Vaishali Assembly Seat: 15 साल में जेडीयू का मजबूत किला बनकर उभरी है वैशाली सीट, आसान नहीं सेंध लगाना

वैशाली सीट पर जेडीयू का है कई साल से दबदबा
वैशाली सीट पर जेडीयू का है कई साल से दबदबा

Bihar Assembly Election 2020: वैशाली विधानसभा सीट पर जेडीयू पहली बार 2005 में वृशिण पटेल की अगुवाई में जीत का स्वाद चखा था. 2015 में वृशिण पटेल पार्टी से दूर हो गए लेकिन जेडीयू ने यहां अपना कब्जा बरकरार रखा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 24, 2020, 9:27 PM IST
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वैशाली. बिहार विधानसभा चुनाव 2020 (Bihar Assembly Seat) में वैशाली जिला (Vaishali District) राजनीतिक प्रतिद्वंदिता का सबसे बड़ा अखाड़ा बनने जा रहा है. इसकी कई सीटों पर एनडीए (NDA) के ही घटक दलों में दावेदारी को लेकर घमासान मचना शुरू हो गया है. इन्हीं में से एक सीट है वैशाली विधानसभा सीट (Vaishali Assembly Seat). इस सीट पर जेडीयू (JDU) का वर्षों से कब्जा है. आरजेडी (RJD) ने यहां कई बार कोशिश जरूर की लेकिन चुनाव नहीं जीत सकी. हालांकि 2015 में आरजेडी जरूर महागठबंधन के तहत विजेता जेडीयू के साथ खड़ी थी.

वृशिण पटेल इस सीट पर बड़ा नाम रहे हैं. वो यहां सबसे ज्यादा बार चुनाव जीतने के रिकॉर्डधारी रहे हैं. हालांकि पिछले 2015 के विधानसभा चुनाव में वृशिण पटेल जेडीयू से अलग हो गए और हम से लड़े, पर इस बार उन्हें जेडीयू के प्रत्याशी राज किशोर सिंह ने मात दे दी. वृशिण पटेल के लिए ये सीट खट्टी-मीठी यादों से भरी है. वे 40 साल में वे यहां से 6 बार (1980, 1985, 1990, फरवरी 2005, अक्टूबर 2005 और 2010) में जीते. वहीं वर्ष 2000 और 2015 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा.

चिराग के नाम पर चर्चाएं तेज



वैसे पिछले 2 लोकसभा चुनावों से वैशाली में एलजेपी ने अपनी ताकत कायम की है. वीणा देवी एलजेपी की सांसद हैं. दिलचस्प बात ये है कि इस बार जेडीयू और एलजेपी और हम एक ही खेमे एनडीए में हैं, जाहिर है सीट के लिए रस्साकसी भी शुरू हो चुकी है. लोजपा खेमे में चर्चा है कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद चिराग पासवान इस बार विधानसभा चुनाव लड़ सकते हैं और वैशाली से दावेदारी कर सकते हैं. हालांकि चिराग या पार्टी की तरफ से आधिकारिक तौर पर अभी तक कुछ नहीं कहा गया है. लोजपा फिलहाल एनडीए में ज्यादा से ज्यादा सीट हासिल करने पर काम कर रही है.
रघुवंश प्रसाद सिंह की कर्मभूमि पर राजद से दूर ही रही ये विधानसभा

वैशाली नाम आया है तो राष्ट्रीय जनता दल के दिवंगत नेता रघुवंश प्रसाद सिंह का जिक्र भी जरूर होगा. वैशाली उनकी कर्मभूमि रही और वैशाली संसदीय सीट पर उन्होंने लगातार 5 बार चुनाव जीतने का रिकॉर्ड बनाया. उन्होंने पहला चुनाव 1996 में जनता दल से जीता, उसके बाद 1998, 1999, 2004 और 2009 में वे राष्ट्रीय जनता दल से लगातार विजयी रहे. लेकिन रघुवंश बाबू की इस साख का फायदा राजद को कभी भी वैशाली विधानसभा सीट पर नहीं मिला.

चुनावी इतिहास 

चुनावी इतिहास की बात करें तो वैशाली विधानसभा सीट से 2010 के विधानसभा चुनाव में वृशिण पटेल ने जेडीयू से चुनाव लड़ा और आरजेडी की वीणा शाही को मात दी. फरवरी और अक्टूबर 2005 में भी यही हुआ था वृशिण पटेल जेडीयू के टिकट पर मैदान में उतरे थे और उन्होंने कांग्रेस की वीणा शाही को मात दी थी. हालांकि उससे पहले कांग्रेस से वीणा शाही ने जरूर वर्ष 2000 में वृशिण पटेल को मात दी थी, तब वे राजद के टिकट पर मैदान में उतरे थे.

1995 के चुनाव में कांग्रेस की वीणा शाही को जनता दल के राज किशोर ने हराया था, इससे पहले वृशिण पटेल यहां से लगातार तीन बार लगातार (1980, 1985 और 1990) विधायक चुने गए. 1980 में वृशिण पटेल चरण सिंह की जनता पार्टी सेक्युलर से लड़े और निर्दलीय उम्मीदवार योगेंद्र प्रसाद सिंह को हराया, फिर 1985 में वह लोकदल के साथ हुए और कांग्रेस के राजेंद्र प्रसाद सिंह को हराया. 1990 में वृशिण पटेल जनता दल से मैदान में उतरे और कांग्रेस के राजेंद्र प्रसाद सिंह को फिर हरा दिया.

1977 में इस सीट पर नागेंद्र प्रसाद सिंह ने कब्जा जमाया था. वे जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़े थे और कांग्रेस के ललितेश्वर प्रसाद शाही को हराया था.

वोटरों को लुभाता है चुनाव

वैशाली विधानसभा सीट वैशाली लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है. 2011 की जनगणना के अनुसार यहां 460741 की आबादी है, जो पूरी तरह से ग्रामीण है. 2019 के आम चुनावों की वोटर लिस्ट के आधार पर यहां 312175 वोटर हैं, जिनके लिए चुनाव आयोग ने 326 पोलिंग स्टेशन बनाए थे. यहां के वोटर चुनाव में बढ़चढ़कर हिस्सा लेते हैं. 2019 के लोकसभा चुनावों में इस सीट पर 59.76% लोगों ने वोट डाला, वहीं 2015 के विधानसभा चुनावों में 56.27% लोगों ने मताधिकार का प्रयोग किया.
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