भारत-नेपाल बॉर्डर पर एक अनोखा मंदिर, जहां श्रीराम भारत तो सीता मैया नेपाल के हिस्से में
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भारत-नेपाल बॉर्डर पर एक अनोखा मंदिर, जहां श्रीराम भारत तो सीता मैया नेपाल के हिस्से में
बिहार के सुपौल में भारत-नेपाल सीमा पर बसा राम-जानकी का अनोखा मंदिर

बिहार के सुपौल में भारत-नेपाल सीमा (Indo-Nepal Border) पर स्थित यह मंदिर आज सौहार्द की मिसाल बना हुआ है. राम और सीता भले ही दो देशों के सीमा रेखा में आते हों पर दोनो देशों के लोग इसे आपसी सद्भाव की सबसे बड़ी मिसाल मानते हैं.

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पटना/सुपौल. 5 अगस्त को अयोध्या में होने वाले राम मंदिर शिलान्यास (Ram Temple) को लेकर पूरे देश का माहौल इस समय उत्साह से लबरेज है. इस कड़ी में हम आपको राम-सीता के एक अनोखे मंदिर का कहानी बता रहे हैं जो बिहार के सुपौल (Supaul) में है. इस मंदिर में राम भारत के हिस्से हैं तो सीता मैया नेपाल के. दो देशों के बीच खींची सीमा रेखा की कई कहानियां आपने सुनी होगी पर भारत-नेपाल बॉर्डर (Indo-Nepal Border) पर स्थित इस अनोखे मंदिर की कहानी कम ही लोगों को पता है. यह मंदिर बिहार के सुपौल जिले के निर्मली प्रखण्ड के कुनौली गांव में बिहार और नेपाल के सीमा रेखा पर स्थित गांव में है.

कुनौली गांव के पास ही सीमा सुरक्षा बल यानी SSB कैम्प अवस्थित है. इसी कैम्प से सटे भारत और नेपाल की सीमा रेखा गुजरती है. कुनौली गांव में बने SSB कैम्प के ठीक बगल में बना हनुमान जी का ऐसा मन्दिर है जो सीमा रेखा के ठीक बीचोबीच स्थित है. स्थानीय लोगों के मुताबिक मंदिर में स्थित हनुमान जी का एक पांव भारत में दो दूसरा नेपाल में है. इसी तरह हनुमान जी के सीने में बने राम-सीता की मूर्ति भी दो देशों के बीच है.

रामायण कथा के मुताबिक राम-सीता दो देशों में मौजूद



कुनौली गांव के रहने वाले सत्यनारायण मंडल का कहना है कि राम जी का जन्म अयोध्या में हुआ था जबकि सीता मैया राजा जनक की पुत्री जनकपुर की थीं. भारत-नेपाल सीमा रेखा के अनुसार इस मंदिर में रामजी भारत के हिस्से में आ गए तो सीता मैया नेपाल के सीमा रेखा में हैं. ग्रामीण मनीष सिंह का कहना है कि हमलोगों के लिए भी यह चौंकाने वाला सत्य है. गांव के दादा-दादी और सभी बुजुर्ग बताते हैं कि मंदिर सीमा के ठीक बीचो-बीच स्थित है. SSB के जवानों से जब इस बारे में पूछताछ की गई तो वो आधिकारिक रूप से कहने से बचते रहे, पर कई लोगों ने बताया कि लोगों के द्वारा यही पता चलता है लेकिन यहां पर किसी तरह की कोई परेशानी नहीं होती है.
भारत-नेपाल सीमा
भारत-नेपाल सीमा का बोर्ड


भारत-नेपाल दोनो देशों के लोग आते है पूजा करने

भारत-नेपाल सीमा पर बने इस मंदिर में दोनों देशों के लोग सुबह-शाम पूजा करने पहुंचते हैं. लोगो के बीच न तो सीमा को लेकर कभी कोई परेशानी है और न ही किसी से कोई तनाव. गांव की महिला सावित्री देवी ने बताया कि यहां पता ही नहीं चलता कि कौन किसका देश है. हम सभी एक साथ पूजा करते हैं और त्योहार में मिल-जुलकर कार्यक्रम भी करते हैं. मंदिर में पूजा करने पहुचे नेपाल निवासी राजकुमार राउत का कहना है कि मंदिर से थोड़ी दूर पर पिलर गाड़ा गया था जो ठीक बीचोबीच था, पर बाढ़ के पानी के कारण वो भी नष्ट हो गया.

सुपौल स्थित भारत-नेपाल बॉर्डर
सुपौल स्थित भारत-नेपाल बॉर्डर


कुनौली का यह मंदिर सौहार्द की मिसाल

भारत-नेपाल सीमा रेखा पर स्थित यह मंदिर आज सौहार्द की मिसाल बना हुआ है. राम और सीता भले ही दो देशों के सीमा रेखा में आते हों, पर दोनो देशों के लोग इसे आपसी सद्भाव का सबसे बड़ा मिसाल मानते हैं. नेपाल निवासी गणेश भगत के मुताबिक इस मंदिर के कारण ही आजतक कभी यहां ना कभी कोई तनाव हुआ और न ही कोई भेदभाव. बाढ़ जैसी गंभीर आने पर भी लोगों को कभी ज्यादा नुकसान नहीं होता.
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