वैशाली लोकसभा सीट: अपने ही गढ़ में वापसी कर पाएगी RJD!

1994 में जब लालू प्रसाद का शासन पूरे रौ में था, उपचुनाव में लवली आनंद ने पूर्व सीएम सत्येंद्र नारायण सिंह की पत्नी किशोरी सिन्हा को पराजित कर दिया था. बिहार के चुनावी इतिहास में इसकी बड़ी चर्चा हुई थी और यह लालू प्रसाद की पहली राजनीतिक हार मानी जाती है.

News18 Bihar
Updated: May 11, 2019, 2:58 PM IST
वैशाली लोकसभा सीट: अपने ही गढ़ में वापसी कर पाएगी RJD!
वैशाली का बौद्ध स्तूप
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Updated: May 11, 2019, 2:58 PM IST
बिहार में लोकसभा चुनाव के छठे चरण के लिए चुनाव प्रचार थम चुका है. 12 मई को बिहार की वैशाली लोकसभा सीट पर भी मतदान होगा. बिहार की वैशाली लोकसभा सीट अपने आप में काफी खास है. दुनिया के पहले गणतंत्र के तौर पर जाना जाने वाला वैशाली विश्व में लोकतंत्र की प्रथम प्रयोगशाला भी है. यहीं से लिच्छवी राजवंश ने गणतांत्रिक व्यवस्था की शुरुआत की थी. यह क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से इतना समृद्ध है कि पुराण, उपनिषद, जैन और बौद्ध धर्म ग्रंथों में इसकी चर्चा है. सामाजिक सुधार में वैशाली का अपना स्थान है. ये वही भूमि है जहां महात्मा बुद्ध ने पहली बार नगरवधू आम्रपाली को संघ में महिलाओं के प्रवेश के रूप में अनुमति दी थी.

सामाजिक रूप से बेहद जागरूक वैशाली की राजनीति का अपना मन और मिजाज है. यहां का सियासी संघर्ष हमेशा सामाजिक न्याय की पृष्ठभूमि पर लड़ी जाती रही है, पर अगड़ी जाति के उम्मीदवार ही यहां से जीतते आए हैं. हालांकि बदलते दौर के साथ जन आकांक्षाएं बढ़ी हैं और लोग विकास के मुद्दों को आगे रखकर भी वोट कर रहे हैं. 2019 के लोकसभा चुनाव में भी विकास का मुद्दा हावी रहेगा.



लालू की पहली राजनीतिक हार !

वैशाली लोकसभा सीट के लिए अब तक 11 बार चुनाव हुए हैं. इनमें से 5 बार RJD को जीत मिली है. RJD के दिग्गज रघुवंश प्रसाद सिंह ने 5 बार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया. हालांकि 1994 में जब लालू प्रसाद का शासन पूरे रौ में था, उन दिनों हुए उपचुनाव में आनंद मोहन की पत्नी लवली आनंद ने पूर्व सीएम सत्येंद्र नारायण सिंह की पत्नी किशोरी सिन्हा को पराजित कर दिया था.

बिहार के चुनावी इतिहास में इस चुनाव की बड़ी चर्चा हुई थी और यह लालू प्रसाद की पहली राजनीतिक हार मानी जाती है.

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RJD की मजबूत पकड़
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1977 के आम चुनाव में जनता पार्टी के उम्मीदवार दिग्विजय नारायण सिंह यहां से चुनाव जीते थे़. 1980 और 1984 में किशोरी सिन्हा, 1989 में उषा सिंह, 1991 में शिवशरण सिंह यहां से सांसद बने. 1996 में पहली बार RJD के डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह ने यहां से जीत हासिल की़. इसके बाद लगातार 1998, 1999, 2004 और 2009 में डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह के सिर जीत का सेहरा बंधा. 2014 के चुनाव में LJP के रामाकिशोर सिंह ने डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह को हराया.

रघुवंश प्रसाद सिंह (फाइल फोटो)


विकास के दावे

वर्तमान सांसद रामाकिशोर सिंह से क्षेत्र की जनता को काफी उम्मीदें थीं. उनका कहना है कि उन्हें अपने संसदीय क्षेत्र में नए उद्योग नहीं लगाने, चीनी मिल नहीं खुलवा पाने और सिंचाई परियोजनाओं पर काम नहीं कर पाने का मलाल है. लेकिन उनका दावा है कि इसके अलावा उन्होंने काफी काम करवाए हैं.

