लॉकडाउन की दुश्वारियों के बीच बेटियां बनीं बेसहारों का सहारा
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लॉकडाउन की दुश्वारियों के बीच बेटियां बनीं बेसहारों का सहारा
राशन के अलावा दैनिक इस्‍तेमाल में आने वाली आवश्‍यक वस्‍तुओं को जरूरतमंदों तक पहुंचा रही हैं तीनों छात्राएं.

गांव के अंदर पगडंडियों पर जहां ठेला नहीं जा सकता, वहां ये तीनों सहेलियां अपने सिर पर बोरियां ढोकर जरूरतमंदों के घरों तक राशन (Ration) पहुंचा रही हैं ताकि लॉकडाउन (Lockdown) में कोई भी शख्स भूखा न रहे.

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मधुबनी. कहते हैं इरादे मजबूत हों तो हर मुश्किल आसान हो जाती है. मधुबनी के हरलाखी प्रखंड में ऐसी ही मजबूत इरादे वाली बेटियां हैं गुड़िया, प्रिया और अंजू. कॉलेज और हाई स्कूल में पढ़ने वाली इन छात्राओं ने कोरोना और लॉकडाउन (Lockdown) की परेशानियों के बीच गरीब और बेसहारों को मदद पहुंचाने का संकल्प लिया और पिछले करीब 10 दिनों में इन बेटियों ने अपनी मजबूत इच्छा शक्ति की बदौलत सौ से अधिक परिवारों तक राशन सामग्री के अलावा साबुन और मास्क (Mask) पहुंचाने का सराहनीय काम किया है.  खास बात ये है कि इन छात्राओं के पास सामान ढोने के लिए कोई सवारी नहीं है, ऐसे में ये लोग अपने पड़ोसी के हाथ ठेले की मदद ले रही हैं. यहां तक कि गांव के अंदर पगडंडियों पर जहां ठेला नहीं जा सकता, वहां ये तीनों सहेलियां अपने सिर पर बोरियां ढोकर जरूरतमंदों के घरों तक राशन पहुंचा रही हैं ताकि लॉकडाउन में कोई भी शख्स भूखा न रहे.

बहादुर बेटियों के जज्बे से जल रहा गरीबों के घर का चूल्हा
ग्लोबल बीमारी का रूप ले चुकी कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने लॉकडाउन की अवधि 3 मई तक बढ़ा दी है. ऐसे में गरीब परिवारों खासकर दिहाड़ी मजदूरों के सामने 2 वक्त की रोटी का जुगाड़ करना भी मुश्किल हो गया है. हालांकि, पीएम मोदी ने देशवासियों से बेबस और गरीब परिवारों की हर संभव मदद की अपील की है. अच्छी बात ये है कि संकट की इस घड़ी में देशभर में कई हाथ गरीबों की मदद के लिए उठ रहे हैं. मधुबनी की 3 बेटियों ने भी तमाम कठिनाइयों के बावजूद अपने बुलंद हौसले के दम पर गरीबों के घरों में चूल्हे को जलाए रखा है.

जरूरतमंद लोगों तक खाना व राशन पहुंचाने के लिए ये छात्राएं पड़ोसी के ठेले का इस्‍तेमाल करती हैं. To provide food and ration to the needy people, these girls use neighbor's handcart.
जरूरतमंद लोगों तक खाना व राशन पहुंचाने के लिए ये छात्राएं पड़ोसी के ठेले का इस्‍तेमाल करती हैं.

हरलाखी के सोठगांव पंचायत निवासी एक सामान्य परिवार की बेटी गुड़िया साह बीए पार्ट वन की छात्रा हैं, जबकि उनके साथ गरीब परिवारों तक राशन पहुंचाने का काम करने वाली अंजू और प्रिया अभी हाई स्कूल में ही पढ़ती हैं. इसके बावजूद इन छात्राओं में बेसहारों का सहारा बनने की जो ललक है वो काबिलेतारीफ है. गुड़िया का कहना है कि ‘हमारे पास साधन सीमित मात्रा में हैं, ऐसे में सभी लोगों तक राशन पहुंचाना संभव नहीं है, लिहाजा हम लोगों ने पहले एक सर्वे करके अधिक जरूरतमंद परिवारों को चिन्हित किया, फिर उसके बाद इन परिवारों तक चावल, दाल, आलू, नमक और सोयाबीन के पैकेट के अलावा कोरोना के संक्रमण से बचने के लिए साबुन और मास्क भी नि:शुल्क पहुंचाने का काम किया जा रहा है’.



सवारी के अभाव में हाथ ठेले और सिर पर ढोती हैं राशन की बोरियां In the absence of riding, hand carts and head bags carry ration bags
सवारी के अभाव में हाथ ठेले और सिर पर ढोती हैं राशन की बोरियां


समाजसेवी और व्यापारियों की मदद से करती हैं राशन का इंतजाम
लॉकडाउन में गरीबों की मदद के लिए आगे आईं इन बेटियों की पहल को समाज के कई वर्गों का खासा सहयोग मिल रहा है. इन बहादुर बेटियों का कहना है कि ‘हम लोग खुद साधारण परिवार से हैं, ऐसे में अपने घर से सभी लोगों के लिए राशन जुटाना संभव नहीं था, लेकिन अच्छी बात ये है कि हमारी अपील पर हरलाखी के कई व्यापारी और समाजसेवियों ने न सिर्फ आर्थिक मदद पहुंचाने का काम किया, बल्कि खूब हौसलाअफजाई भी की. सोठगांव पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि मोहम्मद इजहार का कहना है कि ‘संकट की इस घड़ी में इन छात्राओं ने अपने सामूहिक प्रयास से समाज को एक नई राह दिखाने का काम किया है’.

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