सुपौल के इस कॉलेज में 11 गुरुजी के भरोसे 6000 स्टूडेंट

सुपौल जिले में एक ऐसा कॉलेज है, जहां करीब 6 हजार छात्र-छात्राएं का नामांकन है, लेकिन विडंबना ऐसी की तालीम देने वाले गुरूजी की संख्यां महज 11 है.

Kumar Abhishek | ETV Bihar/Jharkhand
Updated: January 16, 2018, 3:41 PM IST
Kumar Abhishek
Kumar Abhishek | ETV Bihar/Jharkhand
Updated: January 16, 2018, 3:41 PM IST
सुपौल जिले में एक ऐसा कॉलेज है, जहां करीब 6 हजार छात्र-छात्राएं का नामांकन है, लेकिन विडंबना ऐसी की तालीम देने वाले गुरूजी की संख्यां महज 11 है. यह जानकारी हैरानी करने वाली है, लेकिन यही सच है. जिला मुख्यालय से 70 किलोमीटर दूर बीरपुर अनुमंडल के ललित नारायण मिश्र स्मारक महाविद्यालय में बुनियादी सुविधाएं तक मयस्सर नहीं है.

ललित नारायण मिश्र स्मारक महाविद्यालय की स्थापना हुई थी तो इलाके के छात्र-छात्रों का भविष्य बेहतर बनेगा इस बात की उम्मीद जगी थी. कॉलेज के 42 स्वीकृत शिक्षकों की संख्या में इजाफा होने के बजाय यह घटती चली गई. इस कॉलेज में 5 हजार 900 सौ छात्र-छात्राए नामांकित है मगर शिक्षकों की संख्या महज 11 रह गई है.

शिक्षक भी समय पर आकर सिर्फ कॉजेल में अखबार पढ़कर समय गुजार रहे हैं. कॉलेज पहुंचने वाले छात्र-छात्राओं का आरोप है कि कॉजेल में पढ़ाई नहीं होती, बल्कि शिक्षक उन्हें सलाह देते हैं कि ट्यूशन कर मजबूत बने और कॉलेज के भरोसे नहीं रहे.

वहीं दूसरी तरफ कॉलेज में बनने वाला छात्रावास बीते 8 वर्षों से अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है. कॉलेज में यूं तो इंटर से लेकर स्नातक तक की पढ़ाई करवायी जाती है, जिसमे फिलहाल हिंदी, संस्कृत, दर्शन शास्त्र, इतिहास, अंग्रेजी, मैथिली, वनस्पति विज्ञान के शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं.

व्यवस्था में कमी की बात खुद प्राचार्य भी स्वीकारते हैं. उनका कहना है कि कई बार भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय मधेपुरा को सुचना दी गई, लेकिन अभी तक कोई पहल नहीं हो सकी.
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