहीं, लेकिन बिहार में उसे लोग उड़नपरी (Flying Girl) कहकर पुकारते हैं. सीतामढ़ी की इस उड़नपरी ने न सिर्फ राष्ट्रीय स्पर्धाओं में गोल्डमेडल जीतकर बिहार का नाम रोशन किया, बल्कि दीगर राज्यों में भी बिहार का परचम लहराया है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से लेकर पंजाब के मुख्यमंत्री तक उसे सम्मानित कर चुके हैं, लेकिन इस उड़नपरी का दुर्भाग्य ये है कि वो मजदूर की बेटी है. गरीबी उसकी प्रतिभा के रास्ते का रोड़ा बनकर खड़ी हुई है.

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सीतामढ़ी. हम अपनी प्रतिभाओं का उचित सम्मान नहीं कर पाते हैं. यह बात तब एक बार फिर तब साबित हुई जब सीतामढ़ी की उड़नपरी की दयनीय हालत सामने आई. कई अवसरों पर बिहार का नाम रोशन करने वाली उड़नपरी फूल कुमारी की आर्थिक हालत बदतर है. फूल कुमारी ने 300 मीटर दौड़ में अब तक कांस्य सिल्वर और गोल्ड मेडल जीत कर बिहार का नाम रोशन करने का काम किया है, लेकिन उसके सपनों के उड़ान में सबसे बड़ी बाधा उसकी गरीबी और तंगहाली है. इसके कारण उसके सपने साकार नहीं हो पा रहे हैं.

आर्थिक समस्या से उबरने के लिए और अपने लक्ष्य को पाने के लिए फूल कुमारी लगातार प्रशासन के अधिकारियों के सामने मदद मांगती नजर आ रही हैं, लेकिन उसको कहीं से अब तक मदद नहीं मिली. फूल कुमारी को अगर बेहतर कोच और प्रशिक्षण केंद्र में दाखिला मिल जाए तो एथलेटिक्स की दुनिया में यह और ज्यादा बेहतर प्रदर्शन करके देश और दुनिया में बिहार का नाम रोशन कर सकती हैं. लेकिन आर्थिक परेशानी फूल कुमारी के रास्ते की सबसे बड़ा बाधा साबित हो रही है.

झंडे गाड़े हैं उड़नपरी फूल कुमारी ने

बता दें कि फूल कुमारी ने गोहाटी में संपन्न नेशनल एथलेटिक्स में गोल्ड मेडल लाकर पूरे देश में बिहार का मान बढ़ाने का काम किया था. 300 मीटर की दौड़ में फूल कुमारी को यह सफलता मिली थी. इससे पहले फूल कुमारी ने चंडीगढ़ में 400 मीटर के दौड़ में कांस्य पदक जीतने का काम किया.

मजदूर पिता की संतान, प्रतिभा के रास्ते में गरीबी बनी रोड़ा

सीतामढ़ी के सुरसंड प्रखंड के हरी दुलारपुर की रहने वाली फूल कुमारी के पिता मजदूरी करके अपना और अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं. तीन बहनों और दो भाई में फूल कुमारी सबसे बड़ी फूल कुमारी ने सबसे पहले 2014 में जिलास्तरीय तरंग प्रतियोगिता से अपने करियर की शुरुआत की थी. फिर उसने पीछे मुडकर कभी नहीं देखा. कई प्रतियोगिता में जाने के लिए जब फूल कुमारी के पास बस और ट्रेन के भाड़ा नहीं होता था. लोगों ने चंदा देकर मदद करने की भी कोशिश की, पर वह पर्याप्त नहीं हुई. सीतामढ़ी प्रशासन के अधिकारी भी जानते हैं कि फूल कुमारी खेल की प्रतिभा की धनी हैं, लेकिन उसे आज तक जो सहायता मिलनी चाहिए, वो मिल नहीं सकी.

बिहार, पंजाब के सीएम भी कर चुके सम्मानित

गौरतलब है कि अब तक बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से भी फूल कुमारी अपनी बेहतरीन प्रतिभा के लिए सम्मानित हो चुकी हैं. इतना ही नहीं पंजाब के चीफ मिनिस्टर ने भी बेहतर प्रदर्शन को लेकर फूल कुमारी को सम्मानित किया है. फूल कुमारी बताती हैं कि उसको अगर सरकारी सहायता मिले तो वह एथलेटिक्स की दुनिया में काफी बेहतर कर सकती हैं. वह न सिर्फ सीतामढ़ी की बल्कि बिहार का नाम ऊंचा करेंगी.

आश्वासन मिला, लेकिन मदद नहीं

बहरहाल अब तक सारे आश्वासनों के बावजूद फूल कुमारी को सरकारी सहायता नहीं मिल पा रही है. सीतामढ़ी के सूचना जन सम्पर्क पदाधिकारी परिमल कुमार ने इस संबंध मे पूछे जाने पर बताया कि जिला खेल पदाधिकारी से फुल कुमारी को लेकर बात हुई है. उनको हर संभव सरकारी सहायता उपलब्ध कराने की कोशिश की जाएगी.

Tags: Bihar News

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