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प्रशासनिक चूक से जलमग्न हुआ बिहार, टूटे पुराने रिकॉर्ड

बिहार में बाढ़ (फाइल फोटो)
बिहार में बाढ़ (फाइल फोटो)

नेपाल,सिक्किम और उत्तर-पूर्वी राज्यों में बारिश के बाद जब तीस्ता नदी का जलस्तर बढ़ता है तो हर दिन 10-15 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जाता है. लेकिन 11 अगस्त को तीस्ता बांध से अचानक 52 हजार क्यूसेक पानी छोड़ दिया गया. करीब 24 घंटे बाद ही 12-13 अगस्त की आधी रात को किशनगंज शहर के सभी 34 वार्ड जलमग्न हो गए. इसके तुरंत बाद शनिवार को एक बार फिर पानी छोड़ा गया और रविवार को भी 22 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 16, 2017, 3:39 PM IST
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उत्तर बिहार के लोगों के लिए बाढ़ नियती बन चुकी है. बाढ़ से हरेक साल बड़े पैमाने पर जान माल का नुकसान होता है लेकिन इस साल प्रकृति के प्रकोप के साथ साथ प्रशासन की चूक भी सामने आ रही है.

किशनगंज शहर रविवार की आधी रात में जलमग्न हो गया लेकिन इसकी खबर ना तो प्रशासन को थी और ही आम लोगों को. इस साल तीस्ता बांध से अतिरिक्त पानी छोड़ना इलाके में बाढ़ का सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है.

पांच गुना पानी छोड़ने से स्थिति हुई खराब



नेपाल, सिक्किम और उत्तर-पूर्वी राज्यों में बारिश के बाद जब तीस्ता नदी का जलस्तर बढ़ता है तो हर दिन 10-15 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जाता है. लेकिन 11 अगस्त को तीस्ता बांध से अचानक 52 हजार क्यूसेक पानी छोड़ दिया गया. करीब 24 घंटे बाद ही 12-13 अगस्त की आधी रात को किशनगंज शहर के सभी 34 वार्ड जलमग्न हो गए. इसके तुरंत बाद शनिवार को एक बार फिर पानी छोड़ा गया और रविवार को भी 22 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया.
रविवार को किशनगंज शहर की लगभग सभी सड़कों, गलियों , मोहल्लों, टोलों में जलस्तर 2-6 फुट की ऊंचाई तक बहने लगा और चारों तरफ हाहाकार मच गया. 24 घंटे बाद जलस्तर घटने लगा, किन्तु शहर के निचले इलाकों में 15 अगस्त तक घरों से पानी पूरी तरह नहीं निकल सका है.

प्रशासन था बेखबर ?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा इतनी बड़ी मात्रा में बांध से पानी छोड़े जाने की सूचना बिहार सरकार को दी गई ? यदि सूचना दी गई तो क्या जिला प्रशासन ने शहरवासियों को सतर्क रहने की सूचना दी और बचाव के लिए जिला प्रशासन ने क्या इंतज़ाम किये ?

जिले के डीएम पंकज दीक्षित कुछ भी साफ साफ नहीं कहते हैं. उन्होंने सिर्फ यही कहा कि तीस्ता बांध द्वारा पानी छोड़ने की नियमित प्रक्रिया है. लेकिन सवाल यह है कि बिना किसी पूर्व सूचना के आधी रात में घरों में पानी घुस जाता है और किशनगंज के लोग त्राहिमाम करने लगते हैं.

बाढ़ से पूरे जिले में बडे़ पैमाने पर जान-माल का नुकसान हुआ है, जिसका फिलहाल आकलन किया जा रहा है. किशनगंज शहर सहित बिशनपुर, बहादुरगंज, ठाकुरगंज आदि जगहों पर कपड़ा, किराना सामान, अनाज, सीमेंट आदि के गोदामों में रातोरात पानी घुसने से करोड़ों रुपये का नुकसान होने की आशंका है.

तीस्ता बांध 1986 में बनकर हुआ तैयार

आपको बता दें कि किशनगंज से करीब 180 किमी दूर पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले में 921.7 मीटर लंबे तिस्ता बांध का निर्माण कार्य 1986 में पूरा हुआ. 1986-87 में ही तीस्ता बांध से पानी छोड़े जाने के कारण किशनगंज शहर में पानी घुस गया था. वर्ष 1991 में भी पुनरावृत्ति हुई थी. रविवार 13 अगस्त 2017 को तो शहर में बाढ़ का रिकार्ड टूट गया.

राज्य सरकार ने तीस्ता बांध के पानी को नहर के माध्यम से जिले में सिंचाई के लिए उपलब्ध कराने की सार्थक पहल अबतक नहीं की है. इसलिए तीस्ता बांध पड़ोसी राज्य के लिए भले ही वरदान हो, पर किशनगंज के लिए अभिशाप ही साबित हुआ है.

तीस्ता बांध से पनबिजली पैदा होती है. पिछले वर्ष दार्जिलिंग जिले में भेल कंपनी ने पनबिजली के लिए तीस्ता निचला बांध परियोजना पूरी की. इस बिजली का लाभ पूरे देश सहित किशनगंज को भी मिलता है. परंतु इस साल अप्रत्याशित बाढ़ से साफ हो चुका है कि यह बांध किशनगंज के लिए बाढ़ का कहर लाता है. किशनगंज के अलावा तीस्ता बांध पूर्णिया, अररिया और कटिहार को भी प्रभावित कर रहा है.

इलाके के वरिष्ठ नागरिक मिहिर कुमार दास ने बताया कि मेरी और मेरे परिवार के बुजुर्ग लोगों की याद में शहर में कभी भी ऐसी बाढ़ नहीं आई थीं. इससे पहले 1987 और 1991 में भी शहर में अचानक बाढ़ आई थी लेकिन स्थिति इतनी खराब हुई थी.

(किशनगंज के ईटीवी रिपोर्टर आशीष के साथ)

 

 
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