Bihar: Lalganj Assembly Seat पर दो दशकों से है बाहुबली मुन्ना शुक्ला फैक्टर, 2015 में राजकुमार साह ने तोड़ा वर्चस्व

बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में इस बार लालगंज सीट पर चुनाव दिलचस्प होने की उम्मीद है. (सांकेतिक तस्वीर)
बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में इस बार लालगंज सीट पर चुनाव दिलचस्प होने की उम्मीद है. (सांकेतिक तस्वीर)

Bihar Assembly Election 2020: लालगंज सीट (Lalganj Seat) पर इस बार विधानसभा चुनाव दिलचस्प होने की उम्मीद बंधी है. वैसे आरजेडी के लिए ये सीट हमेशा से चुनौती रही है. एलजेपी और जेडीयू यहां से दो-दो बार चुनाव जीत चुके हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 23, 2020, 8:42 PM IST
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वैशाली.  बिहार में वैशाली (Vaishali) जिले की लालगंज विधानसभा सीट (Lalganj Assembly Seat) राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) की पहुंच से हमेशा दूर रही. हाजीपुर लोकसभा सीट के अंतर्गत आने वाली इस सीट पर राजद ने कई बार जोर लगाया लेकिन फिर भी वह यहां एक बार भी जीत हासिल नहीं कर सकी. पिछले 15 सालों में यहां लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) और जेडीयू (JDU) ने दो-दो बार सफलता हासिल की है. दिलचस्प ये है कि इस बार जेडीयू और एलजेपी दोनों ही एक ही खेमे एनडीए में हैं.

सीट पर बाहुबली मुन्ना शुक्ला का लंबे समय तक रहा वर्चस्व

लालगंज की इस सीट पर बाहुबली विजय कुमार शुक्ला उर्फ मुन्ना शुक्ला (Don Vijay Kumar Shukla Alias Munna Shukla) का करीब डेढ़ दशक तक वर्चस्व रहा. विजय कुमार शुक्ला उर्फ मुन्ना शुक्ला लालगंज सीट से तीन बार जीत का स्वाद चख चुके हैं. इसमें भी दो बार उन्होंने राज कुमार साह को ही हराया था. वर्ष 2000 में निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर विजय कुमार शुक्ला ने राजद से चुनाव लड़ रहे राज कुमार साह को हराया, इसके बाद फरवरी 2005 में विजय को लोजपा से टिकट मिला और उन्होंने राजद की वीणा देवी को मात दी. इसी साल अक्टूबर 2005 में विजय कुमार शुक्ला ने जेडीयू के टिकट पर राजद से राज कुमार साह को हराया.



बाद में ब्रिज बिहारी प्रसाद की हत्‍या के मामले में दोषी पाए जाने के बाद मुन्ना शुक्ला के चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी गई. इसके बाद मुन्ना की पत्नी अन्नू शुक्ला को 2010 में जेडीयू ने टिकट दिया. इस चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर राजकुमार साह मैदान में थे लेकिन उन्हें एक बार फिर मात मिली, इस बार अन्नू शुक्ला के हाथ.
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बाहुबली पूर्व विधायक मुन्ना शुक्ला (File Photo)


आखिरकार 2015 में टूटा मुन्ना शुक्ला का वर्चस्व

2015 में राज कुमार साह ने जेडीयू के तगड़े उम्मीदवार विजय कुमार शुक्ला उर्फ मुन्ना शुक्ला को मात दी थी. 2015 के विधानसभा चुनाव में करीब 57 फीसदी वोटरों ने प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला किया था. राजकुमार साह ने यहां विजय कुमार शुक्ला को करीब 11.62 प्रतिशत मतों से मात दी थी.  चुनाव में राजकुमार साह को 80,842 वोट मिले, जबकि मुन्ना शुक्ला 60549 वोट हासिल कर सके.

