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Lockdown: साइकिल बनी शान की सवारी! दिल्ली-हरियाणा-पंजाब से 'अपने वतन' लौट रहे मजदूरों की आपबीती...

बाहर के प्रदेशों से साइकिल चलाते हुए बिहार आ रहे मजदूर.

बाहर के प्रदेशों से साइकिल चलाते हुए बिहार आ रहे मजदूर.

मजदूरों का आरोप है कि दिल्ली की सरकार एक वक्त का भोजन तक मजदूरों को नहीं दे पाई. खाने-पीने की काफी दिक्कत आने लगी तो घर के लिए चल दिए.

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मुजफ्फरपुर. दिल्ली से कोसी इलाके के मजदूर सहरसा और सुपौल जिले की यात्रा मजदूर तय कर रहे हैं. कोरोना बंदी में दिल्ली, पंजाब और हरियाणा मजदूरी करने गए मजदूरों के लिए साईकिल घर वापसी का सहारा बना है.चंदे की रकम और मजदूरी के पैसे से साईकिल खरीद कर मीलों की दूरी दिन रात मेहनत कर तय कर रहे हैं. रास्ते में जहां-तहां खाना मिल भी जा रहा है, लेकिन कई दिनों तक भूखे पेट जाकर भी साईकिल चला कर अपने घर पहुंचने की कोशिश मजदूरों के द्वारा की जा रही है. सहरसा और सुपौल इलाके के रहने वाले दर्जनों मजदूर एनएच 57 पर साइकिल चलाते मिले. 10 दिनों के सफर के बाद साइकिल से मजदूरों का जत्था दिल्ली से मुजफ्फरपुर तक पहुंचा. आगे का सफर 4 से 5 दिनों में तय करने का लक्ष्य मजदूरों ने रखा है.

दिल्ली और बिहार सरकार को कोस रहे मजदूर
दिन-रात कड़ी मेहनत के बाद दिल्ली से मुजफ्फरपुर तक पहुंचे मजदूरों का जत्था दिल्ली और बिहार सरकार को जमकर कोसा है. मजदूरों का आरोप है कि दिल्ली की सरकार एक वक्त का भोजन तक मजदूरों को नहीं दे पाई. कुछ दिनों तक खाना जरूर मिला, लेकिन इसके बाद खाने-पीने की काफी दिक्कत आने लगी.

बिहार में आम लोगों की भी मदद नहीं मिली
भूखे पेट भर दो साइकिल चला कर किसी प्रकार अपने घर पहुंचने की कोशिश में जुटे मजदूरों का यह भी आरोप है उनके खाते में बिहार सरकार द्वारा दी गई ₹1000 की रकम भी नहीं आई है. ऐसे में मजदूरों ने किसी तरह साइकिल खरीद कर अपने घर वापसी की योजना बनाई. यूपी के सीतापुर और दूसरे जिलों में मजदूरों को खाने पीने के लिए बिहार की सीमा पार करते ही मजदूरों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा.

रोजाना 60 से 70 किलोमीटर चलाते हैं साइकिल  
साइकिल से अपने घरों की ओर जाने के लिए निकले मजदूर रोजाना 60 से 70 किलोमीटर की यात्रा तय करते हैं. सुबह और शाम में अधिक साईकिल नेशनल हाइवे पर मजदूर चलाते हैं ताकि उन्हें तेज धूप का सामना ना करना पड़े. इस दौरान मजदूर जहां भी रुकते हैं उन्हें ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ता है.

दिल्ली से सहरसा लौट रहे मजदूरों ने सुनाई आपबीती.


साइकिल बनाने का सामान भी साथ 
नई साइकिल खरीदने वाले मजदूरों ने पंचर बनाने का सामान और साइकिल का पंप भी अपने साथ ले रखा है. ताकि यदि किसी प्रकार की परेशानी साइकिल में होती है तो वे उसे खुद ही दूर कर सकें. सालों से साइकिल चलाने का अभ्यास कई मजदूरों को नहीं था, लेकिन एक दूसरे की मदद और एक साइकिल पर सवार होकर घर वापसी का कर रहे हैं.

घर पहुंचने पर होंगे क्वारंटाइन
मजदूरों नर न्यूज 18 से बातचीत में कहा कि उसे कोरोना बंदी के नियमों का पूरा ख्याल है, लेकिन दिल्ली पंजाब और हरियाणा में बिहारी मजदूरों के साथ किसी विशेष प्रकार की मदद नहीं मिलने के बाद घर वापसी का फैसला साइकिल के जरिए किया है. गांव पहुंचते ही हो प्रशासन द्वारा की गई व्यवस्था के तहत आदेश का पालन करेंगे.

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