होम /न्यूज /बिहार /आरजेडी-JDU में जोरों पर तनातनी! खटास मिटाने के लिए महागठबंधन के छोटे दलों ने की बड़ी पहल

आरजेडी-JDU में जोरों पर तनातनी! खटास मिटाने के लिए महागठबंधन के छोटे दलों ने की बड़ी पहल

महागठबंधन के सभी सहयोगियों को पता है कि बिहार में सरकार बनी रहने के लिए जद (यू) और राजद का साथ रहना आवश्यक है. (फाइल फोटो)

महागठबंधन के सभी सहयोगियों को पता है कि बिहार में सरकार बनी रहने के लिए जद (यू) और राजद का साथ रहना आवश्यक है. (फाइल फोटो)

बिहार की सत्ताधारी महागठबंधन में सात दल- जनता दल (यू), राजद, कांग्रेस, भाकपा (माले), भाकपा, माकपा और हिंदुस्तानी अवाम म ...अधिक पढ़ें

पटना. बिहार में सत्तारूढ़ महागठबंधन के के दो सबसे बड़े दलों जदयू और आरजेडी के बीच कथित तनातनी की खबरों के बीच अब इस गठबंधन के छोटे घटकों ने भी एक समन्वय समिति के जल्द गठन की मांग तेज कर दी है. राज्य में बीजेपी से सत्ता छीनने के बाद बनाया गया दो महीने से भी कम पुराने गठबंधन की राह अभी से पथरीली नजर आने लगी है. दोनों बड़े दलों के बीच नाराजगी की अटकलों को इस बात से बल मिला जब आरजेडी के प्रदेश प्रमुख जगदानंद सिंह ने साफ कहा कि डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव अगले साल अपने बॉस नीतीश कुमार की जगह लेंगे. इसके कुछ ही दिनों बाद जगदानंद सिंह के बेटे सुधाकर सिंह को कृषि मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा. सुधाकर लगातार अपनी ही सरकार को कटघरे में खड़ा कर रहे थे.

हालांकि तेजस्वी यादव ने अपनी ओर से यह कहकर स्थिति को शांत करने की कोशिश की कि वह शीर्ष पद पर कब्जा जमाने के लिए ‘जल्दबाजी में नहीं’ है. इसके साथ ही उन्होंने जगदानंद सिंह को एक सर्कुलर जारी करने के लिए कहा कि राजद कार्यकर्ता कोई भी ऐसा बयान नहीं देंगे, जिससे नए गठबंधन को मुश्किल हो.

वाम दलों ने तेज़ की समन्वय समिति की मांग
आरजेडी और जेडीयू में खटास की अटकलों के बीच अब इस महागठबंधन के छोटे सहयोगियों और खास तौर से वाम दलों को लगता है कि यह उचित समय है कि एक ‘समन्वय समिति’ बनाई जाए, जिसकी अनुपस्थिति को राज्य में एनडीए सरकार के गिरने के लिए अक्सर जिम्मेदार ठहराया जाता है.

भाकपा (माले) के विधायक दल के नेता महबूब आलम ने बताया कि उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता सुधाकर सिंह के मंत्री पद से इस्तीफे के तुरंत बाद उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव से मुलाकात की. हमें लगा कि सरकार ठीक चल रही है और सिंह के व्यवहार जैसे मामलों का प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है. ऐसे में उनसे तत्काल एक समन्वय समिति के गठन और एक साझा न्यूनतम कार्यक्रम तैयार करने का आग्रह किया.

आलम ने कहा, हमारा उद्देश्य इस तरह की गलतफहमी को दूर करना था, जिसकी आवश्यकता केवल मजबूत हुई है. उन्होंने दावा किया कि तेजस्वी यादव ने धैर्यपूर्वक उनकी सारी बातें सुनीं और उन्होंने मुझे आश्वासन दिया कि जल्द ही समिति का गठन किया जाएगा.’ आलम ने कहा, ‘उन्होंने मुझे उन प्रतिनिधियों के नाम के साथ आने के लिए कहा, जिन्हें मेरी पार्टी समन्वय समिति का हिस्सा बनना चाहेगी. मेरा मानना ​​है कि वह अन्य गठबंधन सहयोगियों के साथ भी संपर्क में हैं और हम कुछ प्रगति देखेंगे.’

महागठबंधन सरकार के लिए JDU-आरजेडी का साथ जरूरी
बिहार की सत्ताधारी महागठबंधन में सात दल- जनता दल (यू), राजद, कांग्रेस, भाकपा (माले), भाकपा, माकपा और हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा शामिल हैं. बिहार की 243 सदस्यीय विधानसभा में गठबंधन के 160 से अधिक विधायक हैं. इनमें से भाकपा (माले) के पास 12 विधायक हैं.

इस महागठबंधन के सभी सहयोगियों को पता है कि उनकी सरकार बनी रहने के लिए जद (यू) और राजद का साथ रहना आवश्यक है. इन दोनों दलों के पास कुल मिलाकर 124 विधायक हैं, जो 243 सदस्यीय विधानसभा में जादूई आंकड़े से दो अधिक है.

‘विपक्ष को ढोल पीटने का मौका न मिले’
यही कारण है कि अन्य गठबंधन सहयोगी भी भाकपा (माले) की इस राय से इत्तेफाक जताते हैं. सीपीआई के राष्ट्रीय सचिव अतुल अंजान ने कहा कि उनकी पार्टी शुरू से ही समन्वय समिति के गठन के पक्ष में रही है. अतुल अंजान ने कहा,’हमारे नेता राम नरेश पांडेय, केदार पांडेय और बिहार विधान परिषद सदस्य संजय सिंह ने सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री से मुलाकात की थी और यह प्रस्ताव रखा था.’

उन्होंने कहा, ‘हाल के घटनाक्रम की मांग है कि हमारे पास एक समन्वय समिति होनी चाहिए. मुख्यमंत्री इस विचार के खिलाफ नहीं थे. अब इसकी बहुत आवश्यकता है, क्योंकि दो विधानसभा क्षेत्रों मोकामा और गोपालगंज में उपचुनाव होने हैं. यह उपचुनाव बहुदलीय गठबंधन के लिए अपनी एकजुटता प्रदर्शित करने का एक अवसर होगा.’

सुधाकर सिंह के इस्तीफे पर अंजान ने कहा कि उनके जैसे लोगों को मंत्री पद की आकांक्षा नहीं रखनी चाहिए थी. उन्होंने सुधाकर सिंह की ओर इशारा करते हुए कहा, ‘उन्हें सरकार का अपमान नहीं करना चाहिए. विपक्ष को ढोल पीटने का मौका नहीं देना चाहिए.’

वहीं कांग्रेस के बिहार प्रभारी भक्त चरण दास, जिनकी पार्टी महागठबंधन का तीसरा सबसे बड़ा घटक है, हाल की उथल-पुथल पर टिप्पणी करने से कतराते दिखते हैं, हालांकि एक समन्वय समिति की जरूरत पर वह भी सहमत हैं. उन्होंने कहा, ‘समन्वय समिति के गठन के संबंध में चर्चा हुई है. यह जल्द से जल्द अमल में आएगा.’

Tags: Bihar News, Mahagathbandhan, Nitish kumar, RJD news

विज्ञापन

टॉप स्टोरीज

अधिक पढ़ें