जालसाज इंजीनियर! नाम में हेराफेरी कर तीन-तीन जगह कर रहा नौकरी

एक जूनियर इंजीनियर त्याग पत्र देने के बावजूद जिले के दो बड़े विभागों में नौकरी कर रहा है. इतना ही नहीं बीते कई महीनों से फर्जी तरीके से जिले के दो बड़े विभागों में करोड़ों की योजना का संचालन भी कर रहा है. एक ही व्यक्ति कहीं जलसंसाधन विभाग का जूनियर इंजीनियर है तो कहीं ग्रामीण कार्य विभाग के JE के नाम से काम कर रहा है.

News18 Bihar
Updated: July 11, 2019, 5:27 PM IST
जालसाज इंजीनियर! नाम में हेराफेरी कर तीन-तीन जगह कर रहा नौकरी
बिहार के सुपौल में जूनियर इंजीनियर की जालसाजी (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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Updated: July 11, 2019, 5:27 PM IST
आपने कई बार एक कहावत सुनी होगी- एक टिकट पर दो खेल. इस कहावत को सुपौल में ग्रामीण कार्य विभाग में कार्यरत एक जूनियर इंजीनियर सही साबित कर रहे हैं. हालांकि यहां एक टिकट पर दो नहीं, तीन खेल चल रहे हैं. आरोप है कि प्रशासन की नजरों में धूल झोंककर एक कनीय अभियंता अपने नाम में महज एक शब्द का अंतर कर तीन-तीन नौकरियां कर रहा है, लेकिन जिला प्रशासन पूरी तरह बेखबर है.

दरअसल एक जूनियर इंजीनियर त्याग पत्र देने के बावजूद जिले के दो बड़े विभागों में नौकरी कर रहा है. इतना ही नहीं बीते कई महीनों से फर्जी तरीके से जिले के दो बड़े विभागों में करोड़ों की योजना का संचालन भी कर रहा है. एक ही व्यक्ति कहीं  जलसंसाधन विभाग का जूनियर इंजीनियर है तो कहीं ग्रामीण कार्य विभाग के JE के नाम से काम कर रहा है. हद तो यह है कि महज 'कुमार' शब्द की हेरा-फेरी कर त्यागपत्र देने के बाद भी दो विभागों का जिम्मा महीनों से अपने पास रखे हुए है. हालांकि विभाग इससे बेखबर है.



बिहार के सुपौल में कार्यरत कुमार गौतम गिरी पर आरोप है कि वे नाम में हेराफेरी कर तीन-तीन जगहों पर कार्य कर रहे हैं.


दरअसल ये कारनामा करने वाले जई कुमार गौतम गिरी कुछ साल पहले ग्रामीण कार्य विभाग बीरपुर में संविदा के आधार पर कार्यरत थे. इसी दौरान सुपौल के तत्कालीन डीएम ने इन्हें जिले के सरायगढ़ प्रखंड में मुख्यमंत्री सात निश्चय योजना की जिम्मेवारी सौंपी. फिर 17 नवंबर को जाते-जाते तत्कालीन डीएम ने इन्हे किशनपुर प्रखंड का भी जिम्मा दे दिया.

इन दोनों जगहों पर कुमार गौतम गिरी ने अपना नाम गौतम कुमार गिरी रख कर ग्रामीण कार्य विभाग तो जल संसाधन विभाग के जेई की हैसियत से काम करते रहे. इसी बीच फरवरी 2019 में कमिशन से ये ग्रामीण कार्य विभाग में जूनियर इंजीनियर के पद के लिए चुने गए. जिसके बाद इन्होंने सुपौल में सभी विभागों को अपना त्याग पत्र दे दिया और पटना में अपना योगदान दिया. बावजूद इसके ये गौतम कुमार गिरी के नाम से इन दो प्रखंडों में योजना का संचालन करते रहे.

इसके बाद सरकार में अच्छी पहुंच रखने वाले इस जेई को फिर से त्रिवेणीगंज ग्रामीण कार्य प्रमंडल में स्थायी नियुक्ति कर भेज दिया गया, लेकिन वो आज भी जल संसाधन विभाग के जेई के पद पर सरायगढ़ प्रखंड में कार्यरत हैं. हाल ही में जिला पंचायती राज विभाग से निकले पत्र में जल संसाधन विभाग के जेई की हैसियत फिर इन्हें सरायगढ़ प्रखंड का जिम्मा सौंप दिया गया है.

प्रशासन को इस बाबत खबर मिलने के बाद भी अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है.

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हालांकि यह साफ है कि विभिन्न प्रखंडो से उपलब्ध कागजात की पीडीएफ फाइल में कई जगहों पर नाम बदला हुआ है. जाहिर है सवाल उठना लाजमी है कि आखिर त्याग पत्र देने के बावजूद ये किस आधार पर कई महीनों तक करोड़ों की योजना का संचालन करते रहे.

इस बाबत त्रिवेणीगंज प्रखंड में कनीय अभियंता कुमार गौतम गिरी बताते हैं कि तत्कालीन डीएम ने उन्हें अच्छे कार्य करने के कारण दो प्रखंडों का जिम्मा दिया, लेकिन वो जलसंसाधन विभाग में कभी कार्यरत ही नहीं थे. ऐसे में सवाल उठता है कि जिला प्रशासन ने इनका पता जलसंसाधन विभाग क्यों दिखाया.

आरटीआई एक्टिविस्ट अनिल कुमार सिंह के अनुसार यह एक बड़ा खेल है. नाम बदलकर कुमार गौतम गिरी ने करोड़ों की योजना का संचालन किया है जो जांच का विषय है

रिपोर्ट- अमित झा

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