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सुपौल: जिस रिश्तेदार की हत्या के आरोप में भेजे गए जेल उसने ही करवाई निर्दोष पिता-पुत्र रिहाई

News18 Bihar
Updated: November 20, 2018, 3:35 PM IST
सुपौल: जिस रिश्तेदार की हत्या के आरोप में भेजे गए जेल उसने ही करवाई निर्दोष पिता-पुत्र रिहाई
रिहा किए गए निर्दोष रंजीत पासवान और विशुन पासवान

पांच महीने बाद रंजीत की पत्नी सोनिया को जानकारी मिली कि पति उसी की हत्या के जुर्म में जेल में बंद है तो वह लौट आई. फिर उसने अपने पति और ससुर की रिहाई करवाई.

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अपने ही एक जीवित परिजन की हत्या के आरोप में मंडल कारा, सुपौल में बंद एक दलित पिता-पुत्र की रिहाई हुई. बाहर आने के बाद उन्होंने जो खुलासे किए हैं वो पुलिस की लापरवाह और क्रूर कार्यशैली की पोल खोलती है. पुलिस ने पहले तो पीट-पीटकर जबरन हत्या की बात कबूल करवाई. बाद में जब उनकी रिश्तेदार जीवित ही सामने आ गई तो पुलिस बगलें झांकने लगी. आखिरकार कोर्ट के आदेश से दोनों निर्दोष की रिहाई हो सकी.

रंजीत पासवान अपनी जीवित पत्नी की हत्या के जुर्म में पिछले छह  महीने से जेल के भीतर था. इसी आरोप में उसके पिता विशुन पासवान भी मंडल कारा सुपौल में बंद थे. इतना ही नही रंजीत की मां गीता देवी भी 20 दिन पूर्व ही बेल पर बाहर निकली हैं. आपको बता दें कि रंजीत पासवान राघोपुर थाना इलाके के बिशनपुर चकला का रहने वाला है. रंजीत की पत्नी सोनिया भी राघोपुर की ही रहने वाली है. बताया जा रहा है कि सोनिया को 26 मई को एक महिला राघोपुर से लेकर चली गई. इसके बाद रंजीत ने खुद ही राघोपुर थाना में अपनी पत्नी की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवा दी. लेकिन पुलिस की लापरवाह कार्यशैली यहीं से आगे बढ़ती गई.

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दरअसल उसी दिन सदर थाना के तेलवा पंचायत में कोसी नदी किनारे एक लड़की की अज्ञात लाश मिली. पुलिस ने उसकी शिनाख्त रंजीत पासवान की पत्नी सोनिया के रूप में कर दी और चौकीदार के बयान पर केस दर्ज कर लिया. जिसके बाद रंजीत के गांव के मुखिया की मदद पुलिस ने रंजीत के सारे परिवार को 28 मई 2018 को गिरफ्तार कर लिया और 30 मई को जेल भेज दिया.

पांच महीने 20 दिन जेल में रहने के बाद रंजीत की मां गीता देवी बेल पर बाहर निकलीं. दूसरी ओर जब  पांच महीने बाद रंजीत की पत्नी सोनिया को जानकारी मिली कि पति उसी की हत्या के जुर्म में जेल में बंद है तो वह लौट आई. फिर उसने अपने पति और ससुर की रिहाई करवाई.

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पुलिस की लापरवाही तब भी सामने आई जब अज्ञात शव रंजीत की सास को सौंप कर उसका अंतिम संस्कार भी करवा दिया. अब सवाल है कि जिस अज्ञात शव की अंतिम क्रिया कर दी गई उसकी हत्या की गुत्थी तो उलझी ही रह गई. जाहिर है ये मानवाधिकार से भी जुड़ा मामला है. इतना ही नहीं उन पुलिसकर्मियों की लापरवाही से भी जुड़ा है जिसने ये कुकृत्य किया है.

बहरहाल निर्दोष रंजीत और उसके पिता आज जेल से बाहर निकल गए. लेकिन न्यूज़ 18 पुलिस प्रशासन से कुछ सवाल जरूर पूछता है. निर्दोष रहे पीड़ित रंजीत के परिवार के वो 6 महीने कौन लौटाएगा जो उन्होंने जेल में गुजारे हैं.

जिस लड़की की लाश मिली वो कौन थी जिसकी बेरहमी से काट-काट कर हत्या की गई थी. आखिर पुलिस अब उस हत्याकांड का कैसे खुलासा करेगी. कौन है वो परिवार जिसकी बेटी की हत्या की गुत्थी अनसुलझी रह गयी.

रिपोर्ट- अमित झा

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First published: November 20, 2018, 3:33 PM IST
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