2015 में लोजपा की सिर्फ 2 सीटों में लालगंज की जीत थी शामिल

2015 के विधानसभा चुनाव में जेडीयू महागठबंधन में चला गया और बीजेपी की तरफ से राम विलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी को काफी सीटें मिल गई थीं. लोजपा ने बिहार की 243 सीटों में से 42 पर अपने उम्मीदवार खड़े किए थे. हालांकि चुनाव परिणाम बेहद निराशाजनक रहे और उनके महज 2 उम्मीदवार ही जीत हासिल कर सके थे. एक थे गोविंदगंज सीट से राजू तिवारी और दूसरे लालगंज विधानसभा सीट से राज कुमार साह.

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लालगंज सीट से वर्तमान विधायक लोजपा के राज कुमार साह. (File Photo)


कौन होगा एनडीए से प्रत्याशी, सबकी टिकी नजर

अब 2020 के विधानसभा चुनाव में स्थिति बदल चुकी है और महागठबंधन टूट चुका है. जेडीयू की बीजेपी खेमे में वापसी हो चुकी है. ऐसे में सीटों को बंटवारे को लेकर रस्साकसी शुरू हो गई है, देखना ये है कि लालगंज सीट पर एनडीए से उम्मीदवार कौन होगा. हालांकि पिछले चुनाव को आधार बनाते हुए लोजपा इस सीट को अपने पास रखना चाहेगी. वहीं मुन्ना शुक्ला कई बार कह चुके हैं, वह कभी किसी पार्टी का टिकट लेने नहीं जाते, सब खुद दे देते हैं.

वोटरों की स्थिति

2019 के लोकसभा चुनाव को आधार मानें तो लालगंज विधानसभा में 3 लाख 20768 मतदाता हैं. जिसमें पुरुष 172418 और महिला 148285. लालगंज विधानसभा में लालगंज और भगवानपुर प्रखंड आते हैं. ऐसे में भगवानपुर प्रखंड में 77995 पुरुष और 67272 महिला सहित कुल मतदाता 145269 मतदाता हैं. वहीं लालगंज प्रखंड में पुरुष 94937 और महिला 81445 मतदाता हैं. लालगंज विधानसभा में 334 बूथ हैं, जिसमें लालगंज प्रखंड में 182 बूथ हैं, इनमें 45 नक्सल, 67 संवेदनशील और 22 सामान्य बूथ हैं.

90 के दशक में जनता दल का रहा वर्चस्व

इस सीट पर चुनावी राजनीति के इतिहास की बात की जाए तो यहां से जनता दल दो बार चुनाव जीती. 1990 में जनता दल से केदार नाथ प्रसाद जीते, वहीं 1995 में जनता दल से योगेंद्र प्रसाद साहू विजयी रहे. दोनों ही चुनावों में कांग्रेस के भारत प्रसाद सिंह को हार मिली. भारत प्रसाद सिंह 1985 में इस सीट से विजयी रहे थे. उन्होंने तब लोकदल के टिकट पर उतरे केदार नाथ प्रसाद को हराया था. इसी तरह 1980 में कांग्रेस के ललितेश्वर प्रसाद शाही ने चरण सिंह की जनता पार्टी सेक्युलर के उम्मीदवार जय नारायण प्रसाद निषाद को हराया. इमरजेंसी के बाद 1977 के चुनाव में जनता पार्टी के अरुण कुमार सिन्हा ने यहां से जीत दर्ज की थी, उन्होंने कांग्रेस के उमेश प्रसाद सिंह को हराया था.

इससे पहले इस सीट पर 1967, 1969 और 1972 में दीप नारायण सिंह विजेता रहे, दो बार वह कांग्रेस से जीते, जबकि एक बार एलटीसी विजयी रहे. 1951 दो चुनावों में यहां पहले कांग्रेस के ललितेश्वर प्रसाद शाही जीते, फिर चंद्रमणि लाल चौधरी विजयी रहे.
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