रामाकिशोर सिंह का कहना है कि सांसद निधि से मिली राशि से कई काम करवाए हैं. इनमें 1000 सोलर लाइट लगवाए.  5 पोखर में सीढ़ी और घाट, 3 सामुदायिक भवन का निर्माण करवाने के साथ  132 सड़कों का निर्माण पूरा करवाया. साथ ही जर्जर स्कूल भवन की मरम्मत करवाईं और बिजली की जर्जर तारें भी बदलवाईं.

वैशाली के सांसद रामकिशोर सिंह (फाइल फोटो)


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सांसद का कहना है कि अपने निधि की 25 करोड़ रुपये की राशि में से 80 प्रतिशत खर्च कर चुके हैं. 700 करोड़ की लागत से हाजीपुर-सुगौली रेल लाईन का निर्माण चल रहा है. साथ ही रामाकिशोर सिंह का कहना है कि उनके प्रयास से वैशाली को विश्व हेरिटेज की अस्थायी सूची में शामिल किया गया है.

दावों की हकीकत
5 बार वैशाली के सांसद रहे और पिछले चुनाव में रामाकिशोर सिंह से चुनाव हारने वाले RJD के वरिष्ठ नेता रघुवंश प्रसाद सिंह सांसद रामाकिशोर सिंह के दावों को सिरे से खारिज कर रहे हैं. उनका कहना है कि रामकिशोर सिंह ने सांसद निधि से मिली राशि की अपने लोगों के बीच बंटरबांट की. सांसद ने क्षेत्र के विकास के लिए 5 सालों में कोई प्रयास नहीं किया.

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सांसद रामाकिशोर के दावों और रघुवंश बाबू के उठाए सवाल की जब हमने पड़ताल की तो पाया कि कई जगहों पर सोलर लाइटें लगी हैं. लोगों ने भी सांसद के इस प्रयास की सराहना की, लेकिन सांसद निधि से बनी ज्यादतर सड़कों के निर्माण में भारी गड़बड़ी बरती गयी है. कई सड़कें ऐसी हैं जो निर्माण के कुछ दिनों बाद ही टूट गईं हैं. लोगों का कहना है कि ठेकेदार ने घटिया निर्माण कराकर बड़ी राशि डकार ली है.

2015 में NDA का निकला दम  
वैशाली लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत विधानसभा की 6 सीटें हैं. वैशाली, कांटी, मीनापुर, बरूराज, साहेबगंज और पारू विधानसभा क्षेत्र को मिलाकर वैशाली लोकसभा क्षेत्र का गठन हुआ है. इस लोकसभा क्षेत्र में कुल 17 लाख 18 हजार 311 मतदाता हैं. 2015 को विधानसभा चुनाव में वैशाली से JDU और पारू से BJP को सफलता मिली थी. बरूराज, मीनापुर और साहेबगंज से RJD और कांटी से निर्दलीय अशोक कुमार चौधरी जीते थे.

अगड़ी जाति का बोलबाला

इस सीट पर अगड़ी जातियों को शुरू से बोल-बाला रहा है. यहां राजपूत, यादव और भूमिहार जाति के वोटर ज्यादा हैं, लेकिन कई उपजातियों को मिलाने के बाद अतिपछड़ों और दलितों की आबादी की यहां निर्णायक है. खासकर कुर्मी, कुशवाहा और नोनिया जाति को वोटर चुनाव पर असर डालते हैं.

जनता के मन में क्या है?

अपने कार्यकाल के दौरान रामाकिशोर सिंह को कारोबारी जयचंद वैद्य अपहरण कांड में छत्तीसगढ़ के दुर्ग जेल में सजा भी काटनी पड़ी. जेल से बाहर आने के बाद रामाकिशोर सिंह सक्रिय हैं. वहीं 5 बार वैशाली के सांसद रहे रघुवंश प्रसाद सिंह एक बार फिर यहां से ताल ठोकने के लिए तैयार हैं.

वैशाली की पूर्व सांसद लवली आनंद (फाइल फोटो)


बहरहाल सुनहरे इतिहास और जनता की जटिल समस्याओं के बीच एक बार फिर वैशाली में सभी दलों ने अपनी तैयारी शुरू कर दी है. NDA को केन्द्र और राज्य सरकार के काम पर भरोसा है. वहीं महागठबंधन को सांसद की विफलता और जातीय समीकरण पर. हालांकि वैशाली लोकसभा क्षेत्र की जनता के मन क्या है ये अभी साफ नहीं है.

रिपोर्ट- प्रवीण ठाकुर

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