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बिहारः पेट की आग बुझाने को मैराथन-रनर बना साइकिल मैकेनिक, वैशाली से पटना तक दौड़ लगाने को है मजबूर

News18 Bihar
Updated: November 26, 2019, 7:47 PM IST
बिहारः पेट की आग बुझाने को मैराथन-रनर बना साइकिल मैकेनिक, वैशाली से पटना तक दौड़ लगाने को है मजबूर
बिहार के लिए मैराथन में कई गोल्ड मेडल जीतने वाले अरुण कुमार साहनी दो जून की रोटी के लिए बने साइकिल मैकेनिक.

बिहार (Bihar) के लिए मैराथन (Marathon) दौड़ की प्रतियोगिताओं में कई बार गोल्ड मेडल जीतने वाला खिलाड़ी अरुण कुमार साहनी (Runner Arun Kumar Sahani) सरकारी नौकरी (Government Job) के आश्वासनों के बावजूद साइकिल मैकेनिक बनने को हुआ मजबूर.

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नैंसी

पटना. बिहार (Bihar) में विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिभाओं की अनदेखी की बात नई नहीं है. हाल ही में प्रख्यात गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह (Vashishtha Narayan Singh) की पटना में मृत्यु और उसके बाद प्रशासन और सरकार का रवैया काफी चर्चा में रहा था. सरकारी उपेक्षा की यह कहानी सिर्फ शिक्षा जगत के साथ ही नहीं, बल्कि खेल और खिलाड़ियों को भी यह दंश झेलना पड़ता है. बीते दिनों न्यूज 18 ने पटना में नेशनल तैराक के तंगहाली में जीने की खबर प्रकाशित की थी. इसी क्रम में वैशाली (Vaishali) जिले के रहने वाले एथलीट और मैराथन में बिहार के लिए कई गोल्ड मेडल जीतने वाले खिलाड़ी अरुण कुमार सहनी (Marathon Runner Arun Kumar Sahani) का भी नाम आता है. 2005 से देशभर में हुए कई मैराथन दौड़ में हिस्सा ले चुके अरुण और उनका परिवार बुरे दौर से गुजर रहा है. सरकार द्वारा नौकरी के नाम पर सिर्फ आश्वासन मिलते रहने के बाद आखिरकार इस खिलाड़ी को घर चलाने के लिए साइकिल मरम्मत की दुकान खोलनी पड़ी. और तो और पटना आने के लिए

मां कामगार, पिता चलाते हैं ठेला
बिहार में खेल और खिलाड़ियों का हाल किसी से छुपा नहीं है. प्रदेश की सरकार खेल-खिलाड़ियों को बढ़ावा देने की घोषणाएं तो करती हैं लेकिन बिहार का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ियों की अनदेखी करती है. अरुण साहनी का नाम ऐसे ही खिलाड़ियों में शामिल है. बचपन से एथलीट बनने का सपना लिए बड़े हुए अरुण को शुरुआती प्रतियोगिताओं में सफलता मिली तो उन्होंने दौड़ में ही भविष्य बनाने की ठान ली. कई प्रतियोगिताओं में नाम कमाया, तो सरकार का ध्यान गया. आश्वास मिले, लेकिन नतीजा सिफर रहा. यही वजह है कि आज प्रतिभाशाली अरुण के परिवार में पिता ठेला चलाते हैं और मां दूसरे के घरों में काम कर दो जून की रोटी का इंतजाम करती हैं. खुद अरुण को साइकिल का पंचर बनाने का काम करना पड़ रहा है.

सरकारी नौकरी के नाम पर अरुण को अब तक मिला सिर्फ आश्वासन.


मेडल लाओ, नौकरी पाओ का दावा फुस्स
कुछ साल पहले बिहार सरकार ने प्रदेश में खेल और खिलाड़ियों को बढ़ावा देने के लिए मेडल लाओ, नौकरी पाओ का दावा किया था. इस दावे के बाद बिहार के खिलाड़ियों को लगा था कि अब सरकार उनकी तरफ ध्यान देगी, लेकिन यह वादा कोरा ही रहा. मैराथन दौड़ की प्रतियोगिताओं में जीते हुए कई गोल्ड मेडल दिखाते हुए अरुण ने कहा कि जिला प्रशासन और राज्य सरकार ने सम्मानित किया तो लगा कि अब नौकरी मिल जाएगी. परिवार को सहारा देने के लिए इसकी बहुत जरूरत है, लेकिन कुछ नहीं हुआ.
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पैसे न होने से वैशाली से पटना की दौड़
रोजगार और नौकरी की आस में अरुण साहनी अक्सर पटना आते रहते हैं. आर्थित तंगी ऐसी है कि कई बार पॉकेट में आने-जाने के बस का किराया न होने पर उन्हें वैशाली से पटना की दूरी दौड़ कर ही तय करनी पड़ती है. अरुण ने बताया कि नौकरी के लिए सरकारी अधिकारियों को आवेदन दे-देकर वे थक चुके है. बिहार सरकार के कई मंत्रियों से भी मिल चुके हैं, लेकिन सिवाय आश्वासन के कुछ नहीं मिला. उन्होंने बताया कि घर की माली हालत को देखते हुए आखिरकार अरुण ने साइकिल के टायर का पंक्चर बनाने का काम करने का फैसला किया. उन्होंने कहा कि कई बार जब पटना जाना मजबूरी होती है, तो तंगी की वजह से पटना तक दौड़कर ही चले जाते हैं.

Athlete and Marathon Runner Arun Kumar Sahani from Bihar working on cycle shop
पैसे न होने के कारण अरुण को वैशाली से पटना तक की लगानी पड़ती है दौड़.


मंत्री बोले- योग्य का होगा सम्मान
मैराथन-रनर अरुण कुमार साहनी ने बताया कि सरकारी नौकरी के लिए वे कई बार पटना स्थित सचिवालय के चक्कर काट चुके हैं. प्रदेश के खेल मंत्री को भी कई चिट्ठियां लिखी हैं, लेकिन कहीं से कोई मदद नहीं मिली. थक-हारकर अब अरुण नौकरी की आस छोड़ चुके हैं. हालांकि इस बाबत जब न्यूज 18 ने खेल मंत्री प्रमोद कुमार से बात की तो उन्होंने कहा कि बिहार में जो योग्य खिलाड़ी हैं, सरकार उनका सम्मान करती है. सरकारी नौकरी में खिलाड़ियों को 2 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था है. हाल ही में 19 खिलाड़ियों को सरकार ने नौकरी भी दी है. आगे भी ऐसे खिलाड़ियों को नौकरी दी जाएगी. बहरहाल, खेल मंत्री का यह आश्वासन अरुण कुमार साहनी के काम आता है या नहीं, यह तो आने वाला समय ही तय करेगा. देखना है कि अरुण साहनी को बिहार सरकार कब नौकरी दे पाती है.

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First published: November 26, 2019, 7:47 PM IST
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