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BPSC की तैयारी कर रही छात्रा कमा रही लाखों रुपये, जानें कैसे आपदा को बनाया अवसर

माधुरी ने इलेक्ट्रीशियन पिता से बल्ब बनाने की ट्रेनिंग ली और अपना व्यापार शुरू किया.

माधुरी ने इलेक्ट्रीशियन पिता से बल्ब बनाने की ट्रेनिंग ली और अपना व्यापार शुरू किया.

BPSC Student Earning Money: माधुरी ने कोरोना काल में देश के अलग-अलग हिस्सों से अपने घर लौट रहे प्रवासी मजदूरों के दर्द को समझा और उन्होंने ठान लिया कि बीपीएससी परीक्षा की तैयारी के साथ-साथ किसी उद्योग की स्थापना करेंगी. इसी दौरान उन्होंने अपने इलेक्ट्रीशियन पिता से बल्ब बनाने की ट्रेनिंग ली और छोटे पैमाने पर अपना व्यापार शुरू किया.

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सीवान. बिहार के सीवान जिले में बीपीएससी की तैयारी कर रही छात्रा माधुरी कुमारी ने आपदा को अवसर बनाते हुए लोगों के सामने एक बेहतर उद्यमी बनकर उभरी हैं. गुठनी प्रखंड के गोहरुआ गांव की रहने वाली 21 वर्षीय छात्रा माधुरी आपदा को अवसर में बदल जहां लाखों रुपए कमा रही हैं वहीं उन्होंने कई लोगों को रोजगार भी दे रखा है.

दरअसल माधुरी ने कोरोना काल में देश के अलग-अलग हिस्सों से अपने घर लौट रहे प्रवासी मजदूरों के दर्द को समझा और उन्होंने ठान लिया कि बीपीएससी परीक्षा की तैयारी के साथ-साथ किसी उद्योग की स्थापना करेंगी. इसी दौरान उन्होंने अपने इलेक्ट्रीशियन पिता से बल्ब बनाने की ट्रेनिंग ली और छोटे पैमाने पर अपना व्यापार शुरू किया. कुछ ही दिनों में मिले अच्छे परिणाम से आज वह LED बल्ब निर्माण कंपनी चला रही है.

ढाई लाख की लागत से की थी शुरुआत 

माधुरी बताती हैं कि ये सब उनके पिता और भाई के सहयोग से ही संभव हो सका. बल्ब मैन्युफैक्चरिंग यूनिट की कैसे करें शुरुआत बल्ब मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का शुरुआत करने से पहले इसके बारे में उचित ढंग से जानना और परखना होता है. माधुरी कुमारी ने इस बिजनेस के बारे में बताते हुए कहा कि बल्ब उद्योग को शुरू करने के लिए सबसे पहले ट्रेनिंग लेने की जरूरत होती है. इस उद्योग को शुरू करने से पहले इसके बारे में जानकारी लेना अति आवश्यक है. मैं इसकी जानकारी छपरा में अपने रिलेटिव के यहां जिनका बल्ब मैन्युफैक्चरिंग यूनिट है. वहां और दिल्ली में भी कई बल्ब कंपनियों का विजिट किया. उसके बाद अपने प्रखंड मुख्यालय में ढाई लाख की लागत से बल्ब मैन्युफैक्चरिंग यूनिट की शुरुआत की थी.

400 से 500 LED बल्ब बनकर तैयार

उन्होंने बताया कि जैसे-जैसे कंपनी को फायदा हुआ. उसी प्रकार मैंने अपने कारोबार को आगे बढ़ाया. आज उनके कंपनी में प्रतिदिन 400 से 500 LED बल्ब बनकर तैयार हो रहे हैं. उन्होंने इस उद्योग को शुरुआत करने व मुनाफा का अच्छा विकल्प बताया है. आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत मिली मदद प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत स्कीम की सराहना करते हुए बताया कि उन्हें उद्योग स्थापित करने में इस योजना का बेहद योगदान मिला.

10 लाख रुपए का लोन हुआ था सैंक्शन 

उन्होंने कहा कि रोजगार स्थापित करने के लिए पंजाब नेशनल बैंक में ऋण लेने की 25 लाख का एप्लीकेशन डाला था ,लेकिन बाद में 10 लाख रुपए का लोन सैंक्शन हुआ, जिसमें से इंश्योरेंस, कमीशन व अन्य कागजातों में काट छांट कर 7 लाख 50 हजार रुपए हासिल हुए. उन्होंने सरकार की स्कीम की प्रशंसा भी किया, वहीं अपनी परेशानी भी बताई कि लोन लेने में थोड़ी समस्या हुई. अब वह करीब 1 दर्जन से अधिक महिलाओं और पुरुषों को रोजगार दे रही हैं. माधुरी कुमारी बताती हैं कि गांव में रोजगार के लिए भटक रहे तकरीबन एक दर्जन महिला पुरुषों को अपने लघु उद्योग कंपनी में रोजगार दिया है.

सालाना 5 लाख से अधिक रुपए का मुनाफा

उन्होंने अपनी कंपनी का इंडिया ट्रेड मार्क से रजिस्ट्रेशन करा रखा है. इनके यहां LED बल्ब 55 से 56 रुपये के आसपास ग्राहकों को उपलब्ध हो जाते हैं, जबकि वहीं बल्ब मार्केट में 110 रुपए के आते हैं. माधुरी बताती हैं कि उनके कंपनी से साल के 5 लाख से अधिक रुपयों का मुनाफा हो जाता है. एलईडी की मशीन लगा मजदूरों के साथ मिलकर खुद एलईडी बल्ब बनाती है और दूसरे के घर को उजाला करती है. साथ ही साथ एक मोटी रकम भी कमाती है. साथ ही यह दूसरों के लिए भी प्रेरणा स्रोत है कि माधुरी अपनी पढ़ाई के साथ-साथ उद्योग कर रही हैं.

Tags: Bihar News, BPSC, Siwan news

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