रक्षा बंधन विशेष: धरती फटी और भाई-बहन उसमें समा गए, जानें इस मंदिर की खास बातें

महाराजगंज अनुमडंल मुख्यालय से 3 किलोमीटर दूरी पर भीखाबांध में दो वट वृक्ष है. चार बीघा में फैले हुए दोनों वट वृक्ष ऐसे हैं, जैसे एक दूसरे से लिपट कर एक दूसरे की रक्षा कर रहे हैं.

News18 Bihar
Updated: August 15, 2019, 1:09 PM IST
रक्षा बंधन विशेष: धरती फटी और भाई-बहन उसमें समा गए, जानें इस मंदिर की खास बातें
बिहार के सीवान में भाई-बहन के प्रेम व बलिदान का प्रतीक भैया-बहिनी मंदिर
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Updated: August 15, 2019, 1:09 PM IST
बिहार के सीवान में ऐतिहासिक 'भइया-बहनी' का मंदिर भाई-बहन के अटूट प्रेम एवं विश्वास का प्रतीक बना हुआ है. दरअसल यहां बरगद का एक विशालकाय वृक्ष है जिसकी इतिहास के पन्नों में अलग ही एक कहानी है. मुगल शासनकाल में बना भाई-बहन के अटूट प्रेम व बलिदान के तौर पर है यह बिहार का एकमात्र मंदिर है जो भाई-बहन के रोचक कहानी पर आधारित है.

दरअसल महाराजगंज अनुमडंल मुख्यालय से 3 किलोमीटर दूरी पर भीखाबांध में दो वट वृक्ष है. चार बीघा में फैले हुए दोनों वट वृक्ष ऐसे हैं, जैसे एक दूसरे से लिपट कर एक दूसरे की रक्षा कर रहे हैं. रक्षाबंधन के दिन यहां भाई- बहनों का जमावड़ा लगता है. सावन पूर्णिमा के एक दिन पहले इनकी पूजा अर्चना की जाती है.

जानकार बताते हैं कि सन 1707 ई से पूर्व यानि आज से तीन सौ से भी ज्यादा साल पहले भारत में मुगलों का शासन था. एक भाई रक्षा बंधन से दो दिन पूर्व अपनी बहन को उसके ससुराल से विदा कराकर डोली से घर ले जा रहा था. तभी दरौंदा थाना क्षेत्र के रामगढा पंचायत के भीखाबांध गांव के समीप मुगल सैनिकों की नजर उन भाई बहनों की डोली पर पड़ी.

Siwan
मान्यता है कि धरती फटी और भाई-बहन उसमें समा गए


मुगल सिपाहियों ने डोली को रोककर भाई सहित बहन को बंदी बना लिए. सैनिकों ने बहन के साथ दुर्व्यवहार किया और बहन की रक्षा करने की कोशिश की. लेकिन, अधिक संख्या में सिपाही होने के कारण भाई - बहन को असहाय महसूस करने लगे. तभी बहन भगवान से अपनी इज्जत बचाने की प्रार्थना करने लगी.

मान्यता है कि बहन की गुहार सुनकर अचनाक धरती फटी और बहन- भाई उसी में समा गए. डोली ढो रहे कुम्हारों ने भी बगल में स्थित एक कुएं में कूद कर जान दे दी. कुछ दिनों बाद उसी जगह दो बट वृक्ष उगे. देखते ही देखते कुछ ही वर्षो में कई बीघा में वट वृक्ष फैल गए. वे एक दूसरे को ऐसे दिखाई पड़ते हैं, जैसे भाई - बहन एक दूसरे का रक्षा कर रहे हैं.

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सीवान के भीखाबांध के समीप है प्रसिद्ध भइया-बहनी मंदिर

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धीरे-धीरे यहां के लोग इनकी पूजा अर्चना भी करने लगे. ग्रामीणों के सहयोग से यहा भाई बहन के पिंड के रूप में मंदिर का निर्माण किया गया. भाई-बहन के इस बलिदान स्‍थल के प्रति लोगों में बड़ा ही असीम आस्था जुड़ा हुआ है. रक्षा बंधन के दिन यहां पेड़ में भी राखी बांधी जाती है और भाई-बहन की बनी स्मृति पर राखी चढ़ा र भाइयों की कलाई में बांधते हैं. ये परम्परा आज भी कायम है.

जानकार ये भी कहते हैं कि रक्षाबंधन के दिन बहन भाई के लिए तो भाई बहन के लिए यहां लम्बे उम्र की कामना की जाती हैं. इस स्थल पर प्रत्येक वर्ष रक्षा बंधन के दिन पूजा अर्चना धूमधाम से होती आ रही है. इस रास्ते से होकर जाने वाले हर एक की निगाह इस वट वृक्ष पर बरबस नजर पड़ जाती है.

रिपोर्ट- मृत्युंजय

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First published: August 15, 2019, 1:06 PM IST
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