जिसकी जितनी बड़ी नाव समाज में उसकी उतनी ऊंची मूंछ! बिहार के इस इलाके में स्टेटस सिंबल मानते हैं लोग
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जिसकी जितनी बड़ी नाव समाज में उसकी उतनी ऊंची मूंछ! बिहार के इस इलाके में स्टेटस सिंबल मानते हैं लोग
बिहार के कोसी इलाके में नाव को स्टेटस सिंबल से जोड़ते हैं लोग.

आप भले ही स्टेट्स के लिए कार या बाइक खरीदते है, लेकिन जीने के लिए इस इलाके में नाव (Boat) रखने का अपना ही अलग महत्व है.

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सुपौल. कोसी (Kosi) में बसे लोगों के लिए नाव (Boat) जिंदगी जीने का एक बङा साधन है. जिनकी खुद की नाव है उनकी समाज में मूंछे भी ऊंची रहती है. लिहाजा नाव का व्यपार कोसी बढते जलस्तर के साथ बढ़ने लगता है. दरअसल शादी का मौसम हो, कहीं आने के लिए सवारी की बात हो तो यहां नाव के अलावा किसी भी साधन का उपयोग नहीं होता. यही वजह है कि यहां के लोग गाड़ियों के शौक को दरकिनार कर नाव पर ही अपनी शौक पूरी करते हैं. यहां हर तरह के नाव हैं जिनके दाम भी अलग-अलग हैं. जामुन और सखुवा की लकड़ी वाले बड़े नाव की कीमत 3 लाख तक जाती है जो आज के समय में छोटी कार की कीमत है. पशुओं के चारा लाने वाला नाव भी यहां कम दामों में उपलब्ध हो जाती है. जिसकी कीमत 25 से 30 हजार तक होती है.

बाढ़ में बढ़ता है व्यापार

स्थानीय देव नारायण मिस्त्री बताते हैं कि इस बार भी कोसी का जलस्तर बढ़ने के साथ नाव का व्यपार परवान पर है. इस साल नाव की बिक्री कुछ अधिक हुई है, लेकिन इस बार छोटे नाव की मांग अधिक है. लिहाजा दिन रात काम कर सभी के आर्डर को पूरा किया जाता है. दरअसल कोसी तटबंध के भीतर रहने वाले लोगो अपनी रोजमर्रा की जरूरत पूरी करने के लिए छोटी नाव ज्यादा पसंद करते हैं ताकि खुद से नाव चलाकर अपना काम कर सकें.



स्टेटस सिंबल भी है नाव
आप भले ही स्टेट्स के लिए कार या बाइक खरीदते है, लेकिन जीने के लिए इस इलाके में नाव रखने का अपना ही अलग महत्व है. शादी का मौसम हो तो भाड़े पर गांव वाले नाव लेकर ही बारात निकलती है. जिसकी वजह से नाव का अपना ही क्रेज है. ज्यादा पैसे वाले बड़ी नाव खरीदते हैं जिसमें मोटर इंजन का उपयोग होता है तो कम पैसे वाले छोटी नाव.
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