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बिहार के इस सिद्ध गुफा योगाश्रम में आज भी होती है चक्र वेदी की पूजा, जानें खास बातें

सिवान के आश्रम में श्रद्धालु पहुंचते हैं.

सिवान के आश्रम में श्रद्धालु पहुंचते हैं.

चारों शंकराचार्य पीठ, सिद्धपीठ विंध्याचल व कामाख्या मंदिर में होने वाली चक्र पूजा में शामिल नहीं हो पा रहे हों, तो बिहा ...अधिक पढ़ें

अंकित कुमार सिंह/सीवानउत्तर बिहार में सबसे पौराणिक व प्रसिद्ध चक्र वेदी पूजन केवल सीवान के गुठनी में स्थित सिद्ध गुफा में ही 70 वर्षों से होती रही है. यह चक्र पूजन अश्वनी शुक्ला प्रतिपदा से शुरू होकर शरद पूर्णिमा तक चलता है. यह काफी पवित्र पूजा मानी जाती है. पौराणिक चक्र पूजा के संबंध में मिली जानकारी के अनुसार पूरे भारत में चारों मठों के शंकराचार्य आश्रम और शक्तिपीठों पर ही इसका आयोजन किया जाता है.

बताया जा रहा है कि इस पूजा को कराने के लिए चकरी सिद्ध गुफा पर पिछले कई वर्षों से काशी, मथुरा, प्रयागराज, असम, हरिद्वार, अयोध्या, वाराणसी से विद्वान पंडित आते हैं. पुजारी बताते हैं कि इस वैदिक पूजन की शुरुआत पूज्य गुरुदेव मौनिया महाराज ने 70 वर्ष पूर्व की थी. उस समय योगाश्रम पर सुविधाओं की कमी के चलते इस पूजन को मिट्टी के बने चबूतरे पर किया जाता था.

तीन माह पहले से शुरू हो जाती है चक्र बनाने की तैयारी
सिवान के गुठनी सिद्ध गुफा चकरी योग आश्रम में कई दशक से पारंपरिक तरीके से चक्र पूजन हो रहा है. यह चक्र पूजन भारत में 4 से 5 स्थानों पर ही होता है. इस वजह से चक्र पूजन का महत्व काफी बढ़ जाता है. वहीं अगर हम बात करें चक्र बनाने की तो, इसको बनाने के लिए 3 महीने से अधिक का समय लग जाता है. तीन माह पूर्व ही श्रीचक्र की आकृति कपड़े पर बनाई जाती है. इसे बनाने के लिए चूना, लेप, सूर्खी, पेंट, स्टिक, कुमकुम, रोड़ी सहित अन्य सामग्रियों का इस्तेमाल किया जाता है. अंततः 3 महीने के बाद चक्र बनकर तैयार हो जाता है. पूजन के दौरान बिहार, उत्तरप्रदेश, दिल्ली, पंजाब, राजस्थान समेत कई प्रदेशों से श्रद्धालु आते हैं.

चक्र पूजन से होता है पुरुषार्थ चातुष्टय का लाभ
मान्यता है कि श्रीचक्र पूजन समारोह में सम्मिलित होने मात्र से रोग, वाद, बीमारी, अशांति, अस्वस्थ जीवन और मानव जीवन में होने वाले समस्त बुराइयों का समूल नाश हो जाता है. इतना ही नही, इसके हवन, पूजन, दर्शन, कीर्तन और आरती में शामिल होने से मनवांछित फल प्राप्त होते हैं तथा सुख, शांति और समृद्धि होती है. सिद्ध गुफा चकरी योग आश्रम के महंत रघुनाथ दास ने बताया कि चक्र पूजन से मनुष्यों को पुरुषार्थ चातुष्टय का लाभ होता है. अर्थात अर्थ, धर्म, काम अथवा मोक्ष की प्राप्ति होती है. भारतवर्ष में चार-पांच स्थानों पर ही विशिष्ट चक्र पूजन होता है. इसमें चारों शंकराचार्य आश्रम, सिद्धपीठ विंध्याचल व कामाख्या मंदिर शामिल हैं. सिवान में यह पूजन पिछले 70 वर्षों से सिद्ध गुफा चकरी धाम में भी होता है, जो आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से शुरू होकर शरद पूर्णिमा तक चलता है.

Tags: Bihar News, Siwan news

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