स्मृति शेष: केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान की मुंगेर के जमालपुर से जुड़ी हैं खास यादें

दिवंगत केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान के रिश्तेदार ने फोटो के साथ उनको याद किया.
दिवंगत केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान के रिश्तेदार ने फोटो के साथ उनको याद किया.

दिवंगत केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान (Ram Vilas Paswan) का मुंगेर (Munger) जिले के लौह नगरी जमालपुर (Jamalpur) से खासा संबंध रहा है. यहां रहन वाले उनके रिश्तेदारों (Relatives) ने उनकी मौत पर उनको याद किया और बताया कि जमालपुर से उनका खास लगाव रहा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 9, 2020, 4:18 PM IST
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मुंगेर. दिवंगत केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान (Ram Vilas Paswan) का मुंगेर(Munger) जिले के लौह नगरी जमालपुर से खासा संबंध रहा है. रामविलास साल 1975 में राजनीतिक करियर (Political Career) के शुरुआती दौर से ही जमालपुर (Jamalpur) अपने रिश्तेदार ओम प्रकाश पासवान उर्फ कंपनी पासवान के घर आते-जाते थे. यहां आने पर वो मोहल्ले के साथ ही नगर के कई लोगों से मुलाकात करते थे. यहां उनके रिश्तेदारों के साथ कई दोस्त भी थे.

पासनवान के रिश्तेदारों ने बताया कि उनको चिंगड़ी मछली (छोटी मछली ), अरहर की दाल, भुनी रेहु मछली काफी पसंद थी. दिवंगत केंद्रीय मंत्री और लोजपा के संस्थापक रामविलास पासवान का मुंगेर के जमालपुर से गहरा संबंध है. रामविलास पासवान जब छात्र राजनिति करते थे तभी से जमालपुर में ओम प्रकाश पासवान उर्फ कंपनी पासवान के यहां उनका आना-जाना लगा रहता था.

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हालांकि की अब कंपनी पासवान भी इस दुनिया में नहीं रहे. लेकिन उनके पुत्र भावेश पासवान बताते हैं कि की कैसे वो जब उनके घर आते थे तो बात होती थी. उनका भाव विचार कैसा था और उस समय के फोटोग्राफ दिखाते हुए बताते हैं कि जवानी के समय रामविलास पासवान की राजनीति  कैसी थी. भवेश बताते हैं कि जब खगड़िया मुंगेर का हिंसा हुआ करता था, तब से उनका घर में आना जाना था. जब घर आते थे तो मां स्वर्गीय विनोदी देवी से खूब बातें करते थे.

यहां माँ के हाथ की बनी चिंगड़ी मछली (छोटी मछली ) , अरहर का दाल, चावल और भुना हुआ रेहु मछली बड़े चाव से खाया करते थे.  साथ ही भवेश बताते हैं कि बड़े लीडर बनने के बाद भी कभी भी उनमे घमंड की कोई भावना नहीं आई. घर आते ही बिलकुल आम लोगों की तरह सभी से मिलते थे. बातें करते थे और बड़े ही व्यवहारिकता के साथ पेश आते थे. 2013 में जब वे मुंगेर आये तो उनके घर भी आये थे. जब 2015 में कम्पनी पासवान का देहांत हुआ तो उनके अंतिम संस्कार में रामविलासपासवन नहीं आ पाए तो उन्होंने चिराग पासवान को भेजा था. ऐसे में सियासी गलियारे के महान नेता का एका-एक दुनिया छोड़कर जाने उसके परिवार को गहरा सदमा पहुंचा है.
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